IGNOU FREE BPAS-186 तनाव एवं समय प्रबंधन Solved Guess Paper 2025
प्रश्न 1. तनाव (Stress) क्या है? इसके स्वरूप, कारण और प्रभाव समझाइए।
तनाव वह मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक प्रतिक्रिया है जो तब उत्पन्न होती है जब व्यक्ति को किसी कार्य, परिस्थिति या दायित्व को पूरा करना कठिन, दबावपूर्ण या चुनौतीपूर्ण लगता है। यह मानव जीवन का स्वाभाविक हिस्सा है, लेकिन जब तनाव अत्यधिक हो जाता है या लंबे समय तक बना रहता है, तब यह स्वास्थ्य और व्यवहार को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।
तनाव का स्वरूप (Nature of Stress) बहुआयामी है। तनाव बाह्य (External) भी हो सकता है और आंतरिक (Internal) भी। बाह्य तनाव जैसे काम का दबाव, भीड़भाड़, आर्थिक समस्या आदि से उत्पन्न होता है, जबकि आंतरिक तनाव नकारात्मक सोच, भय, पूर्णतावाद (Perfectionism) और आत्म-संदेह से पैदा होता है। तनाव सकारात्मक (Eustress) भी हो सकता है, जैसे परीक्षा की तैयारी के दौरान हल्का दबाव व्यक्ति को मेहनत करने के लिए प्रेरित करता है। वहीं नकारात्मक तनाव (Distress) हानिकारक होता है।
तनाव के प्रमुख कारण कई प्रकार के होते हैं—
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व्यक्तिगत कारण: पारिवारिक तनाव, पैसे की समस्या, स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियाँ, रिश्तों में विवाद।
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व्यावसायिक कारण: अत्यधिक कार्यभार, समय सीमा का दबाव, नौकरी की असुरक्षा, कार्यस्थल पर संघर्ष, खराब नेतृत्व।
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शैक्षणिक कारण: छात्रों पर परीक्षा दबाव, करियर की चिंता, असाइनमेंट और प्रतिस्पर्धा।
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पर्यावरणीय कारण: ट्रैफिक, भीड़, शोर, प्रदूषण।
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मनोवैज्ञानिक कारण: नकारात्मक विचार, भय, आत्मविश्वास की कमी, अपेक्षाओं का बोझ।
तनाव के प्रभाव शारीरिक, मानसिक और व्यवहारिक तीनों स्तरों पर दिखाई देते हैं। शारीरिक प्रभावों में सिरदर्द, थकान, अनिद्रा, रक्तचाप बढ़ना और पाचन समस्या शामिल हैं। मानसिक प्रभावों में चिंता, चिड़चिड़ापन, ध्यान की कमी, निर्णय लेने में कठिनाई और अवसाद की संभावना बढ़ना शामिल है। व्यवहारिक प्रभावों में अधिक खाना, धूम्रपान, शराब सेवन, सामाजिक दूरी और कार्यक्षमता में कमी शामिल हैं।
अतः, तनाव जीवन का सामान्य हिस्सा है, लेकिन इसके कारणों को समझकर और समय पर सही उपाय अपनाकर इसे नियंत्रित किया जा सकता है।
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प्रश्न 2. समय प्रबंधन (Time Management) क्या है? व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में इसका महत्त्व समझाइए।
समय प्रबंधन वह कला है जिसके माध्यम से व्यक्ति अपने समय का सही नियोजन, संगठन और नियंत्रण करता है ताकि वह अपने लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से प्राप्त कर सके। समय सीमित संसाधन है, इसलिए इसका सही उपयोग जीवन की सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
व्यक्तिगत जीवन में समय प्रबंधन का महत्त्व अत्यधिक है। जो व्यक्ति अपना समय सही ढंग से उपयोग करता है, वह अपने दैनिक कार्यों को समय पर पूरा कर पाता है, जिससे तनाव और चिंता कम होती है। समय रहते कार्य पूरे होने से व्यक्ति परिवार, मित्रों और शौक के लिए समय निकाल सकता है, जिससे जीवन संतुलित और खुशहाल बनता है। समय प्रबंधन आत्म-अनुशासन और आत्मविश्वास बढ़ाता है और व्यक्ति को उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने में सहायता करता है।
व्यावसायिक जीवन में समय प्रबंधन सफलता की कुंजी है। कार्यस्थल पर कर्मचारियों को कई जिम्मेदारियाँ निभानी होती हैं। यदि समय प्रबंधन खराब हो, तो काम अधूरा रह जाता है, समय सीमा पूरी नहीं होती और तनाव बढ़ता है। जो कर्मचारी अपने कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करते हैं, वे बेहतर प्रदर्शन करते हैं और संगठन के लिए उपयोगी साबित होते हैं। इससे उनके करियर में उन्नति के अवसर भी बढ़ते हैं।
समय प्रबंधन के कुछ प्रमुख साधन हैं—
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कार्य सूची (To-do List) बनाना
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दैनिक और साप्ताहिक योजनाएँ
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प्राथमिकताएँ तय करना
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विलंब (Procrastination) से बचना
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समय-ब्लॉक तकनीक अपनाना
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डिजिटल कैलेंडर और रिमाइंडर का उपयोग
सही समय प्रबंधन न केवल व्यक्ति की कार्यक्षमता बढ़ाता है बल्कि मानसिक शांति भी प्रदान करता है। यह तनाव कम करता है, जीवन में संतुलन लाता है और दीर्घकालिक सफलता सुनिश्चित करता है।
अतः, समय प्रबंधन व्यक्तिगत और व्यावसायिक दोनों स्तरों पर एक अनिवार्य कौशल है, जो व्यक्ति को अधिक संगठित, उत्पादक और संतुलित बनाता है।
प्रश्न 3. तनाव और समय प्रबंधन का परस्पर संबंध समझाइए।
तनाव और समय प्रबंधन एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। जब समय प्रबंधन कमजोर होता है, तो तनाव स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है, और जब तनाव बढ़ता है, तो समय का उचित उपयोग करना और कठिन हो जाता है। इस प्रकार, दोनों एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं।
कमजोर समय प्रबंधन तनाव का सबसे बड़ा स्रोत है। जब व्यक्ति कार्यों को प्राथमिकता नहीं देता, विलंब करता है या समय पर योजना नहीं बनाता, तो अंतिम क्षण में दबाव बढ़ जाता है। यह स्थिति चिंता, डर और तनाव को जन्म देती है। उदाहरण के लिए, यदि कोई छात्र अंतिम दिन तक पढ़ाई न करे, तो परीक्षा के समय तनाव बहुत अधिक हो जाता है।
दूसरी ओर, अच्छा समय प्रबंधन तनाव को कम करता है। जब व्यक्ति अपने कार्यों को सुव्यवस्थित करता है, योजनाएँ बनाता है और समय पर पूरा करता है, तो मानसिक बोझ कम रहता है। उसे पता होता है कि कौन-सा काम कब करना है, इसलिए अनिश्चितता और असमंजस कम होता है।
समय प्रबंधन व्यक्ति को बड़े कार्यों को छोटे-छोटे हिस्सों में बाँटने में सहायता करता है, जिससे काम सरल और कम तनावपूर्ण लगता है। यह तकनीक “चंकिंग” कहलाती है।
तनाव बढ़ने पर व्यक्ति की एकाग्रता और निर्णय क्षमता कम होती है, जिससे समय बर्बाद होता है और कार्य धीमी गति से होते हैं। इससे और अधिक तनाव पैदा होता है—यह एक दुष्चक्र (Vicious Cycle) बन जाता है।
अच्छा समय प्रबंधन इस चक्र को तोड़ता है। यह व्यक्ति को समय पर सोने, खाने, विश्राम करने और कार्य करने की आदत डालता है, जिससे शरीर और मन दोनों स्वस्थ रहते हैं।
अतः, तनाव और समय प्रबंधन एक-दूसरे के पूरक हैं। समय प्रबंधन बेहतर हो तो तनाव कम रहता है, और तनाव कम हो तो समय का उपयोग अधिक प्रभावी रूप से किया जा सकता है।
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प्रश्न 4. आधुनिक जीवन में तनाव के प्रमुख स्रोतों को उदाहरण सहित समझाइए।
आधुनिक जीवन तेज़, प्रतिस्पर्धी और लगातार बदलता हुआ है, जिसके कारण तनाव कई स्तरों पर बढ़ रहा है। तनाव के प्रमुख स्रोतों को व्यक्तिगत, सामाजिक, व्यावसायिक और पर्यावरणीय वर्गों में बाँटा जा सकता है।
1. व्यक्तिगत स्रोत:
व्यक्तिगत समस्याएँ तनाव का सबसे बड़ा स्रोत हैं। आर्थिक संकट, परिवारिक झगड़े, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ, रिश्तों में असंतोष और भविष्य की चिंता व्यक्ति के मानसिक संतुलन को प्रभावित करती हैं। उदाहरण के लिए, बेरोज़गारी या कर्ज़ का बोझ व्यक्ति को अत्यधिक तनाव देता है।
2. व्यावसायिक स्रोत:
आज के कार्यस्थलों में प्रतिस्पर्धा बहुत अधिक है। लंबे कार्य घंटे, अत्यधिक कार्यभार, समय सीमा का दबाव, नौकरी की असुरक्षा, कार्यस्थल पर राजनीति—ये सभी तनाव बढ़ाने वाले तत्व हैं। उदाहरण के लिए, एक कर्मचारी को यदि रोज़ ओवरटाइम करना पड़ता है, तो वह शारीरिक और मानसिक रूप से थक जाता है।
3. शैक्षणिक स्रोत:
छात्रों का तनाव भी तेजी से बढ़ रहा है। परीक्षा का दबाव, असाइनमेंट, करियर की चिंता, प्रतिस्पर्धा, माता-पिता की अपेक्षाएँ—ये सब उनके तनाव का कारण बने हुए हैं।
4. सामाजिक स्रोत:
सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग से तुलना, ईर्ष्या, FOMO (Fear of Missing Out) जैसी स्थितियाँ पैदा होती हैं। इससे मानसिक तनाव बढ़ता है।
5. पर्यावरणीय स्रोत:
ट्रैफिक जाम, प्रदूषण, भीड़, शोर—ये सभी तनाव उत्पन्न करने वाले बाहरी कारक हैं। उदाहरण के लिए, रोज़ाना भीड़-भाड़ वाली बस या मेट्रो से यात्रा करना व्यक्ति को मानसिक रूप से थका देता है।
6. आंतरिक स्रोत:
व्यक्ति की सोच भी तनाव का कारण बन सकती है—जैसे पूर्णतावाद, नकारात्मक सोच, डर, आत्मविश्वास की कमी।
इस प्रकार, आधुनिक जीवन अनेक तनाव-उत्पादक परिस्थितियों से भरा है, लेकिन जागरूकता और सही रणनीतियों के साथ इन तनाव स्रोतों को नियंत्रित किया जा सकता है।
प्रश्न 5. कमजोर समय प्रबंधन के लक्षण और परिणाम समझाइए।
कमजोर समय प्रबंधन वह स्थिति है जिसमें व्यक्ति अपने समय का प्रभावी उपयोग नहीं कर पाता। इससे उसके कार्य अव्यवस्थित, अधूरे और विलंबित हो जाते हैं।
कमजोर समय प्रबंधन के लक्षण:
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विलंब (Procrastination): व्यक्ति महत्वपूर्ण कार्यों को टालता रहता है।
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अव्यवस्थित कार्यसूची: क्या करना है, कब करना है—इसकी स्पष्टता नहीं होती।
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भूलने की आदत: आवश्यक तिथियाँ और कार्य छूट जाते हैं।
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एकाग्रता की कमी: ध्यान बार-बार भटकता है।
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लगातार भाग-दौड़: व्यक्ति हमेशा जल्दी में रहता है, लेकिन काम पूरा नहीं होता।
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प्राथमिकता तय न कर पाना: महत्वपूर्ण और गैर-जरूरी काम में अंतर नहीं कर पाता।
कमजोर समय प्रबंधन के परिणाम:
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तनाव और चिंता में वृद्धि: जब कार्य समय पर नहीं होते, तो तनाव बढ़ता है।
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कार्य-क्षमता में कमी: व्यक्ति अपेक्षा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाता।
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समय सीमाएँ टूटना: इससे कार्यस्थल या पढ़ाई में प्रतिष्ठा प्रभावित होती है।
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काम की निम्न गुणवत्ता: कम समय बचने के कारण काम जल्दबाजी में होता है।
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जीवन में असंतुलन: परिवार, स्वास्थ्य और व्यक्तिगत समय प्रभावित होता है।
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स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव: नींद की कमी, सिरदर्द, थकान जैसी समस्याएँ होती हैं।
कमजोर समय प्रबंधन से बचने के लिए योजना बनाना, प्राथमिकता तय करना, स्वयं को अनुशासित रखना और विलंब की आदत छोड़ना आवश्यक है।
प्रश्न 6. तनाव प्रबंधन (Stress Management) क्या है? इसके प्रमुख उपाय समझाइए।
तनाव प्रबंधन वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से व्यक्ति अपने मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक तनाव को नियंत्रित, कम या समाप्त करने का प्रयास करता है। तनाव जीवन का हिस्सा है, लेकिन जब यह अधिक बढ़ जाता है या लंबे समय तक जारी रहता है तब यह स्वास्थ्य, व्यवहार और कार्यक्षमता को प्रभावित करता है। तनाव प्रबंधन का उद्देश्य तनाव के कारणों को पहचानना, उनसे निपटने की प्रभावी रणनीतियाँ बनाना और जीवन में संतुलन स्थापित करना है।
तनाव प्रबंधन के प्रमुख उपायों में सबसे पहले विश्रांति तकनीकें आती हैं, जैसे गहरी साँस लेना, ध्यान, योग, प्राणायाम और माइंडफुलनेस। ये तकनीकें मन को शांत करके तनाव के स्तर को कम करती हैं। शारीरिक व्यायाम, जैसे चलना, दौड़ना या योगाभ्यास, शरीर में एंडोर्फिन नामक “फील-गुड” रसायन बढ़ाता है, जिससे तनाव कम होता है।
समय प्रबंधन तनाव को कम करने का एक महत्वपूर्ण उपाय है। जब कार्य योजना स्पष्ट हो, कार्यों की प्राथमिकता तय हो और विलंब न किया जाए, तो मानसिक दबाव कम होता है।
सकारात्मक सोच और विचारों का पुनर्गठन भी तनाव को घटाता है। नकारात्मक विचार व्यक्ति की चिंता बढ़ाते हैं, जबकि सकारात्मक दृष्टिकोण बेहतर समाधान प्रदान करता है।
स्वस्थ जीवनशैली अपनाना भी आवश्यक है—पर्याप्त नींद, पौष्टिक भोजन, पानी का सेवन, और नशे से दूरी तनाव प्रबंधन में सहायक हैं।
इसके अतिरिक्त, सामाजिक समर्थन भी महत्वपूर्ण है। परिवार, दोस्तों या किसी परामर्शदाता से बात करना तनाव को कम करता है और मानसिक राहत देता है।
इस प्रकार, तनाव प्रबंधन विभिन्न तकनीकों और आदतों का सम्मिलित रूप है जो व्यक्ति को मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक रूप से संतुलित रहने में सहायता करता है।
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प्रश्न 7. बर्नआउट (Burnout) क्या है? इसके कारण और रोकथाम समझाइए।
बर्नआउट एक ऐसी अवस्था है जिसमें व्यक्ति अत्यधिक मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक थकावट महसूस करता है। यह लंबे समय तक बने रहने वाले कार्यभार, दबाव, अपेक्षाओं और तनाव के कारण विकसित होता है। बर्नआउट केवल थकान नहीं है, बल्कि प्रेरणा का घट जाना, नकारात्मक सोच, चिड़चिड़ापन और काम में रुचि कम होना इसके लक्षण हैं।
बर्नआउट के प्रमुख कारणों में पहला है अत्यधिक कार्यभार और लगातार काम करते रहना। जब व्यक्ति को पर्याप्त आराम नहीं मिलता, तो ऊर्जा धीरे-धीरे समाप्त होने लगती है। दूसरा कारण है नियंत्रण की कमी, जहाँ व्यक्ति को लगता है कि उसके काम, समय या निर्णयों पर उसका अधिकार नहीं है।
तीसरा कारण काम और निजी जीवन में असंतुलन है। लगातार ऑफिस कार्यों में व्यस्त रहने से परिवार, विश्राम और शौक के लिए समय नहीं मिलता, जिससे तनाव बढ़ता है।
अन्य कारणों में कार्यस्थल पर सहयोग की कमी, अस्पष्ट अपेक्षाएँ, और कार्य का एकरस होना शामिल है।
बर्नआउट की रोकथाम के लिए सबसे पहले व्यक्ति को नियमित विश्राम लेना चाहिए। छोटे-छोटे ब्रेक मानसिक ऊर्जा बनाए रखते हैं। कार्य-जीवन संतुलन बनाना आवश्यक है—काम के घंटे सीमित करना, परिवार और स्वयं के लिए समय निकालना।
यथार्थवादी लक्ष्य निर्धारित करना, कार्यों का विभाजन (Delegation) और समय का उचित नियोजन भी मदद करता है।
ध्यान, योग, व्यायाम और गहरी साँस लेने जैसी तकनीकें मानसिक शांति प्रदान करती हैं।
अंत में, आवश्यकता पड़ने पर मित्रों, परिवार या परामर्शदाता से सहायता लेना अत्यंत लाभकारी होता है।
इस प्रकार, बर्नआउट को सही रणनीतियों और जीवनशैली में सुधार के माध्यम से रोका जा सकता है।
प्रश्न 8. समय नियोजन (Time Planning) क्या है? समय-नियोजन उपकरणों का महत्त्व समझाइए।
समय नियोजन वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा व्यक्ति अपने कार्यों को व्यवस्थित करता है, प्राथमिकताएँ तय करता है और समय का प्रभावी उपयोग करता है। इसमें लक्ष्य निर्धारण, कार्यों का विभाजन, समय-ब्लॉक बनाना और व्यवस्थित दिनचर्या तैयार करना शामिल है। समय का सही नियोजन व्यक्ति की उत्पादकता बढ़ाता है और तनाव को कम करता है।
समय-नियोजन उपकरण (Time Planning Tools) इस प्रक्रिया को आसान और प्रभावी बनाते हैं। सबसे सरल और उपयोगी उपकरण है टू-डू लिस्ट, जिसमें दिन भर के कार्य लिखे जाते हैं। इससे कार्य स्पष्ट रहते हैं और भूलने की संभावना कम होती है।
कैलेंडर और प्लैनर लंबे समय की योजना बनाने में सहायक होते हैं। इससे व्यक्ति मीटिंग, अंतिम तिथियाँ और महत्वपूर्ण कार्यक्रमों को समय पर पूरा कर सकता है।
डिजिटल ऐप और रिमाइंडर सिस्टम—जैसे Google Calendar, नोटिफिकेशन अलर्ट और टाइमर—कार्यप्रबंधन को आसान बनाते हैं। ये उपकरण समय पर चेतावनी देकर कार्यों को समय पर पूरा करने में मदद करते हैं।
एक महत्वपूर्ण उपकरण है Eisenhower Matrix, जिसमें कार्यों को “जरूरी”, “महत्वपूर्ण”, “कम जरूरी” और “कम महत्वपूर्ण” श्रेणियों में बाँटा जाता है। इससे व्यक्ति सबसे महत्वपूर्ण कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर पाता है।
Time Blocking तकनीक भी उपयोगी है, जिसमें प्रत्येक कार्य के लिए निश्चित समय निर्धारित किया जाता है। इससे ध्यान भटकता नहीं और कार्य तेज़ी से पूरा होता है।
इन सभी उपकरणों का उद्देश्य व्यक्ति को अनुशासित, संगठित और समय-संवेदनशील बनाना है।
समग्र रूप से, समय-नियोजन उपकरण कार्यक्षमता बढ़ाते हैं, तनाव घटाते हैं और सही दिशा में कार्य करने में सहायता करते हैं।
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प्रश्न 9. तनाव और समय प्रबंधन में जीवन शैली (Lifestyle) की भूमिका समझाइए।
जीवन शैली तनाव और समय प्रबंधन दोनों को गहराई से प्रभावित करती है। एक स्वस्थ जीवन शैली व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत बनाती है, जिससे वह चुनौतियों और दबाव का अधिक प्रभावी ढंग से सामना कर पाता है।
तनाव प्रबंधन में उचित नींद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पर्याप्त नींद लेने से शरीर और मन दोनों को आराम मिलता है, ध्यान केंद्रित रहता है और चिड़चिड़ापन कम होता है।
व्यायाम भी तनाव को कम करता है। नियमित व्यायाम से शरीर में एंडोर्फिन बढ़ता है, जिससे मन प्रसन्न रहता है और मानसिक ऊर्जा बढ़ती है।
संतुलित आहार शरीर को पोषण देता है और मानसिक स्थिरता बनाए रखता है। अत्यधिक जंक फूड, कैफीन या चीनी तनाव बढ़ा सकते हैं।
समय प्रबंधन में जीवन शैली का बड़ा योगदान है। एक संगठित दिनचर्या व्यक्ति को समय का सही उपयोग करना सिखाती है। रोज़मर्रा के कार्यों के लिए निश्चित समय निर्धारित करने से विलंब और अव्यवस्था कम होती है।
मानसिक आदतें—जैसे सकारात्मक सोच, कृतज्ञता, ध्यान और माइंडफुलनेस—भावनात्मक संतुलन बनाए रखती हैं। यह संतुलन समय-निर्णयों को बेहतर बनाता है।
परिवार और दोस्तों के साथ स्वस्थ संबंध भी तनाव कम करते हैं। सामाजिक समर्थन व्यक्ति को मानसिक राहत देता है और कठिन परिस्थितियों में सहारा बनता है।
अंत में, मनोरंजन, शौक, संगीत या यात्रा भी जीवन को संतुलित बनाते हैं।
इस प्रकार, जीवन शैली तनाव व समय प्रबंधन दोनों का आधार है। स्वस्थ आदतें व्यक्ति को अधिक उत्पादक, संतुलित और प्रसन्न बनाती हैं।
प्रश्न 10. प्रभावी तनाव और समय प्रबंधन की ओर कैसे बढ़ा जा सकता है?
प्रभावी तनाव और समय प्रबंधन की ओर बढ़ने के लिए सबसे पहले व्यक्ति को अपने तनाव के स्रोतों और समय बर्बाद करने वाली आदतों को पहचानना होता है। जागरूकता ही सुधार का पहला कदम है।
इसके बाद प्राथमिकता निर्धारण आवश्यक है। कौन-सा कार्य तत्काल करना है, कौन-सा बाद में, और कौन-सा टालना या सौंपना है—यह स्पष्ट होना चाहिए। Eisenhower Matrix इस प्रक्रिया में मदद करता है।
योजना बनाना बहुत महत्वपूर्ण है। दैनिक और साप्ताहिक योजनाएँ बनाने से कार्य व्यवस्थित रहते हैं। कैलेंडर, प्लैनर और डिजिटल ऐप्स समय प्रबंधन को आसान बनाते हैं।
Time Blocking तकनीक के माध्यम से प्रत्येक कार्य के लिए निश्चित समय निर्धारित किया जा सकता है। इससे ध्यान केंद्रित रहता है और कार्य समय पर पूरे होते हैं।
तनाव प्रबंधन में आराम और ब्रेक आवश्यक हैं। छोटे-छोटे ब्रेक मानसिक ताज़गी प्रदान करते हैं। ध्यान, गहरी साँसें और योग तनाव को शीघ्र कम करते हैं।
संतुलित जीवनशैली—जैसे पर्याप्त नींद, पौष्टिक भोजन, व्यायाम और नशे से दूरी—तनाव को नियंत्रित करती है और ऊर्जा बढ़ाती है।
साथ ही, सहयोग माँगना भी महत्वपूर्ण है। कठिन परिस्थितियों में परिवार, दोस्तों या परामर्शदाता से बात करने से तनाव कम होता है।
इस प्रकार, प्रभावी तनाव और समय प्रबंधन जागरूकता, योजना, अनुशासन, स्वस्थ आदतों और भावनात्मक संतुलन का परिणाम है।
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