IGNOU FREE BHDG-173 समाचार पत्र और फीचर लेखन Solved Guess Paper With Imp Questions 2025

IGNOU FREE BHDG-173 समाचार पत्र और फीचर लेखन Solved Guess Paper 2025

प्रश्न 1: समाचार पत्र क्या है? इसके उद्देश्य, विशेषताएँ और सामाजिक भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डालिए।

समाचार पत्र आधुनिक समाज का एक अत्यंत महत्वपूर्ण माध्यम है, जो जनता तक देश-विदेश की घटनाओं, विचारों, समस्याओं और सूचनाओं को पहुँचाता है। समाचार पत्र उस मुद्रित माध्यम को कहा जाता है जिसमें प्रतिदिन या निश्चित अवधि पर सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और खेल संबंधी समाचार प्रकाशित किए जाते हैं। समाचार पत्र केवल सूचना देने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह जनमत का निर्माण करने वाला एक प्रभावशाली साधन भी है। इसका मुख्य उद्देश्य जनता को जागरूक बनाना, समाज को सही दिशा देना और लोकतंत्र को मजबूत करना होता है। समाचार पत्र का पहला उद्देश्य सूचना देना है, ताकि आम नागरिक देश और दुनिया की घटनाओं से अवगत रह सके। दूसरा उद्देश्य शिक्षा और मार्गदर्शन देना है, जिससे पाठकों की सोच विकसित हो। तीसरा उद्देश्य मनोरंजन देना भी है, क्योंकि इसमें फीचर, लेख, कार्टून, कहानी, कविता जैसे रचनात्मक स्तंभ भी होते हैं। समाचार पत्र की सबसे बड़ी विशेषता इसकी विश्वसनीयता मानी जाती है, क्योंकि इसमें प्रकाशित समाचार तथ्यों पर आधारित होते हैं। इसकी दूसरी विशेषता निरंतरता है, क्योंकि यह रोज़ प्रकाशित होता है और समाज की नब्ज पर नजर रखता है। तीसरी विशेषता इसकी विविधता है, जिसमें राजनीति, शिक्षा, विज्ञान, खेल, मनोरंजन, व्यापार, कृषि, स्वास्थ्य — सभी विषय शामिल होते हैं। सामाजिक भूमिका की दृष्टि से समाचार पत्र लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है। यह सरकार और जनता के बीच सेतु का काम करता है। यह नीतियों की आलोचना करता है, भ्रष्टाचार को उजागर करता है और जनसमस्याओं को सामने लाता है। इससे जनता को अपने अधिकारों और कर्तव्यों की जानकारी मिलती है। स्वतंत्रता आंदोलन के समय भी समाचार पत्रों ने जनचेतना फैलाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी। आज के समय में भी समाचार पत्र सामाजिक बुराइयों जैसे भ्रष्टाचार, दहेज, शोषण, अशिक्षा और असमानता के खिलाफ आवाज उठाता है। इस प्रकार कहा जा सकता है कि समाचार पत्र केवल कागज पर छपी खबरों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह समाज को दिशा देने वाली एक जीवंत शक्ति है।

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प्रश्न 2: फीचर लेखन क्या है? फीचर और समाचार में अंतर स्पष्ट कीजिए।

फीचर लेखन पत्रकारिता की वह विधा है जिसमें किसी विषय को रोचक, विश्लेषणात्मक और मानवीय दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया जाता है। फीचर केवल सूचना नहीं देता, बल्कि उसमें भावनाएँ, अनुभव, सामाजिक संदर्भ और साहित्यिकता भी होती है। फीचर किसी घटना के पीछे की कहानी, प्रभाव और मानवीय पक्ष को उजागर करता है। उदाहरण के रूप में किसी बाढ़ की खबर समाचार हो सकती है, लेकिन उसी बाढ़ में पीड़ित परिवारों की पीड़ा, संघर्ष और जीवन की कहानी फीचर बनती है। फीचर लेखन का उद्देश्य पाठक को केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि उसे भावनात्मक रूप से जोड़ना भी होता है। फीचर और समाचार में कई महत्वपूर्ण अंतर होते हैं। समाचार जहाँ तथ्य-प्रधान और त्वरित होता है, वहीं फीचर विषय-प्रधान और विश्लेषणात्मक होता है। समाचार में केवल “क्या हुआ, कहाँ हुआ, कब हुआ” पर जोर होता है, जबकि फीचर में “क्यों हुआ, कैसे हुआ, इसका क्या प्रभाव पड़ा” पर विस्तार होता है। समाचार की भाषा सरल, सीधी और औपचारिक होती है, जबकि फीचर की भाषा साहित्यिक, भावात्मक और रोचक होती है। समाचार का आकार सीमित होता है, जबकि फीचर अपेक्षाकृत लंबा और विस्तारपूर्ण होता है। समाचार में लेखक की भावनाएँ नहीं होतीं, जबकि फीचर में लेखक का दृष्टिकोण और संवेदना झलकती है। फीचर सामाजिक मुद्दों, व्यक्तित्व, संस्कृति, प्रकृति, स्वास्थ्य और मानवीय संघर्षों को गहराई से प्रस्तुत करता है। इस प्रकार कहा जा सकता है कि समाचार सूचना का साधन है और फीचर संवेदना का माध्यम। दोनों का अपना-अपना महत्व है और दोनों मिलकर ही पत्रकारिता को पूर्ण बनाते हैं।

प्रश्न 3: विभिन्न क्षेत्रों पर फीचर लेखन की आवश्यकता और महत्व स्पष्ट कीजिए।

फीचर लेखन केवल सामान्य विषयों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन के हर क्षेत्र को समेटे हुए है। शिक्षा, स्वास्थ्य, विज्ञान, कृषि, पर्यावरण, खेल, महिला सशक्तिकरण, बाल अधिकार, रोजगार और तकनीक जैसे अनेक क्षेत्रों में फीचर लेखन की अत्यंत आवश्यकता है। शिक्षा पर आधारित फीचर समाज को यह बताता है कि शिक्षा का स्तर क्या है, छात्र किन समस्याओं से जूझ रहे हैं, ग्रामीण शिक्षा की स्थिति कैसी है। स्वास्थ्य फीचर जनसंख्या को बीमारियों, उनके कारणों और रोकथाम के तरीकों की जानकारी देता है। पर्यावरण फीचर प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों की स्थिति पर समाज को सचेत करता है। कृषि फीचर किसानों की समस्याओं, फसल, मौसम और बाजार की जानकारी देता है। महिला और बाल विषयों पर फीचर समाज में जागरूकता फैलाते हैं। खेल फीचर खिलाड़ियों के संघर्ष और सफलता को उजागर करते हैं। तकनीकी फीचर नई खोजों और डिजिटल बदलावों से लोगों को जोड़ते हैं। इन सभी क्षेत्रों में फीचर लेखन का सबसे बड़ा महत्व यह है कि यह समाज को सोचने पर मजबूर करता है। यह जनता की आँख खोलता है और बदलाव की प्रेरणा देता है। फीचर लेखन समाज का दर्पण भी है और समाज का मार्गदर्शक भी। इसलिए विभिन्न क्षेत्रों में फीचर लेखन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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प्रश्न 4: विशिष्ट वर्गों के लिए लेखन का अर्थ स्पष्ट कीजिए तथा इसके उद्देश्य बताइए।

विशिष्ट वर्गों के लिए लेखन का अर्थ है ऐसे लेख लिखना जो किसी विशेष समूह की जरूरतों, रुचियों और समस्याओं को ध्यान में रखकर तैयार किए जाएँ। यह वर्ग बच्चे, महिलाएँ, किसान, मजदूर, विद्यार्थी, बुजुर्ग, उद्यमी या किसी विशेष पेशे से जुड़े लोग हो सकते हैं। इस प्रकार के लेखन का उद्देश्य उस वर्ग को उनकी भाषा, उनके स्तर और उनकी आवश्यकताओं के अनुसार जानकारी देना होता है। उदाहरण के रूप में बच्चों के लिए लेखन सरल, रोचक और शिक्षाप्रद होता है। महिलाओं के लिए लेखन स्वास्थ्य, अधिकार, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता पर आधारित होता है। किसानों के लिए लेखन खेती, मौसम, बीज, खाद, बाजार और सरकारी योजनाओं पर केंद्रित होता है। मजदूरों के लिए लेखन उनके अधिकारों, मजदूरी, सुरक्षा और कानून से जुड़ा होता है। विशिष्ट वर्गों के लिए लेखन का मुख्य उद्देश्य जागरूकता फैलाना, जानकारी देना, अधिकारों की समझ पैदा करना और आत्मविश्वास बढ़ाना होता है। यह लेखन समाज के कमजोर वर्ग को मजबूत बनाता है और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ता है। इस प्रकार विशिष्ट वर्गों के लिए लेखन सामाजिक न्याय और समानता का एक सशक्त माध्यम है।

प्रश्न 5: साहित्य लेखन, साक्षात्कार और व्यक्ति-चित्र का पत्रकारिता में महत्व स्पष्ट कीजिए।

पत्रकारिता केवल समाचारों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें साहित्य लेखन, साक्षात्कार और व्यक्ति-चित्र का विशेष स्थान है। साहित्य लेखन पत्रकारिता को संवेदनशीलता, गहराई और मानवीय दृष्टिकोण प्रदान करता है। इससे पाठक भावनात्मक रूप से जुड़ता है और समाज की सच्चाई को महसूस करता है। साक्षात्कार पत्रकारिता की वह विधा है जिसमें किसी व्यक्ति से प्रश्न-उत्तर के माध्यम से उसकी सोच, अनुभव, संघर्ष और उपलब्धियों को सामने लाया जाता है। साक्षात्कार से समाज को प्रेरक व्यक्तित्वों से सीखने को मिलता है। व्यक्ति-चित्र किसी महान या सामान्य व्यक्ति के पूरे जीवन, विचार, संघर्ष और योगदान का चित्रण होता है। यह पाठकों को प्रेरणा देता है और इतिहास को जीवंत बनाता है। साहित्य लेखन समाज को गहराई से समझने में मदद करता है, साक्षात्कार सच्चाई को सीधे स्रोत से सामने लाता है और व्यक्ति-चित्र जीवन के आदर्श प्रस्तुत करता है। इस प्रकार ये तीनों विधाएँ पत्रकारिता को केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाला सशक्त मंच बनाती हैं।

प्रश्न 6: समाचार लेखन की प्रमुख विशेषताओं पर विस्तार से प्रकाश डालिए।

समाचार लेखन पत्रकारिता की मूल आत्मा माना जाता है। किसी भी समाचार को प्रभावशाली, स्पष्ट और विश्वसनीय बनाने के लिए उसमें कुछ प्रमुख विशेषताओं का होना अनिवार्य है। सबसे पहली और सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है तथ्यात्मकता (Fact-based writing)। समाचार केवल वही होना चाहिए जो सत्य, प्रमाणित और वास्तविक हो। किसी भी प्रकार की अफवाह, कल्पना या निजी मत समाचार में नहीं होना चाहिए। दूसरी महत्वपूर्ण विशेषता है निष्पक्षता (Objectivity)। समाचार लिखते समय लेखक को अपने निजी विचार, भावना और पक्षपात को अलग रखना चाहिए। समाचार में न तो किसी का पक्ष लिया जाता है और न ही किसी के विरुद्ध पूर्वाग्रह दिखाया जाता है। तीसरी विशेषता है स्पष्टता (Clarity)। समाचार की भाषा सरल, सीधी और आम पाठक की समझ में आने वाली होनी चाहिए। कठिन शब्दों और उलझे वाक्यों से समाचार की प्रभावशीलता कम हो जाती है। चौथी विशेषता है संक्षिप्तता (Brevity)। समाचार को कम से कम शब्दों में अधिक से अधिक जानकारी देनी चाहिए। अनावश्यक विवरण और घुमावदार कथन से बचना चाहिए। पाँचवीं विशेषता है समयबद्धता (Timeliness)। समाचार वही उपयोगी होता है जो समय पर प्रकाशित हो। पुराना समाचार अपना महत्व खो देता है। छठी विशेषता है संतुलन (Balance), अर्थात किसी भी विवादित विषय पर दोनों पक्षों की बात को स्थान देना। सातवीं विशेषता है विश्वसनीय स्रोत (Reliable Source)। समाचार का स्रोत प्रमाणिक होना चाहिए, ताकि पाठक को उस पर भरोसा हो। इसके अतिरिक्त समाचार की भाषा प्रभावशाली लेकिन मर्यादित होनी चाहिए। अतिशयोक्ति, भावुकता और सनसनी से बचना चाहिए। इस प्रकार जब समाचार में ये सभी विशेषताएँ होती हैं, तब वह समाज को सही दिशा देने वाला एक मजबूत माध्यम बनता है और लोकतंत्र को सुदृढ़ करता है।

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प्रश्न 7: फीचर लेखन की संरचना (Structure) समझाइए।

फीचर लेखन केवल विषय की जानकारी देना नहीं होता, बल्कि उसे रोचक, प्रभावशाली और संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत करना होता है। इसलिए फीचर की एक निश्चित संरचना (Structure) होती है, जिसके आधार पर ही एक अच्छा फीचर लिखा जाता है। फीचर की संरचना का पहला भाग होता है शीर्षक (Title)। शीर्षक आकर्षक, सारगर्भित और उत्सुकता पैदा करने वाला होना चाहिए ताकि पाठक उसे पढ़ने के लिए प्रेरित हो। दूसरा भाग होता है भूमिका या आरंभ (Introduction)। इसी भाग से पाठक तय करता है कि वह फीचर आगे पढ़ेगा या नहीं। भूमिका रोचक, भावनात्मक या विचारोत्तेजक होनी चाहिए। तीसरा भाग होता है मूल विषय-वस्तु (Body), जो फीचर का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इसमें विषय से जुड़े सभी तथ्य, घटनाएँ, अनुभव, उदाहरण, आँकड़े और मानवीय पहलू विस्तार से प्रस्तुत किए जाते हैं। यही भाग फीचर को गहराई और प्रभाव देता है। चौथा भाग होता है विश्लेषण (Analysis), जिसमें लेखक उस विषय के कारण, परिणाम और सामाजिक प्रभावों की चर्चा करता है। पाँचवाँ और अंतिम भाग होता है निष्कर्ष (Conclusion), जिसमें पूरे फीचर का सार प्रस्तुत किया जाता है और भविष्य की दिशा या समाधान की ओर संकेत किया जाता है। फीचर की भाषा सरल, भावात्मक और चित्रात्मक होती है। उसमें साहित्यिकता भी होती है, जिससे पाठक भावनात्मक रूप से जुड़ता है। इस प्रकार एक अच्छा फीचर शीर्षक, भूमिका, मुख्य भाग, विश्लेषण और निष्कर्ष — इन सभी हिस्सों से मिलकर बनता है और तभी वह पाठक पर गहरा प्रभाव डालता है।

प्रश्न 8: विशिष्ट विषयों पर फीचर लेखन में लेखक की भूमिका स्पष्ट कीजिए।

विशिष्ट विषयों पर फीचर लेखन में लेखक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि वही विषय को दिशा, गहराई और प्रभाव प्रदान करता है। जब लेखक किसी विशेष विषय जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा, विज्ञान, पर्यावरण, कृषि, महिला सशक्तिकरण या सामाजिक समस्या पर फीचर लिखता है, तो उसे उस विषय की पूरी जानकारी होना आवश्यक है। लेखक की पहली भूमिका होती है गहन शोध (Research) करना। बिना शोध के लिखा गया फीचर केवल सामान्य लेख बनकर रह जाता है। दूसरी भूमिका है विषय की सही समझ (Understanding of Subject)। लेखक को यह जानना चाहिए कि वह किस समस्या, क्षेत्र या वर्ग पर लिख रहा है और उसका समाज पर क्या प्रभाव पड़ता है। तीसरी भूमिका है निष्पक्ष प्रस्तुति (Fair Presentation)। लेखक को अपने निजी विचार थोपने के बजाय विषय को संतुलित और ईमानदारी से प्रस्तुत करना चाहिए। चौथी भूमिका होती है मानवीय दृष्टिकोण (Human Approach)। फीचर में केवल आँकड़े नहीं, बल्कि इंसान की पीड़ा, संघर्ष और भावनाएँ भी होनी चाहिए। पाँचवीं भूमिका है समाज को जागरूक करना (Social Awareness)। लेखक का उद्देश्य केवल लिखना नहीं, बल्कि समाज को सोचने पर मजबूर करना भी होता है। एक अच्छा फीचर समाज में बदलाव की चिंगारी बन सकता है। इस प्रकार विशिष्ट विषयों पर फीचर लेखन में लेखक केवल लेखक नहीं, बल्कि एक संवेदनशील समाज सुधारक की भूमिका निभाता है।

प्रश्न 9: साक्षात्कार लेखन की विशेषताएँ और महत्व स्पष्ट कीजिए।

साक्षात्कार लेखन पत्रकारिता की एक अत्यंत प्रभावशाली विधा है, जिसमें किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति से प्रश्न-उत्तर के माध्यम से उसके विचार, अनुभव, संघर्ष और उपलब्धियों को पाठकों तक पहुँचाया जाता है। साक्षात्कार की सबसे पहली विशेषता है प्रत्यक्षता (Directness)। इसमें पाठक को व्यक्ति के विचार सीधे उसी की भाषा में पढ़ने को मिलते हैं। दूसरी विशेषता है विश्वसनीयता (Authenticity), क्योंकि जानकारी सीधे स्रोत से प्राप्त होती है। तीसरी विशेषता है संवादात्मक शैली (Dialogue Style), जो इसे रोचक बनाती है। चौथी विशेषता है व्यक्तित्व का उद्घाटन (Revelation of Personality), क्योंकि साक्षात्कार में व्यक्ति का सोचने का तरीका, दृष्टिकोण और स्वभाव सामने आता है। साक्षात्कार का बहुत बड़ा सामाजिक महत्व भी है। इससे समाज को प्रेरणादायक व्यक्तित्वों के विचारों से सीखने का अवसर मिलता है। राजनेताओं के साक्षात्कार से उनकी नीतियों की जानकारी मिलती है, कलाकारों के साक्षात्कार से कला की दुनिया की सच्चाई सामने आती है, समाजसेवियों के साक्षात्कार से जनकल्याण की सोच फैलती है। साक्षात्कार लोकतंत्र को भी मजबूत करता है क्योंकि इससे जनता को सवाल पूछने का मंच मिलता है। इस प्रकार साक्षात्कार लेखन केवल एक विधा नहीं, बल्कि समाज को जागरूक और प्रेरित करने का एक शक्तिशाली माध्यम है।

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प्रश्न 10: व्यक्ति-चित्र (Profile Writing) का अर्थ, विशेषताएँ और महत्व स्पष्ट कीजिए।

व्यक्ति-चित्र पत्रकारिता की वह विधा है जिसमें किसी व्यक्ति के जीवन, व्यक्तित्व, विचार, संघर्ष, कार्य और उपलब्धियों का सजीव चित्रण किया जाता है। इसमें केवल बाहरी जानकारी नहीं दी जाती, बल्कि व्यक्ति के अंदरूनी गुण, उसकी सोच, उसके सपने और उसके सामाजिक योगदान को भी प्रस्तुत किया जाता है। व्यक्ति-चित्र की पहली विशेषता है जीवन का समग्र चित्रण, जिसमें जन्म से लेकर उपलब्धियों तक का विवरण होता है। दूसरी विशेषता है मानवीय पक्ष की प्रस्तुति, जिससे पाठक उस व्यक्ति से भावनात्मक रूप से जुड़ जाता है। तीसरी विशेषता है प्रेरणादायक तत्व, क्योंकि व्यक्ति-चित्र पाठकों को प्रेरणा देता है। चौथी विशेषता है तथ्य और संवेदना का संतुलन, जिसमें सच्चाई भी होती है और भावना भी। व्यक्ति-चित्र का सामाजिक महत्व अत्यंत अधिक है क्योंकि इससे समाज को आदर्श व्यक्तित्वों से सीखने को मिलता है। यह युवाओं को लक्ष्य देता है, उन्हें संघर्ष और सफलता की सही समझ देता है। स्वतंत्रता सेनानियों, कलाकारों, वैज्ञानिकों, समाजसेवियों और आम संघर्षशील लोगों के व्यक्ति-चित्र समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बनते हैं। इस प्रकार व्यक्ति-चित्र केवल किसी व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि समाज के लिए एक जीवंत संदेश होता है।

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