IGNOU FREE BPAG-174 सतत विकास Solved Guess Paper 2025
प्रश्न 1: सतत विकास (Sustainable Development) की अवधारणा और अर्थ की विवेचना कीजिए।
सतत विकास वह विकास प्रक्रिया है, जो वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को इस प्रकार पूरा करती है कि भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं से कोई समझौता न हो। इस अवधारणा को सर्वप्रथम व्यापक रूप से 1987 में ब्रंटलैंड आयोग (Brundtland Commission) की रिपोर्ट Our Common Future में प्रस्तुत किया गया था। सतत विकास का मूल उद्देश्य आर्थिक प्रगति, सामाजिक न्याय तथा पर्यावरण संरक्षण—तीनों के बीच संतुलन स्थापित करना है। पारंपरिक विकास मॉडल केवल औद्योगीकरण, उत्पादन वृद्धि और आय बढ़ाने पर केंद्रित था, जिसके कारण प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन, प्रदूषण, जैव विविधता का ह्रास, जलवायु परिवर्तन और सामाजिक असमानता जैसे गंभीर संकट उत्पन्न हो गए। इसी पृष्ठभूमि में सतत विकास की आवश्यकता महसूस की गई। सतत विकास की अवधारणा तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित है—आर्थिक सततता, सामाजिक सततता और पर्यावरणीय सततता। आर्थिक सततता का अर्थ है ऐसा विकास, जो दीर्घकालिक हो, रोजगार सृजन करे और सभी वर्गों को लाभ पहुँचाए। सामाजिक सततता का अर्थ है गरीबी उन्मूलन, समानता, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय की स्थापना। पर्यावरणीय सततता का तात्पर्य है प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण, वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता की रक्षा। सतत विकास अंतर-पीढ़ी समानता (Inter-generational Equity) पर भी बल देता है, अर्थात आज की पीढ़ी संसाधनों का इस प्रकार उपयोग करे कि भविष्य की पीढ़ियाँ उनसे वंचित न हों। साथ ही यह अंतः-पीढ़ी समानता (Intra-generational Equity) की भी बात करता है, अर्थात वर्तमान पीढ़ी के भीतर भी विकास का लाभ सभी को समान रूप से मिले। 1992 के रियो पृथ्वी शिखर सम्मेलन के बाद सतत विकास को वैश्विक मान्यता मिली और 2015 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा 17 सतत विकास लक्ष्य (SDGs) अपनाए गए। इस प्रकार सतत विकास केवल पर्यावरणीय अवधारणा नहीं, बल्कि एक समग्र मानवीय विकास दर्शन है।
Buy IGNOU Solved Guess Paper With Important Questions :-
CONTACT/WHATSAPP – 88822 85078
प्रश्न 2: विकास, सततता और जलवायु परिवर्तन के बीच संबंध की विवेचना कीजिए।
विकास, सततता और जलवायु परिवर्तन के बीच गहरा और जटिल संबंध है। परंपरागत विकास मॉडल उद्योगीकरण, ऊर्जा उत्पादन, परिवहन, शहरीकरण और कृषि के विस्तार पर आधारित रहा है, जिसमें जीवाश्म ईंधनों के अत्यधिक उपयोग के कारण ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन बढ़ा और वैश्विक तापमान में वृद्धि हुई। यही जलवायु परिवर्तन का मुख्य कारण बना। जलवायु परिवर्तन आज सतत विकास के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है, क्योंकि बढ़ते तापमान, बाढ़, सूखा, चक्रवात, समुद्र स्तर वृद्धि और चरम मौसम घटनाओं से कृषि, जल संसाधन, स्वास्थ्य, आवास और आजीविका पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। इसका सबसे अधिक दुष्प्रभाव गरीब और कमजोर वर्गों पर पड़ता है, जिससे गरीबी, असमानता और असुरक्षा बढ़ती है। सततता इस संकट का समाधान प्रस्तुत करती है। सतत विकास जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए शमन (Mitigation) और अनुकूलन (Adaptation)—दोनों पर बल देता है। शमन का अर्थ है ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करना, जिसके लिए नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, हरित परिवहन और स्वच्छ तकनीक अपनाई जाती है। अनुकूलन का अर्थ है जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के अनुरूप स्वयं को ढालना, जैसे जल संरक्षण, सूखा-रोधी खेती, आपदा प्रबंधन और जलवायु-सहनीय अवसंरचना। सतत विकास जलवायु-सहनीय विकास (Climate-Resilient Development) को बढ़ावा देता है, जिसमें विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों साथ-साथ चलते हैं। वैश्विक स्तर पर UNFCCC, क्योटो प्रोटोकॉल और पेरिस समझौता जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयास हैं। SDG-13 विशेष रूप से जलवायु कार्रवाई पर केंद्रित है। इस प्रकार स्पष्ट है कि असतत विकास जलवायु परिवर्तन को बढ़ाता है, जलवायु परिवर्तन विकास को नष्ट करता है और सततता दोनों के बीच संतुलन स्थापित करती है।
प्रश्न 3: सतत विकास में स्वास्थ्य (Health) की भूमिका की विवेचना कीजिए।
स्वास्थ्य सतत विकास का एक मूलभूत आधार है, क्योंकि एक स्वस्थ समाज ही दीर्घकालिक आर्थिक विकास, सामाजिक स्थिरता और मानवीय कल्याण को सुनिश्चित कर सकता है। बीमार, कुपोषित और अस्वस्थ जनसंख्या न तो उत्पादक हो सकती है और न ही गुणवत्तापूर्ण जीवन जी सकती है। स्वास्थ्य और पर्यावरण के बीच घनिष्ठ संबंध है। प्रदूषित जल, दूषित वायु, गंदगी, अनुचित अपशिष्ट प्रबंधन, रासायनिक पदार्थों का उपयोग और जलवायु परिवर्तन मानव स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डालते हैं। इसके कारण श्वसन रोग, जलजनित रोग, कुपोषण, हीट स्ट्रेस और संक्रामक बीमारियाँ बढ़ रही हैं। सतत विकास स्वच्छ जल, स्वच्छ वातावरण, सुरक्षित भोजन और स्वच्छता पर बल देकर स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करता है। स्वास्थ्य गरीबी और असमानता से भी जुड़ा है। गरीब वर्गों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ, पोषण और स्वच्छता सुविधाएँ आसानी से उपलब्ध नहीं होतीं। सतत विकास का उद्देश्य सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज सुनिश्चित करना है, ताकि सभी को सस्ती और सुलभ चिकित्सा सेवाएँ मिल सकें। कोविड-19 महामारी ने यह स्पष्ट कर दिया कि कमजोर स्वास्थ्य प्रणाली पूरे समाज, अर्थव्यवस्था और शिक्षा व्यवस्था को पंगु बना सकती है। इसलिए सतत विकास के अंतर्गत मजबूत सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना, रोग निगरानी, डिजिटल स्वास्थ्य और आपदा तैयारी को अत्यंत आवश्यक माना गया है। वैश्विक स्तर पर SDG-3 “सभी के लिए स्वस्थ जीवन” पर केंद्रित है। भारत में आयुष्मान भारत, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, टीकाकरण अभियान और पोषण योजनाएँ सतत विकास के स्वास्थ्य आयाम को मजबूत करती हैं। इस प्रकार स्वास्थ्य न केवल सतत विकास का परिणाम है, बल्कि उसका प्रमुख आधार भी है।
Buy IGNOU Solved Guess Paper With Important Questions :-
CONTACT/WHATSAPP – 88822 85078
प्रश्न 4: सतत विकास की प्राप्ति में शिक्षा (Education) का महत्व स्पष्ट कीजिए।
शिक्षा सतत विकास की रीढ़ मानी जाती है, क्योंकि यह व्यक्ति को ज्ञान, कौशल, मूल्य और चेतना प्रदान करती है, जो उसे जिम्मेदार नागरिक, कुशल श्रमिक और पर्यावरण-संवेदनशील मानव बनाती है। आर्थिक दृष्टि से शिक्षा मानव पूंजी का निर्माण करती है, जिससे उत्पादकता बढ़ती है, रोजगार के अवसर पैदा होते हैं और आय में वृद्धि होती है। बिना शिक्षा के कोई भी समाज टिकाऊ आर्थिक विकास नहीं कर सकता। सामाजिक दृष्टि से शिक्षा लैंगिक समानता, सामाजिक न्याय, स्वास्थ्य जागरूकता और लोकतांत्रिक सहभागिता को बढ़ावा देती है। शिक्षित व्यक्ति अपने अधिकारों और कर्तव्यों को समझता है तथा समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में योगदान देता है। पर्यावरणीय दृष्टि से शिक्षा लोगों में जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा, जल संरक्षण और सतत उपभोग के प्रति जागरूकता पैदा करती है। SDG-4 सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण और समावेशी शिक्षा पर केंद्रित है। भारत में समग्र शिक्षा अभियान, डिजिटल शिक्षा, कौशल भारत मिशन और नई शिक्षा नीति 2020 सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप शिक्षा प्रणाली को मजबूत कर रहे हैं। इस प्रकार शिक्षा आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय—तीनों ही आयामों में सतत विकास की आधारशिला है।
प्रश्न 5: सतत विकास के लिए खाद्य सुरक्षा (Food Security) के महत्व की विवेचना कीजिए।
खाद्य सुरक्षा सतत विकास का एक अनिवार्य घटक है, क्योंकि भोजन मानव जीवन, स्वास्थ्य, उत्पादकता और सामाजिक स्थिरता का मूल आधार है। खाद्य सुरक्षा का अर्थ है कि सभी लोगों को हर समय पर्याप्त, सुरक्षित और पोषक भोजन सुलभ हो। खाद्य सुरक्षा के चार प्रमुख आयाम होते हैं—उपलब्धता, पहुँच, पोषण उपयोग और आपूर्ति की स्थिरता। सामाजिक दृष्टि से कुपोषण और भूख बच्चों के शारीरिक-मानसिक विकास को प्रभावित करते हैं और गरीबी के दुष्चक्र को और गहरा करते हैं। आर्थिक दृष्टि से एक कुपोषित जनसंख्या देश की उत्पादकता और विकास को गंभीर रूप से बाधित करती है। पर्यावरणीय दृष्टि से असतत कृषि पद्धतियाँ मिट्टी की उर्वरता घटाती हैं, जल संसाधन नष्ट करती हैं और जैव विविधता को नुकसान पहुँचाती हैं। जलवायु परिवर्तन से सूखा, बाढ़ और तापमान वृद्धि खाद्य उत्पादन को अस्थिर बना रही है। सतत कृषि, जैविक खेती, फसल विविधीकरण और जल संरक्षण ही दीर्घकालिक खाद्य सुरक्षा का समाधान हैं। SDG-2 का लक्ष्य “भूख मुक्त विश्व” बनाना है। भारत में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, मध्याह्न भोजन योजना और ICDS कार्यक्रम खाद्य सुरक्षा को स्वास्थ्य और शिक्षा से जोड़ते हैं। इस प्रकार खाद्य सुरक्षा मानव अस्तित्व, सामाजिक स्थिरता और सतत विकास की मूल आधारशिला है।
प्रश्न 6: सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की अवधारणा तथा वैश्विक विकास में उनके महत्व की विवेचना कीजिए।
सतत विकास लक्ष्य (Sustainable Development Goals – SDGs) संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2015 में 2030 एजेंडा के अंतर्गत अपनाए गए 17 वैश्विक लक्ष्य हैं, जिनका उद्देश्य वर्ष 2030 तक गरीबी का उन्मूलन, पृथ्वी का संरक्षण और सभी के लिए शांति व समृद्धि सुनिश्चित करना है। ये लक्ष्य पहले के सहस्राब्दी विकास लक्ष्यों (MDGs) का विस्तार हैं, लेकिन उनसे कहीं अधिक व्यापक, समावेशी और सार्वभौमिक हैं। SDGs में गरीबी उन्मूलन, भुखमरी समाप्ति, स्वास्थ्य, शिक्षा, लैंगिक समानता, स्वच्छ जल, स्वच्छ ऊर्जा, रोजगार, नवाचार, औद्योगीकरण, असमानता में कमी, सतत शहर, जिम्मेदार उपभोग, जलवायु कार्रवाई, महासागर व स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण तथा वैश्विक साझेदारी जैसे विषय शामिल हैं। SDGs का सबसे बड़ा महत्व यह है कि यह विकास को केवल आर्थिक वृद्धि तक सीमित नहीं रखते, बल्कि सामाजिक न्याय और पर्यावरण संरक्षण को समान महत्व देते हैं। इन लक्ष्यों की सार्वभौमिकता यह स्पष्ट करती है कि सतत विकास केवल विकासशील देशों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि विकसित देशों की भी उतनी ही जिम्मेदारी है। SDGs बहु-हितधारक सहभागिता पर आधारित हैं, जिसमें सरकार, निजी क्षेत्र, नागरिक समाज, अंतरराष्ट्रीय संगठन और आम नागरिक सभी की भूमिका मानी गई है। भारत में भी SDGs को राष्ट्रीय विकास योजनाओं से जोड़ा गया है और नीति आयोग द्वारा SDG इंडेक्स के माध्यम से राज्यों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाता है। शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल समावेशन और गरीबी उन्मूलन जैसी योजनाएँ SDGs के अनुरूप हैं। इस प्रकार SDGs वैश्विक विकास के लिए एक साझा रोडमैप प्रस्तुत करते हैं, जो आर्थिक प्रगति, सामाजिक समावेशन और पर्यावरणीय सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करता है।
Buy IGNOU Solved Guess Paper With Important Questions :-
CONTACT/WHATSAPP – 88822 85078
प्रश्न 7: सतत विकास को बढ़ावा देने में सरकार की भूमिका की विवेचना कीजिए।
सतत विकास को बढ़ावा देने में सरकार की भूमिका अत्यंत केंद्रीय और निर्णायक होती है, क्योंकि विकास की दिशा तय करने, संसाधनों का आवंटन करने, कानून बनाने और उनके क्रियान्वयन की शक्ति सरकार के पास ही होती है। सरकार नीति निर्माण के माध्यम से आर्थिक वृद्धि, सामाजिक कल्याण और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करती है। नवीकरणीय ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन, स्वच्छता, स्वास्थ्य, शिक्षा, खाद्य सुरक्षा, शहरी विकास और ग्रामीण आजीविका से संबंधित नीतियाँ सतत विकास को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती हैं। सरकार कानून और विनियमन के माध्यम से उद्योगों, खनन, वनों के दोहन, प्रदूषण नियंत्रण और जैव विविधता संरक्षण को नियंत्रित करती है। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, वन संरक्षण अधिनियम और प्रदूषण नियंत्रण नियम इसके उदाहरण हैं। सरकार सार्वजनिक निवेश के माध्यम से हरित ऊर्जा, सार्वजनिक परिवहन, स्वच्छ जल, स्वच्छता, शिक्षा और स्वास्थ्य अवसंरचना का विकास करती है। सामाजिक सततता सुनिश्चित करने के लिए सरकार गरीबी उन्मूलन, खाद्य सुरक्षा, रोजगार गारंटी, स्वास्थ्य बीमा और सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ चलाती है। पर्यावरणीय सततता के लिए सरकार वृक्षारोपण, जल संरक्षण, जलवायु अनुकूलन और आपदा प्रबंधन कार्यक्रम लागू करती है। इसके अतिरिक्त सरकार निजी क्षेत्र, नागरिक समाज और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ साझेदारी कर सतत विकास को गति देती है। हालाँकि राजनीतिक अल्पकालिक हित, भ्रष्टाचार, कमजोर क्रियान्वयन और संस्थागत क्षमता की कमी कई बार सरकार की भूमिका को सीमित करती है, फिर भी सतत विकास का सबसे बड़ा प्रेरक और नियंत्रक आज भी सरकार ही है।
प्रश्न 8: सतत विकास की प्राप्ति में नागरिक समाज और स्थानीय समुदायों की भूमिका की विवेचना कीजिए।
सतत विकास केवल सरकार के प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए नागरिक समाज और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। नागरिक समाज में गैर-सरकारी संगठन, स्वैच्छिक संस्थाएँ, सहकारी समितियाँ, महिला समूह, युवा संगठन और सामाजिक आंदोलन शामिल होते हैं। ये संगठन शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, आजीविका और पोषण जैसे क्षेत्रों में जागरूकता फैलाते हैं। स्थानीय समुदाय जल संरक्षण, वन प्रबंधन, कचरा प्रबंधन, स्वच्छता और जैव विविधता संरक्षण में प्रत्यक्ष भागीदारी निभाते हैं। समुदाय आधारित प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन से संसाधनों का सतत उपयोग संभव होता है। नागरिक समाज सरकार की नीतियों और योजनाओं की निगरानी कर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करता है। कई बार पर्यावरण आंदोलन, महिला आंदोलन और आदिवासी अधिकार आंदोलन ने सतत विकास से जुड़ी नीतियों को नई दिशा दी है। नागरिक समाज आपदा प्रबंधन, जलवायु अनुकूलन और आजीविका पुनर्स्थापन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हालांकि इन संगठनों को धन की कमी, प्रशासनिक नियंत्रण और राजनीतिक दबाव जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, फिर भी नागरिक समाज और स्थानीय समुदाय सतत विकास को जमीनी स्तर पर वास्तविक रूप देने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं।
प्रश्न 9: भारत जैसे विकासशील देशों में सतत विकास की प्राप्ति के समक्ष प्रमुख चुनौतियों की विवेचना कीजिए।
भारत जैसे विकासशील देशों में सतत विकास की प्राप्ति अनेक जटिल चुनौतियों से जुड़ी हुई है। सबसे बड़ी चुनौती गरीबी और असमानता है, जहाँ बड़ी आबादी अभी भी बुनियादी आवश्यकताओं—भोजन, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता—से वंचित है। जनसंख्या वृद्धि और अनियोजित शहरीकरण के कारण भूमि, जल, ऊर्जा, परिवहन और आवास पर अत्यधिक दबाव बढ़ गया है। पर्यावरणीय क्षरण, जैसे वायु और जल प्रदूषण, वनों की कटाई, मृदा क्षरण और जैव विविधता ह्रास सतत विकास के मार्ग में बड़ी बाधाएँ हैं। जलवायु परिवर्तन से सूखा, बाढ़, हीटवेव और चक्रवात जैसी आपदाएँ बढ़ रही हैं, जिससे कृषि, स्वास्थ्य और अवसंरचना प्रभावित हो रही है। आर्थिक आवश्यकताओं के कारण कई बार सरकारें पर्यावरण संरक्षण की तुलना में औद्योगिक विकास को प्राथमिकता देती हैं, जिससे विकास और पर्यावरण के बीच टकराव उत्पन्न होता है। कमजोर शासन, भ्रष्टाचार, कानूनों के कमजोर क्रियान्वयन और विभागीय समन्वय की कमी भी सतत विकास को बाधित करती है। तकनीकी और वित्तीय संसाधनों की कमी, हरित प्रौद्योगिकी की ऊँची लागत और सामाजिक जागरूकता का अभाव भी प्रमुख समस्याएँ हैं। इस प्रकार भारत में सतत विकास बहुआयामी चुनौतियों से घिरा हुआ है, जिनका समाधान एकीकृत और सहभागितामूलक दृष्टिकोण से ही संभव है।
Buy IGNOU Solved Guess Paper With Important Questions :-
CONTACT/WHATSAPP – 88822 85078
प्रश्न 10: भविष्य की रणनीति के रूप में सतत विकास की आलोचनात्मक विवेचना कीजिए।
सतत विकास को भविष्य की सबसे व्यापक और यथार्थवादी विकास रणनीति माना जाता है, क्योंकि यह आर्थिक वृद्धि, सामाजिक न्याय और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ साधने का प्रयास करता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसका दीर्घकालिक दृष्टिकोण है, जो अंतर-पीढ़ी समानता और संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग पर बल देता है। SDGs, जलवायु समझौते और हरित अर्थव्यवस्था की अवधारणा इसके वैश्विक समर्थन को दर्शाते हैं। सतत विकास ने जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा, शिक्षा, स्वास्थ्य और लैंगिक समानता जैसे मुद्दों को मुख्यधारा में ला दिया है। लेकिन व्यवहार में इसकी कई सीमाएँ भी हैं। अल्पकालिक आर्थिक लाभ अक्सर दीर्घकालिक पर्यावरणीय हितों पर हावी हो जाते हैं। उपभोक्तावाद, अत्यधिक उत्पादन और संसाधनों की बर्बादी अभी भी वैश्विक अर्थव्यवस्था की प्रमुख विशेषताएँ बनी हुई हैं। विकसित और विकासशील देशों के बीच ऐतिहासिक जिम्मेदारी और संसाधनों के वितरण को लेकर असमानता है। राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमजोरी, कमजोर शासन और पर्यावरणीय कानूनों का अपर्याप्त पालन भी सतत विकास को बाधित करता है। इसके बावजूद सतत विकास के बिना मानव सभ्यता का भविष्य सुरक्षित नहीं है, क्योंकि असतत विकास हमें जलवायु संकट, पर्यावरणीय विनाश और सामाजिक अस्थिरता की ओर ले जा रहा है। इसलिए आलोचनाओं के बावजूद सतत विकास मानवता के लिए सबसे आवश्यक, नैतिक और अनिवार्य मार्ग है।
Buy IGNOU Solved Guess Paper With Important Questions :-
CONTACT/WHATSAPP – 88822 85078
Follow For Updates: senrigbookhouse
Read Also :