IGNOU FREE BPAG-173 ई-शासन Solved Guess Paper 2025
प्रश्न 1: सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) की अवधारणा, अर्थ तथा इसके प्रमुख घटकों की विवेचना कीजिए।
सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (Information and Communication Technology – ICT) का अर्थ उन सभी तकनीकों से है जिनका उपयोग सूचना को एकत्र करने, संग्रहित करने, संसाधित करने, पुनः प्राप्त करने तथा एक स्थान से दूसरे स्थान तक संचारित करने के लिए किया जाता है। ICT में कंप्यूटर, इंटरनेट, मोबाइल फोन, सॉफ्टवेयर, उपग्रह संचार, नेटवर्क, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म आदि शामिल होते हैं। सूचना प्रौद्योगिकी (IT) मुख्य रूप से आंकड़ों के प्रसंस्करण से जुड़ी होती है, जबकि संचार प्रौद्योगिकी (CT) सूचना के आदान-प्रदान से संबंधित होती है। जब इन दोनों का संयोजन होता है, तब ICT का निर्माण होता है, जिसने प्रशासन, शासन, शिक्षा, व्यापार, स्वास्थ्य और सामाजिक जीवन को पूरी तरह बदल दिया है। ICT के प्रमुख घटकों में हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, नेटवर्क, डाटा और मानव संसाधन शामिल हैं। हार्डवेयर में कंप्यूटर, सर्वर, मोबाइल, राउटर और नेटवर्किंग उपकरण आते हैं। सॉफ्टवेयर में ऑपरेटिंग सिस्टम, एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर, डाटाबेस, ई-ऑफिस और मोबाइल ऐप शामिल होते हैं। नेटवर्क में इंटरनेट, ब्रॉडबैंड, मोबाइल नेटवर्क और सैटेलाइट संचार आते हैं। डाटा और सूचना प्रणाली के अंतर्गत डिजिटल रिकॉर्ड, क्लाउड स्टोरेज और डाटा एनालिटिक्स आते हैं। मानव संसाधन में प्रोग्रामर, सिस्टम विश्लेषक, प्रशासक तथा उपयोगकर्ता शामिल होते हैं। ICT ने शासन और प्रशासन को तेज, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाया है। डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन आवेदन, ई-रिकॉर्ड और ई-सेवाएँ ICT की ही देन हैं। हालांकि डिजिटल विभाजन, साइबर अपराध, डाटा गोपनीयता और डिजिटल अशिक्षा जैसी चुनौतियाँ भी मौजूद हैं, फिर भी आधुनिक ई-शासन की नींव ICT पर ही आधारित है।
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प्रश्न 2: ई-गवर्नेंस की परिभाषा दीजिए तथा इसके उद्देश्यों एवं महत्व की विवेचना कीजिए।
ई-गवर्नेंस से आशय सरकार द्वारा सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) के प्रयोग से प्रशासनिक कार्यों, सेवा वितरण तथा नागरिकों, व्यवसायों और अन्य सरकारी विभागों के साथ संवाद की प्रक्रिया को डिजिटल बनाना है। इसका उद्देश्य शासन को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी, कुशल और नागरिकोन्मुख बनाना है। ई-गवर्नेंस के चार प्रमुख स्वरूप माने जाते हैं—सरकार से नागरिक (G2C), सरकार से व्यवसाय (G2B), सरकार से सरकार (G2G) और सरकार से कर्मचारी (G2E)। ई-गवर्नेंस के प्रमुख उद्देश्य हैं—सेवा वितरण में तेजी लाना, पारदर्शिता बढ़ाना, भ्रष्टाचार कम करना, प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना, नागरिक सहभागिता को प्रोत्साहित करना तथा डिजिटल समावेशन सुनिश्चित करना। इसका महत्व अत्यंत व्यापक है क्योंकि इससे जनता को घर बैठे प्रमाण-पत्र, पासपोर्ट, पेंशन, छात्रवृत्ति, भूमि-रिकॉर्ड और शिकायत निवारण जैसी सेवाएँ मिलती हैं। पारदर्शिता इसलिए बढ़ती है क्योंकि योजनाओं, बजट और सरकारी कार्यों की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध होती है। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) से लाभार्थियों को पैसा सीधे खाते में मिलता है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होती है। भारत में डिजिटल इंडिया, आधार, डिजिलॉकर, UMANG और ऑनलाइन पोर्टलों ने शासन को आम नागरिक के बहुत निकट ला दिया है। हालाँकि ई-गवर्नेंस के समक्ष डिजिटल अशिक्षा, साइबर सुरक्षा और गोपनीयता जैसी चुनौतियाँ हैं, फिर भी यह आधुनिक लोकतंत्र की रीढ़ बन चुका है।
प्रश्न 3: भारत में ICT और ई-गवर्नेंस के लिए विधिक एवं नीतिगत ढाँचे की विवेचना कीजिए।
भारत में ICT और ई-गवर्नेंस के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक मजबूत विधिक एवं नीतिगत ढाँचा विकसित किया गया है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 भारत का प्रमुख साइबर कानून है, जो इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों, डिजिटल हस्ताक्षर, ऑनलाइन लेन-देन और ई-कॉन्ट्रैक्ट्स को कानूनी वैधता प्रदान करता है। इसी अधिनियम के तहत साइबर अपराध, हैकिंग, पहचान की चोरी, डाटा चोरी और साइबर आतंकवाद जैसे अपराधों को परिभाषित किया गया है। 2008 के संशोधन से साइबर सुरक्षा को और अधिक मजबूत किया गया। राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना (NeGP) 2006 में शुरू की गई, जिसके अंतर्गत नागरिक सेवाओं को डिजिटल रूप में उपलब्ध कराने के लिए मिशन मोड प्रोजेक्ट शुरू किए गए। 2015 में शुरू किया गया डिजिटल इंडिया कार्यक्रम ई-गवर्नेंस का सबसे व्यापक प्रयास है, जिसका उद्देश्य डिजिटल ढाँचा, सेवाओं की उपलब्धता और नागरिकों का डिजिटल सशक्तिकरण करना है। आधार अधिनियम, 2016 ने डिजिटल पहचान को कानूनी आधार प्रदान किया। सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 ने पारदर्शिता को मजबूत किया। साइबर सुरक्षा नीति और प्रस्तावित डिजिटल डाटा संरक्षण कानून नागरिकों की गोपनीयता और सुरक्षा को सुनिश्चित करते हैं। इस प्रकार भारत का विधिक-नीतिगत ढाँचा ई-गवर्नेंस को सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाता है।
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प्रश्न 4: प्रशासन में ICT की भूमिका की विवेचना कीजिए।
ICT ने पारंपरिक प्रशासन को आधुनिक, तेज और पारदर्शी प्रणाली में बदल दिया है। पहले प्रशासन कागजी फाइलों, मैनुअल रिकॉर्ड और धीमी प्रक्रियाओं पर आधारित था, लेकिन ICT ने ई-ऑफिस, डिजिटल फाइल, ऑनलाइन स्वीकृति और ई-रिकॉर्ड की व्यवस्था स्थापित कर दी है। ई-ऑफिस प्रणाली से फाइलों की गति बढ़ी है, निर्णय लेने में समय कम हुआ है और जवाबदेही बढ़ी है। भूमि रिकॉर्ड, जन्म-मृत्यु पंजीकरण, कर, पेंशन, संपत्ति और सेवाओं के डिजिटल डाटाबेस से रिकॉर्ड सुरक्षित और शीघ्र उपलब्ध हैं। वित्तीय प्रशासन में ऑनलाइन बजटिंग, ट्रेजरी प्रणाली, GST पोर्टल और डिजिटल भुगतान ने पारदर्शिता एवं अनुशासन को बढ़ाया है। नीति-निर्माण और निगरानी में डैशबोर्ड, GIS, रियल-टाइम डाटा और ऑनलाइन सर्वे से डाटा आधारित निर्णय संभव हुआ है। मानव संसाधन प्रबंधन में भर्ती, वेतन, प्रशिक्षण, बायोमेट्रिक उपस्थिति और प्रदर्शन मूल्यांकन ICT से संचालित हो रहे हैं। ई-शिकायत पोर्टल से नागरिक सीधे अपनी समस्याएँ दर्ज कर सकते हैं। यद्यपि साइबर खतरे, प्रशिक्षण की कमी और तकनीकी निर्भरता जैसी चुनौतियाँ हैं, फिर भी ICT प्रशासन की रीढ़ बन चुका है।
प्रश्न 5: प्रशासनिक संस्कृति में ICT आधारित सुधारों की भूमिका की विवेचना कीजिए।
प्रशासनिक संस्कृति से आशय उन मूल्यों, दृष्टिकोणों और कार्यशैली से है जिनके आधार पर सार्वजनिक प्रशासन कार्य करता है। परंपरागत भारतीय प्रशासन में गोपनीयता, लालफीताशाही, पदानुक्रम और नियम-प्रधानता प्रमुख थी, लेकिन ICT आधारित सुधारों ने इस संस्कृति में व्यापक परिवर्तन किया है। ई-ऑफिस और पेपरलेस प्रशासन ने देरी, फाइल दबाने और अनियमितताओं को कम किया है। वेबसाइटों और पोर्टलों पर योजनाओं, बजट और परियोजनाओं की जानकारी उपलब्ध होने से प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ी है। ICT ने प्रशासन को परिणाम-उन्मुख बनाया है, जहाँ प्रदर्शन डैशबोर्ड और निगरानी प्रणाली से अधिकारियों की जवाबदेही तय होती है। सेवा वितरण अब नागरिक-केंद्रित हो गया है, जहाँ समयबद्ध सेवाएँ ऑनलाइन उपलब्ध हैं। विभागों के बीच समन्वय डिजिटल नेटवर्क से मजबूत हुआ है। हालाँकि बदलाव के प्रति प्रतिरोध, डिजिटल कौशल की कमी और जवाबदेही का भय अभी भी चुनौतियाँ हैं, फिर भी ICT आधारित सुधारों ने भारतीय प्रशासनिक संस्कृति को गोपनीयता से पारदर्शिता और विलंब से गति की ओर अग्रसर किया है।
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प्रश्न 6: ग्रामीण विकास में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) की भूमिका की विवेचना कीजिए।
ग्रामीण विकास में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) की भूमिका अत्यंत परिवर्तनकारी रही है, क्योंकि इसने ग्रामीण क्षेत्रों को सूचना, सेवा, बाजार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं से सीधे जोड़ दिया है। पहले ग्रामीण क्षेत्र प्रशासनिक व्यवस्था से दूर, सूचनाओं के अभाव में और बिचौलियों पर निर्भर थे, लेकिन अब Common Service Centres (CSC) के माध्यम से गाँवों में ही आधार, पेंशन, प्रमाण-पत्र, राशन कार्ड, भूमि रिकॉर्ड, ऑनलाइन आवेदन और शिकायत निवारण जैसी सेवाएँ उपलब्ध हो गई हैं। इससे समय, धन और भ्रष्टाचार—तीनों में भारी कमी आई है। कृषि क्षेत्र में ICT ने किसानों को मौसम पूर्वानुमान, फसल बीमा, बाजार मूल्य, उन्नत बीज, कीटनाशक और सिंचाई तकनीकों की जानकारी मोबाइल ऐप, SMS और कॉल सेंटर के माध्यम से उपलब्ध कराई है, जिससे उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि हुई है। शिक्षा के क्षेत्र में ऑनलाइन कक्षाएँ, डिजिटल सामग्री, दूरस्थ शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण से ग्रामीण युवाओं को रोजगारोन्मुख शिक्षा मिलने लगी है। स्वास्थ्य सेवाओं में टेलीमेडिसिन, डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड और मोबाइल स्वास्थ्य ऐप के माध्यम से विशेषज्ञ परामर्श संभव हुआ है। ICT ने ग्रामीण वित्तीय समावेशन को भी मजबूत किया है; जन-धन खाते, मोबाइल बैंकिंग, UPI और DBT के माध्यम से ग्रामीण नागरिक सीधे सरकारी लाभ प्राप्त कर रहे हैं। हालाँकि इंटरनेट कनेक्टिविटी, बिजली, डिजिटल साक्षरता और भाषा जैसी समस्याएँ अब भी मौजूद हैं, फिर भी ICT ग्रामीण विकास का सबसे सशक्त माध्यम बन चुका है और भविष्य में यह ग्रामीण–शहरी अंतर को और कम करेगा।
प्रश्न 7: पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) को सशक्त बनाने में ICT की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।
पंचायती राज संस्थाएँ भारत में स्थानीय स्वशासन की आधारशिला हैं और ICT ने इन्हें अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। e-Panchayat प्रणाली के माध्यम से पंचायतों की योजना निर्माण, बजट प्रबंधन, लेखा-जोखा, परियोजना निगरानी और रिपोर्टिंग जैसी गतिविधियाँ अब डिजिटल हो चुकी हैं, जिससे कार्यों में तेजी और पारदर्शिता आई है। वित्तीय प्रबंधन में ऑनलाइन फंड ट्रांसफर, ई-भुगतान और डिजिटल ऑडिट से भ्रष्टाचार और धन के दुरुपयोग की संभावना कम हुई है। जन्म-मृत्यु पंजीकरण, कर निर्धारण, प्रमाण-पत्र, पेंशन और शिकायत निवारण जैसी सेवाएँ अब पंचायत स्तर पर ही ऑनलाइन उपलब्ध हैं। ICT ने ग्राम सभा की जानकारी, योजनाओं की स्थिति और बजट विवरण को डिजिटल बोर्ड, SMS और ऐप के माध्यम से नागरिकों तक पहुँचाने में मदद की है, जिससे जनभागीदारी बढ़ी है। पंचायत प्रतिनिधियों और कर्मचारियों को ऑनलाइन प्रशिक्षण, वेबिनार और डिजिटल गाइड के माध्यम से क्षमता निर्माण का अवसर मिला है। हालाँकि डिजिटल अशिक्षा, नेटवर्क समस्या, तकनीकी स्टाफ की कमी और साइबर सुरक्षा जैसी चुनौतियाँ अब भी हैं, फिर भी ICT ने पंचायती राज संस्थाओं को वास्तविक अर्थों में “स्वशासन” की दिशा में आगे बढ़ाया है।
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प्रश्न 8: ई-लर्निंग, शिक्षा और प्रशिक्षण में ICT की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
ICT ने शिक्षा और प्रशिक्षण की दुनिया में क्रांतिकारी परिवर्तन ला दिया है और ई-लर्निंग को एक सशक्त विकल्प के रूप में स्थापित किया है। ई-लर्निंग का अर्थ है इंटरनेट, कंप्यूटर, मोबाइल ऐप, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से शिक्षा प्राप्त करना। इससे दूर-दराज़ और वंचित क्षेत्रों के छात्र भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं। MOOCs, ऑनलाइन यूनिवर्सिटी, डिजिटल लाइब्रेरी और वर्चुअल क्लासरूम ने शिक्षा को सर्वसुलभ बना दिया है। ICT से सीखने की प्रक्रिया लचीली बनी है, जहाँ विद्यार्थी अपनी सुविधा और गति से अध्ययन कर सकता है। स्मार्ट क्लास, एनीमेशन, सिमुलेशन और वर्चुअल लैब से विषयों को समझना सरल हुआ है। शिक्षक प्रशिक्षण, प्रशासनिक प्रशिक्षण, स्वास्थ्य कर्मी प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रम भी ICT आधारित हो गए हैं। कोविड-19 महामारी के समय ICT ने शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह संभाला और ऑनलाइन कक्षाओं से पढ़ाई निरंतर जारी रही। हालाँकि डिजिटल डिवाइड, उपकरणों की कमी, इंटरनेट समस्या, स्क्रीन थकान और प्रत्यक्ष संवाद की कमी जैसी चुनौतियाँ मौजूद हैं, फिर भी ICT भविष्य की शिक्षा प्रणाली का मुख्य आधार बन चुका है।
प्रश्न 9: ई-कॉमर्स में ICT की भूमिका तथा इसके शासन और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव की विवेचना कीजिए।
ई-कॉमर्स अर्थात इंटरनेट के माध्यम से वस्तुओं और सेवाओं का क्रय-विक्रय, पूरी तरह ICT पर आधारित है। ICT ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, डिजिटल भुगतान, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन, ग्राहक सेवा और डाटा विश्लेषण को संभव बनाया है। उपभोक्ताओं को घर बैठे विभिन्न विकल्प, उचित कीमत, समय पर डिलीवरी और कैशलेस भुगतान की सुविधा मिली है। छोटे व्यापारी और स्टार्ट-अप भी अब बिना भारी पूंजी के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुँच बना सकते हैं। अर्थव्यवस्था पर ई-कॉमर्स का बड़ा प्रभाव पड़ा है—डिजिटल भुगतान बढ़े हैं, रोज़गार के नए क्षेत्र (लॉजिस्टिक्स, IT, कस्टमर सपोर्ट) बने हैं और कर संग्रह में पारदर्शिता आई है। शासन के दृष्टिकोण से ICT आधारित ई-कॉमर्स ने GST, ऑनलाइन टैक्स, उपभोक्ता संरक्षण, डिजिटल शिकायत मंच और व्यापार निगरानी को आसान बनाया है। हालाँकि साइबर धोखाधड़ी, डाटा गोपनीयता, बड़ी कंपनियों का एकाधिकार और पारंपरिक खुदरा व्यापार पर दबाव जैसी समस्याएँ भी उत्पन्न हुई हैं, फिर भी ई-कॉमर्स भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बन चुका है।
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प्रश्न 10: शासन में ICT के क्रियान्वयन से जुड़ी समस्याओं एवं चुनौतियों की विवेचना कीजिए।
शासन में ICT के व्यापक लाभों के बावजूद इसके क्रियान्वयन में अनेक गंभीर चुनौतियाँ सामने आती हैं। सबसे बड़ी समस्या डिजिटल डिवाइड है, जहाँ ग्रामीण, गरीब, बुजुर्ग और आदिवासी वर्ग इंटरनेट, स्मार्टफोन और डिजिटल कौशल से वंचित हैं। डिजिटल अशिक्षा के कारण अनेक नागरिक ई-सेवाओं का सही उपयोग नहीं कर पाते। बुनियादी ढाँचे की कमी—जैसे कमजोर नेटवर्क, बिजली की अनियमित आपूर्ति और पुराने हार्डवेयर—से ICT आधारित सेवाओं की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। साइबर सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है; हैकिंग, डाटा चोरी, साइबर धोखाधड़ी और रैनसमवेयर जैसे खतरे नागरिकों और सरकार दोनों के लिए गंभीर जोखिम पैदा करते हैं। डाटा गोपनीयता और निगरानी को लेकर भी चिंता बढ़ी है, क्योंकि बड़े पैमाने पर नागरिक डाटा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संग्रहित हो रहा है। सरकारी कर्मचारियों में परिवर्तन के प्रति प्रतिरोध, प्रशिक्षण की कमी और जवाबदेही का डर भी ICT को अपनाने में बाधा बनता है। विभागों के बीच समन्वय की कमी, सॉफ्टवेयर की असंगति और परियोजनाओं की पुनरावृत्ति से संसाधनों की बर्बादी होती है। इसलिए ICT के सफल क्रियान्वयन के लिए मजबूत साइबर कानून, डिजिटल समावेशन, प्रशिक्षित मानव संसाधन, विश्वसनीय अवसंरचना और प्रभावी बदलाव प्रबंधन आवश्यक है।
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