IGNOU FREE BPCS-188 सामाजिक मनोविज्ञान का अनुप्रयोग Solved Guess Paper 2025
प्रश्न 1. अनुप्रयुक्त सामाजिक मनोविज्ञान (Applied Social Psychology) क्या है? इसके स्वरूप और महत्व को समझाइए।
अनुप्रयुक्त सामाजिक मनोविज्ञान वह क्षेत्र है जिसमें सामाजिक मनोविज्ञान की सिद्धांत, अवधारणाएँ और शोध निष्कर्षों का उपयोग वास्तविक जीवन की समस्याओं को हल करने में किया जाता है। यह यह समझने का प्रयास करता है कि लोग सामाजिक परिस्थितियों में क्यों और कैसे व्यवहार करते हैं तथा इस समझ का उपयोग समाज को बेहतर बनाने के लिए कैसे किया जा सकता है।
इसका स्वरूप (Nature) वैज्ञानिक, बहु-विषयक (Interdisciplinary), व्यावहारिक (Practical) और समस्या-केन्द्रित (Problem-focused) है। यह समाजशास्त्र, स्वास्थ्य विज्ञान, शिक्षा, प्रबंधन, संचार, जन-स्वास्थ्य और कानून जैसे क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है। इसका मुख्य उद्देश्य मानव व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाना है, जैसे—भेदभाव कम करना, स्वास्थ्य को बढ़ावा देना, अपराध घटाना, पर्यावरण संरक्षण बढ़ाना आदि।
अनुप्रयुक्त सामाजिक मनोविज्ञान की एक खास विशेषता यह है कि यह केवल सिद्धांतों पर आधारित नहीं रहता, बल्कि कार्यवाही (Action) और हस्तक्षेप (Intervention) पर आधारित होता है। यह अभियान, प्रशिक्षण कार्यक्रम, परामर्श, व्यवहार परिवर्तन तकनीकें और नीतियाँ विकसित करता है।
महत्त्व (Significance) के रूप में, यह समाज की अनेक समस्याओं को हल करने में योगदान देता है। यह भेदभाव, पूर्वाग्रह, हिंसा, नशा, घरेलू हिंसा, लैंगिक असमानता, अवसाद, तनाव, स्वास्थ्य समस्याओं और पर्यावरणीय मुद्दों को समझने और कम करने में मदद करता है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में यह लोगों को टीकाकरण, स्वच्छता, पोषण, व्यायाम और सुरक्षित व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित करता है। शिक्षा में यह शिक्षक–विद्यार्थी संबंध, सीखने की प्रेरणा, कक्षा प्रबंधन और परीक्षा तनाव को समझने में सहायता करता है। कानून और न्याय प्रणाली में यह गवाही की विश्वसनीयता, अपराधी व्यवहार, ज्यूरी निर्णय और पुलिस–जन संबंध को बेहतर बनाने में मदद करता है।
इस प्रकार, अनुप्रयुक्त सामाजिक मनोविज्ञान सिद्धांत और वास्तविक जीवन के बीच सेतु का काम करता है। यह वैज्ञानिक ज्ञान को मानव कल्याण, सामाजिक सुधार और सामुदायिक विकास के लिए उपयोग करता है।
Buy IGNOU Solved Guess Paper With Important Questions :-
CONTACT/WHATSAPP – 88822 85078
प्रश्न 2. सामाजिक समस्याओं को समझने में अनुप्रयुक्त सामाजिक मनोविज्ञान की भूमिका समझाइए।
सामाजिक समस्याएँ जैसे भेदभाव, हिंसा, नशा, गरीबी, तनाव, पर्यावरण प्रदूषण, अपराध और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियाँ केवल बाहरी परिस्थितियों से नहीं, बल्कि सामाजिक–मनोवैज्ञानिक कारकों से भी प्रभावित होती हैं। अनुप्रयुक्त सामाजिक मनोविज्ञान इन समस्याओं को वैज्ञानिक दृष्टि से समझने और कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
सबसे पहले, यह सामाजिक समस्याओं के मूल सामाजिक–मनोवैज्ञानिक कारणों की पहचान करता है। उदाहरण के लिए, भेदभाव और रूढ़िवादिता नकारात्मक सोच, सामाजिक सीखने, समूह पहचान (Group Identity) और सामाजिक तुलना से उत्पन्न होती है। हिंसा और आक्रामकता निराशा, मीडिया प्रभाव, क्रोध नियंत्रण की कमी और सामाजिक दबाव से जुड़ी होती है।
दूसरा, अनुप्रयुक्त सामाजिक मनोविज्ञान व्यवहार और दृष्टिकोण (Attitudes) को समझता है। लोग पर्यावरण को नुकसान क्यों पहुँचाते हैं? वे स्वास्थ्य संबंधी सलाहों का पालन क्यों नहीं करते? लोग सामाजिक नियमों को क्यों तोड़ते हैं? इन सभी प्रश्नों के उत्तर सामाजिक मनोविज्ञान के सिद्धांत देते हैं।
तीसरा, यह व्यवहार परिवर्तन (Behavior Change) पर कार्य करता है। सामाजिक समस्याओं को हल करने के लिए केवल जानकारी देना पर्याप्त नहीं होता—लोगों के दृष्टिकोण, मान्यताओं और भावनाओं को भी बदलना पड़ता है। इसके लिए अभियानों, जागरूकता कार्यक्रमों, समूह चर्चाओं, मॉडलिंग, प्रोत्साहन और सामाजिक दबाव जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाता है।
चौथा, यह संघर्ष, हिंसा और तनाव को कम करने के लिए सहयोग, सहानुभूति और संवाद को बढ़ावा देता है। स्कूलों, कार्यस्थलों और समुदायों में सह–अस्तित्व को मजबूत करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम बनाए जाते हैं।
पाँचवाँ, अनुप्रयुक्त सामाजिक मनोविज्ञान सरकारों, NGOs और संस्थाओं को प्रभावी नीतियाँ और हस्तक्षेप बनाने में मार्गदर्शन प्रदान करता है, जैसे सड़क सुरक्षा अभियान, स्वच्छ भारत अभियान, स्वास्थ्य जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम।
अतः, अनुप्रयुक्त सामाजिक मनोविज्ञान सामाजिक समस्याओं को समझने और समाधान देने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्रश्न 3. दृष्टिकोण (Attitude) निर्माण और दृष्टिकोण परिवर्तन को अनुप्रयुक्त संदर्भ में समझाइए।
दृष्टिकोण वह मानसिक प्रवृत्ति है जिसके द्वारा व्यक्ति किसी व्यक्ति, वस्तु, विचार या घटना के प्रति सकारात्मक या नकारात्मक मूल्यांकन करता है। दृष्टिकोण हमारे व्यवहार को गहराई से प्रभावित करते हैं। इसलिए अनुप्रयुक्त सामाजिक मनोविज्ञान दृष्टिकोण निर्माण और परिवर्तन दोनों का अध्ययन करता है।
दृष्टिकोण निर्माण कई प्रक्रियाओं से होता है—
-
सामाजिक सीख (Social Learning): परिवार, शिक्षक, मित्र और मीडिया से सीखी गई मान्यताएँ दृष्टिकोण बनाती हैं।
-
अनुभव (Experience): किसी चीज़ के साथ सकारात्मक या नकारात्मक अनुभव हमारे दृष्टिकोण को आकार देते हैं।
-
समूह प्रभाव (Group Influence): व्यक्ति अपनी पहचान, जाति, संस्कृति और साथियों के अनुसार दृष्टिकोण अपनाता है।
-
सूचना (Information): मीडिया, पुस्तकें और सामाजिक घटनाएँ हमें प्रभावित करती हैं।
अनुप्रयुक्त संदर्भ में, दृष्टिकोण बदलना बेहद आवश्यक होता है—विशेषकर नशा, धूम्रपान, पर्यावरण प्रदूषण, लैंगिक भेदभाव, हिंसा, अस्वच्छता और स्वास्थ्य व्यवहार से जुड़े मामलों में।
दृष्टिकोण परिवर्तन के लिए कई तकनीकों का प्रयोग होता है—
-
प्रेरक संचार (Persuasion): सही संदेश, सही स्रोत और सही भावनात्मक अपील का उपयोग करके दृष्टिकोण बदला जाता है।
-
कॉग्निटिव डिसोनेंस सिद्धांत: जब व्यक्ति के विचार और व्यवहार में विरोध होता है, तो वह अपने दृष्टिकोण बदलकर संतुलन स्थापित करता है।
-
रोल मॉडलिंग (Modelling): लोग समाज में प्रभावशाली व्यक्तियों को देखकर व्यवहार अपनाते हैं।
-
समूह चर्चा और शिक्षा: समूह में किए गए प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम दृष्टिकोण बदलने में प्रभावी होते हैं।
-
सामाजिक मानदंड: जब समाज किसी व्यवहार को गलत या सही घोषित करता है, तो लोग अपने दृष्टिकोण बदल देते हैं।
इस प्रकार, दृष्टिकोण निर्माण और परिवर्तन का अनुप्रयोग समाज में सकारात्मक व्यवहार लाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
Buy IGNOU Solved Guess Paper With Important Questions :-
CONTACT/WHATSAPP – 88822 85078
प्रश्न 4. स्वास्थ्य व्यवहार (Health Behavior) में सामाजिक मनोविज्ञान का अनुप्रयोग समझाइए।
स्वास्थ्य व्यवहार उन क्रियाओं को कहा जाता है जो व्यक्ति अपने स्वास्थ्य को बनाए रखने, रोगों से बचने और स्वस्थ जीवन जीने के लिए अपनाता है। सामाजिक मनोविज्ञान स्वास्थ्य व्यवहार को समझने और सुधारने में अहम भूमिका निभाता है क्योंकि अधिकांश स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ व्यवहार और सामाजिक प्रभाव पर आधारित होती हैं।
सबसे पहले, सामाजिक मनोविज्ञान यह समझने में मदद करता है कि लोग स्वास्थ्य संबंधी सलाह क्यों नहीं मानते—जैसे धूम्रपान छोड़ना, मास्क पहनना, टीकाकरण कराना, स्वस्थ भोजन करना या हाथ धोना। यह समझ Health Belief Model, सामाजिक मानदंड, आत्म-प्रभावकारिता और जोखिम धारणा पर आधारित होती है।
दूसरा, सामाजिक मनोविज्ञान स्वास्थ्य अभियानों को प्रभावी बनाता है। स्वास्थ्य विज्ञापन, पोस्टर, टीवी संदेश, सोशल मीडिया अभियान—all persuasive communication techniques—लोगों को स्वस्थ व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं। उदाहरण: “तंबाकू हानिकारक है”, “टीका सुरक्षित है”, “हेलमेट पहनें”, “पोषणयुक्त भोजन खाएँ” आदि संदेश।
तीसरा, यह समुदाय आधारित कार्यक्रमों में उपयोग होता है। स्वास्थ्य कार्यकर्ता, NGO, आंगनवाड़ी, स्कूल और युवा क्लब लोगों को स्वच्छता, परिवार नियोजन, पोषण, स्वच्छ जल और मानसिक स्वास्थ्य के बारे में शिक्षित करते हैं। समूह चर्चा और रोल-प्ले कभी-कभी व्यक्तिगत सलाह से अधिक प्रभावी सिद्ध होते हैं।
चौथा, सामाजिक मनोविज्ञान व्यवहार परिवर्तन के अवरोधों की पहचान करता है। लोग समय की कमी, गलत धारणाओं, शर्म, सामाजिक दबाव या आदतों के कारण स्वास्थ्य व्यवहार नहीं अपनाते। इन अवरोधों को कम करने के लिए सरल, सुविधाजनक और सकारात्मक विकल्प तैयार किए जाते हैं।
अंत में, यह स्वास्थ्य नीति बनाने में भी योगदान देता है। सरकारें जब स्वच्छता, टीकाकरण, पोषण और सड़क सुरक्षा से संबंधित नीतियाँ बनाती हैं, तो सामाजिक मनोविज्ञान के सिद्धांत उन नीतियों को अधिक प्रभावी बनाते हैं।
इस प्रकार, सामाजिक मनोविज्ञान स्वास्थ्य को बढ़ावा देने, बीमारियों को रोकने और स्वस्थ समाज बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्रश्न 5. पूर्वाग्रह (Prejudice) और भेदभाव को कम करने में सामाजिक मनोविज्ञान की भूमिका समझाइए।
पूर्वाग्रह और भेदभाव समाज के गंभीर मुद्दे हैं, जो जाति, धर्म, भाषा, लिंग, आर्थिक स्थिति या समूह पहचान के आधार पर उत्पन्न होते हैं। सामाजिक मनोविज्ञान इनके कारणों को समझता है और उन्हें कम करने के लिए प्रभावी रणनीतियाँ विकसित करता है।
सबसे पहले, सामाजिक मनोविज्ञान बताता है कि पूर्वाग्रह सीखने से बनते हैं—परिवार, मीडिया, समाज और अनुभवों से व्यक्ति stereotypes अपनाता है। इन्हें बदलने के लिए शिक्षा और जागरूकता आवश्यक है।
Intergroup Contact Theory के अनुसार, जब दो अलग-अलग समूह समानता और सहयोग की स्थिति में मिलते हैं, तो गलत धारणाएँ टूटती हैं और समझ बढ़ती है। जैसे—स्कूलों में मिश्रित समूह गतिविधियाँ।
सहानुभूति (Empathy) बढ़ाना भी प्रभावी तरीका है। जब लोग दूसरों की भावनाओं और कठिनाइयों को समझते हैं, तो घृणा कम होती है।
सकारात्मक मॉडलिंग भी उपयोगी है। मीडिया, फिल्मों, नेताओं और प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा सहिष्णुता और समानता का संदेश फैलाना पूर्वाग्रह कम करता है।
सामाजिक मानदंडों का बड़ा प्रभाव है। जब समाज या कानून भेदभाव को गलत घोषित करते हैं, तो लोग अपने व्यवहार बदलते हैं।
इस प्रकार, सामाजिक मनोविज्ञान शिक्षा, सहानुभूति, संवाद, संपर्क और सकारात्मक मानदंडों के माध्यम से भेदभाव और पूर्वाग्रह को कम करता है।
प्रश्न 6. विधि (Law) और अपराध न्याय प्रणाली (Criminal Justice System) में सामाजिक मनोविज्ञान का अनुप्रयोग समझाइए।
सामाजिक मनोविज्ञान विधि और अपराध न्याय प्रणाली में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है क्योंकि अपराध, न्याय, निर्णय, स्मृति, गवाही, पुलिस–जन संबंध और दंड जैसे सभी पहलू मानव व्यवहार तथा सामाजिक प्रभाव से गहराई से जुड़े होते हैं। सामाजिक मनोविज्ञान इन व्यवहारों को वैज्ञानिक रूप से समझकर न्याय प्रणाली को अधिक निष्पक्ष, मानवीय और प्रभावी बनाने में सहायता करता है।
सबसे पहला अनुप्रयोग आँखोंदेखी गवाही (Eyewitness Testimony) में देखा जाता है। शोध बताता है कि मानव स्मृति सटीक नहीं होती, बल्कि पुनर्निर्मित (Reconstructive) होती है। तनाव, डर, खराब रोशनी, दूरी, पुलिस द्वारा पूछे गए मार्गदर्शी प्रश्न (Leading Questions) और व्यक्ति की पूर्व-धारणाएँ गवाही को गलत बना सकती हैं। इन समस्याओं को कम करने के लिए सामाजिक मनोवैज्ञानिक “Cognitive Interview Technique” जैसी वैज्ञानिक विधियाँ विकसित करते हैं, जिससे गवाही अधिक सटीक मिल सके।
दूसरा अनुप्रयोग ज्यूरी और न्यायिक निर्णय में है। कई देशों में ज्यूरी सिस्टम है जहाँ साधारण लोग गवाहियों और सबूतों के आधार पर दोष तय करते हैं। सामाजिक मनोविज्ञान बताता है कि ज्यूरी सदस्य समूह दबाव, रूढ़िवादिता, पहली छवि (First Impression), और भावनात्मक प्रतिक्रियाओं से प्रभावित हो सकते हैं। अतः, निर्णय प्रक्रिया को अधिक निष्पक्ष बनाने के लिए प्रशिक्षण, निर्देश और वैज्ञानिक दिशानिर्देश तैयार किए जाते हैं।
सामाजिक मनोविज्ञान अपराध व्यवहार (Criminal Behavior) को भी गहराई से समझता है। गरीबी, बेरोज़गारी, नशा, टूटे परिवार, आक्रामकता, मीडिया हिंसा, असमानता, साथियों का दबाव (Peer Pressure) और गलत सामाजिक मानदंड अपराध को बढ़ाते हैं। इन कारणों को समझकर ऐसे कार्यक्रम बनाए जाते हैं जो अपराध रोकथाम और पुनर्वास में मदद करें।
पुलिस–जन संबंध भी सामाजिक मनोविज्ञान का बड़ा क्षेत्र है। जनता का पुलिस पर विश्वास न्याय व्यवस्था के लिए आवश्यक है। इसलिए पुलिस के लिए सहानुभूति, संचार, अहिंसक हस्तक्षेप, तनाव प्रबंधन और संघर्ष समाधान का प्रशिक्षण तैयार किया जाता है। इससे हिंसा कम होती है और सहयोग बढ़ता है।
अंत में, सामाजिक मनोविज्ञान पुनर्वास (Rehabilitation) विधियों को मजबूत करता है। अपराधियों को केवल दंड देना समाधान नहीं है। व्यवहार थेरेपी, काउंसलिंग, जीवन-कौशल प्रशिक्षण, शिक्षा और सामाजिक समर्थन उन्हें पुनः समाज में स्थापित करते हैं।
इस प्रकार, सामाजिक मनोविज्ञान न्याय प्रणाली को अधिक वैज्ञानिक, दयालु और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
Buy IGNOU Solved Guess Paper With Important Questions :-
CONTACT/WHATSAPP – 88822 85078
प्रश्न 7. शिक्षा (Education) में सामाजिक मनोविज्ञान का महत्व समझाइए।
शिक्षा एक सामाजिक प्रक्रिया है जहाँ विद्यार्थी, शिक्षक, अभिभावक और संस्था के बीच लगातार सामाजिक अंतःक्रिया होती है। इस कारण सामाजिक मनोविज्ञान शिक्षा प्रणाली में अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह सीखने की प्रक्रिया, प्रेरणा, व्यवहार, समूह प्रभाव, भावनाओं और कक्षा वातावरण को गहराई से समझने में सहायता करता है।
सामाजिक मनोविज्ञान का पहला योगदान प्रेरणा (Motivation) को समझने में है। विद्यार्थी क्यों सीखते हैं, कैसे सीखते हैं, और कब रुचि खो देते हैं—ये सभी प्रश्न सामाजिक–मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों से समझे जाते हैं। आत्म-प्रभावकारिता (Self-Efficacy), लक्ष्य निर्धारण, पुरस्कार–दंड, और सामाजिक तुलना (Social Comparison) जैसे सिद्धांत विद्यार्थियों को अधिक प्रेरित करते हैं।
दूसरा महत्वपूर्ण क्षेत्र शिक्षक–विद्यार्थी संबंध है। सकारात्मक संबंध विद्यार्थियों की उपलब्धि, आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ाते हैं। शिक्षक यदि सहानुभूतिपूर्ण, न्यायपूर्ण और संवादात्मक हों, तो कक्षा का वातावरण और अधिक सहयोगी बनता है।
सामाजिक मनोविज्ञान सहपाठी प्रभाव (Peer Influence) को भी समझता है। बच्चे अपने साथियों को देखकर व्यवहार सीखते हैं। यदि समूह सकारात्मक हो तो सहयोग, नेतृत्व, मित्रता और सीखने में वृद्धि होती है; यदि नकारात्मक हो तो बुलीइंग, प्रतिस्पर्धा और गलत आदतें बढ़ सकती हैं। इसलिए समूह गतिविधियाँ, टीम प्रोजेक्ट और सहपाठी शिक्षण उपयोगी होते हैं।
यह परीक्षा तनाव, प्रदर्शन चिंता और असफलता के डर को भी समझने में सहायता करता है। काउंसलिंग, समय प्रबंधन, तनाव प्रबंधन, माइंडफुलनेस और सकारात्मक सुदृढीकरण तकनीकें विद्यार्थियों को मानसिक रूप से सक्षम बनाती हैं।
सामाजिक मनोविज्ञान रूढ़िवाद, भेदभाव और लैंगिक असमानता को कम करने में सहायक है। कक्षा में समानता, विविधता और समावेश (Inclusion) को बढ़ाने वाली रणनीतियाँ सामंजस्यपूर्ण वातावरण बनाती हैं।
इस प्रकार, सामाजिक मनोविज्ञान शिक्षा प्रणाली को अधिक प्रभावी, समरस और विद्यार्थी–केंद्रित बनाता है।
प्रश्न 8. संगठनों (Organizations) में सामाजिक मनोविज्ञान का अनुप्रयोग समझाइए।
आधुनिक संगठन केवल कार्यस्थल नहीं, बल्कि सामाजिक प्रणालियाँ हैं जहाँ लोग आपस में संवाद करते हैं, सहयोग करते हैं और एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं। इसलिए सामाजिक मनोविज्ञान संगठनों की कार्यक्षमता, व्यवहार, संचार, नेतृत्व और टीमवर्क को समझने के लिए अत्यंत उपयोगी है।
इसका पहला अनुप्रयोग नेतृत्व (Leadership) में है। सामाजिक मनोविज्ञान समझाता है कि नेता कैसे अपने कर्मियों को प्रेरित करते हैं, उनका विश्वास जीतते हैं और कार्यस्थल पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। परिवर्तनकारी नेतृत्व (Transformational Leadership) जैसे सिद्धांत कर्मचारियों में प्रेरणा, जिम्मेदारी और नवाचार बढ़ाते हैं।
दूसरा क्षेत्र टीम व समूह व्यवहार है। संगठन में कार्य अक्सर समूहों द्वारा किया जाता है। समूह मानदंड, भूमिकाएँ, सहयोग, संचार और संघर्ष टीम प्रदर्शन को प्रभावित करते हैं। टीम–निर्माण गतिविधियाँ, संयुक्त कार्य, समूह चर्चा और संघर्ष समाधान तकनीकें टीमवर्क को मजबूत करती हैं।
तीसरा अनुप्रयोग प्रेरणा (Motivation) बढ़ाने में है। कर्मचारी बेहतर तब काम करते हैं जब उन्हें मान्यता, सराहना, उचित पुरस्कार, न्यायपूर्ण व्यवहार और विकास के अवसर मिलते हैं। सामाजिक मनोविज्ञान यह समझने में मदद करता है कि कौन-से प्रोत्साहन (Incentives) कर्मचारियों पर अधिक प्रभाव डालते हैं।
संगठनों में तनाव प्रबंधन भी आवश्यक है। अत्यधिक कार्यभार, समय सीमा, खराब संचार और कम नियंत्रण तनाव का कारण बनते हैं। सामाजिक मनोविज्ञान तनाव कम करने के लिए प्रशिक्षण, काउंसलिंग, लचीले कार्य घंटे और सहायक नेतृत्व की अनुशंसा करता है।
इसके अलावा, सामाजिक मनोविज्ञान संगठनात्मक संस्कृति, नैतिकता, विविधता, समानता और समावेश को भी सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विविधता प्रशिक्षण, लैंगिक समानता कार्यक्रम, और संचार कौशल कार्यस्थल को सुरक्षित और सहयोगी बनाते हैं।
अतः, सामाजिक मनोविज्ञान संगठनों को अधिक प्रभावी, सामंजस्यपूर्ण और उत्पादक बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
Buy IGNOU Solved Guess Paper With Important Questions :-
CONTACT/WHATSAPP – 88822 85078
प्रश्न 9. पर्यावरण संरक्षण में सामाजिक मनोविज्ञान की भूमिका समझाइए।
पर्यावरणीय समस्याएँ—जैसे प्रदूषण, जल संकट, कचरा प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन—मुख्यतः मानव व्यवहार के कारण उत्पन्न होती हैं। इसलिए इन समस्याओं का समाधान भी व्यवहार परिवर्तन से ही संभव है, और यही क्षेत्र सामाजिक मनोविज्ञान का है।
सामाजिक मनोविज्ञान बताता है कि सामाजिक मानदंड (Social Norms) लोगों के व्यवहार पर गहरा प्रभाव डालते हैं। जब किसी समुदाय में पानी बचाना, कचरा अलग करना, ऊर्जा बचत या स्वच्छता को सामान्य व्यवहार माना जाता है, तो व्यक्ति स्वयं भी इन आदतों को अपनाता है।
प्रेरक संचार (Persuasive Communication) पर्यावरण संरक्षण में अत्यंत प्रभावी है। पोस्टर, विज्ञापन, टीवी संदेश, सोशल मीडिया, नारे, भावनात्मक अपील और नैतिक अपील लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाते हैं।
सामाजिक मनोविज्ञान रवैये (Attitudes) में बदलाव लाता है। स्कूलों, कॉलेजों, NGOs और समुदायों में पर्यावरण शिक्षा, वृक्षारोपण अभियान, सफाई अभियान और कार्यशालाएँ लोगों के दृष्टिकोण को सकारात्मक बनाती हैं।
समूह प्रभाव (Peer Influence) भी महत्वपूर्ण है। जब लोग अपने पड़ोसियों या मित्रों को पर्यावरण–हितैषी गतिविधियाँ करते देखते हैं, तो वे भी इन कार्यों को अपनाते हैं।
कई बार लोग पर्यावरण के लिए कदम नहीं उठाते क्योंकि वे इसे कठिन, समय लेने वाला या बेकार समझते हैं। सामाजिक मनोविज्ञान इन व्यवहारिक अवरोधों की पहचान करता है और सरल व सुविधाजनक समाधान तैयार करता है—जैसे कचरा पेटियाँ पास में लगाना, रीसाइक्लिंग केंद्र खोलना, या पानी बचत उपकरण उपलब्ध कराना।
इस प्रकार, सामाजिक मनोविज्ञान पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूकता, प्रेरणा, सामाजिक सहयोग और व्यवहार परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्रश्न 10. सामुदायिक विकास (Community Development) में सामाजिक मनोविज्ञान का योगदान समझाइए।
सामाजिक मनोविज्ञान समुदायों में रहने वाले लोगों के व्यवहार, दृष्टिकोण, संबंध और समूह प्रक्रियाओं को समझकर सामुदायिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है। समुदायों में गरीबी, नशा, हिंसा, भेदभाव, स्वास्थ्य समस्याएँ, बेरोज़गारी, असमानता और शिक्षा की कमी जैसी अनेक चुनौतियाँ होती हैं। सामाजिक मनोविज्ञान इन समस्याओं के सामाजिक–मनोवैज्ञानिक कारणों की पहचान करके उनके समाधान प्रस्तुत करता है।
सबसे पहला योगदान सामुदायिक भागीदारी (Community Participation) को बढ़ावा देना है। जब लोग स्वयं को समुदाय का हिस्सा मानते हैं, तो वे स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षा से जुड़े कार्यों में सक्रिय भाग लेते हैं। सामाजिक मनोविज्ञान सामूहिक पहचान (Collective Identity) बनाकर सहयोग बढ़ाता है।
दूसरा महत्वपूर्ण योगदान नेतृत्व विकास (Leadership Development) है। प्रभावी नेता समुदाय में प्रेरणा, संगठन, निर्णय और संघर्ष समाधान में बड़ी भूमिका निभाते हैं। सामाजिक मनोविज्ञान नेताओं को संचार, सहानुभूति, प्रेरणा और समस्या–समाधान में प्रशिक्षित करता है।
समुदायों में कई समस्याएँ व्यवहार से जुड़ी होती हैं—जैसे खुले में शौच, शराब सेवन, घरेलू हिंसा, अस्वच्छता, स्कूल छोड़ना, दहेज आदि। सामाजिक मनोविज्ञान ऐसे व्यवहार परिवर्तन कार्यक्रम तैयार करता है जिनमें समझाइश, रोल मॉडलिंग, समूह बैठकें, मीडिया संदेश, और पुरस्कार–दंड प्रणाली शामिल होती हैं।
सामाजिक समर्थन प्रणाली—जैसे स्वयं सहायता समूह, युवा क्लब, महिला मंडल, और NGO—सामाजिक मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित होते हैं। ये समूह भावनात्मक समर्थन, आर्थिक सहयोग, शिक्षा और जागरूकता प्रदान करते हैं।
सामाजिक मनोविज्ञान समुदाय में संघर्ष समाधान में भी महत्वपूर्ण है। संवाद, मध्यस्थता, सहानुभूति, और सामूहिक चर्चा के माध्यम से समुदाय में शांति बहाल की जाती है।
अतः, सामाजिक मनोविज्ञान समुदाय को अधिक संगठित, जागरूक, स्वस्थ और सक्षम बनाने में अत्यंत आवश्यक है।
Buy IGNOU Solved Guess Paper With Important Questions :-
CONTACT/WHATSAPP – 88822 85078
Follow For Updates: senrigbookhouse
Read Also :