IGNOU FREE BPCG-173 स्वास्थ्य और कल्याण के लिए मनोविज्ञान Solved Guess Paper 2025
Q1. स्वास्थ्य मनोविज्ञान (Health Psychology) की अवधारणा, उद्देश्य और महत्व पर विस्तार से चर्चा कीजिए।
स्वास्थ्य मनोविज्ञान मनोविज्ञान की वह शाखा है जो यह अध्ययन करती है कि कैसे हमारे विचार, भावनाएँ, व्यवहार और सामाजिक स्थितियाँ स्वास्थ्य और बीमारी को प्रभावित करती हैं। पहले स्वास्थ्य को केवल “बीमारी की अनुपस्थिति” माना जाता था, लेकिन आधुनिक अवधारणा के अनुसार स्वास्थ्य एक समग्र (Holistic) स्थिति है जिसमें शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक संतुलन शामिल है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार स्वास्थ्य—“पूर्ण शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक कल्याण की अवस्था”—है। स्वास्थ्य मनोविज्ञान इस बात पर ध्यान देता है कि व्यक्ति अपनी जीवनशैली, भावनाओं और विचारों को नियंत्रित करके कैसे स्वस्थ रह सकता है।
स्वास्थ्य मनोविज्ञान के उद्देश्य:
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स्वास्थ्य व्यवहारों को समझना जैसे–व्यायाम, भोजन, नींद, स्वच्छता।
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अस्वस्थ आदतों से बचाना—धूम्रपान, शराब, नशा, तनावपूर्ण जीवनशैली।
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बीमारी की रोकथाम (Prevention) पर जोर देना।
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रोगियों को इलाज में मानसिक सहायता देना, जिससे वे बीमारी का सामना सकारात्मक रूप से कर सकें।
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डॉक्टर–मरीज संबंध को बेहतर बनाना तथा स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावी बनाना।
महत्व:
आज की तेज़-तर्रार जीवनशैली, प्रदूषण, तनाव, अनियमित भोजन और डिजिटल लत के कारण लोगों का स्वास्थ्य लगातार प्रभावित हो रहा है। हृदय रोग, मधुमेह, मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों के पीछे केवल शारीरिक कारक नहीं बल्कि मनोवैज्ञानिक कारण भी होते हैं।
स्वास्थ्य मनोविज्ञान यह समझने में मदद करता है कि—
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तनाव इम्यून सिस्टम को कैसे कमजोर करता है।
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नकारात्मक भावनाएँ शरीर पर कैसे बुरा प्रभाव डालती हैं।
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सकारात्मक सोच उपचार को कैसे तेज करती है।
यह क्षेत्र स्कूलों, अस्पतालों, खेल, कार्यस्थलों और समाज में स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए उपयोग किया जाता है। स्वास्थ्य मनोविज्ञान बीमारियों के इलाज से आगे बढ़कर स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि को बढ़ाने पर जोर देता है।
इस प्रकार, स्वास्थ्य मनोविज्ञान आधुनिक जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और व्यक्ति को स्वस्थ जीवन जीने के लिए व्यवहारिक और मानसिक मार्गदर्शन प्रदान करता है।
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Q2. तनाव (Stress) की परिभाषा, प्रकार, कारण और शारीरिक–मानसिक प्रभावों पर विस्तृत चर्चा कीजिए।
तनाव वह मनोवैज्ञानिक और शारीरिक प्रतिक्रिया है जो तब उत्पन्न होती है जब कोई स्थिति व्यक्ति की क्षमता, संसाधन या नियंत्रण को चुनौती देती है। तनाव शरीर को “Fight or Flight” प्रतिक्रिया में ले जाता है, जिसमें एड्रेनालिन और कॉर्टिसोल जैसे हार्मोन बढ़ जाते हैं।
तनाव के प्रकार:
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तीव्र तनाव (Acute Stress): अचानक उत्पन्न होने वाला, अल्पकालिक तनाव—जैसे परीक्षा, दुर्घटना, झगड़ा।
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दीर्घकालिक तनाव (Chronic Stress): लंबे समय तक चलने वाला तनाव—जैसे आर्थिक समस्या, रिश्तों का तनाव, बेरोजगारी।
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बार-बार तीव्र तनाव (Episodic Acute Stress): वे लोग जो हमेशा जल्दीबाज़ी, चिंता या अव्यवस्थित जीवन जीते हैं।
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सकारात्मक तनाव (Eustress): वह तनाव जो प्रेरित करता है—जैसे प्रतियोगिता की तैयारी।
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नकारात्मक तनाव (Distress): स्वास्थ्य को हानि पहुँचाने वाला तनाव।
तनाव के कारण:
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बाहरी कारण: काम का दबाव, आर्थिक समस्या, पढ़ाई, परिवारिक विवाद, सामाजिक अपेक्षाएँ।
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भीतरी कारण: नकारात्मक सोच, कम आत्मविश्वास, अत्यधिक अपेक्षाएँ, डर और चिंता।
आजकल डिजिटल दुनिया—सोशल मीडिया, प्रतियोगिता, तुलना—भी बड़े तनाव कारक हैं।
तनाव के शारीरिक प्रभाव:
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सिरदर्द, थकान, मांसपेशियों में खिंचाव
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उच्च रक्तचाप, हृदय रोग का खतरा
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इम्यून सिस्टम कमजोर होना
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पेट दर्द, अल्सर, पाचन समस्याएँ
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नींद का बिगड़ना
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वजन बढ़ना या घटना
मानसिक प्रभाव:
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चिंता, गुस्सा, बेचैनी
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अवसाद, निराशा
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एकाग्रता में कमी
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सामाजिक दूरी, अकेलापन
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गलत निर्णय, अस्थिरता
तनाव व्यवहार को भी प्रभावित करता है—जैसे नशा, ज्यादा खाना, आलस, आक्रामकता।
अतः तनाव को समझकर ही व्यक्ति प्रभावी प्रबंधन कर सकता है और स्वस्थ जीवन जी सकता है।
Q3. तनाव प्रबंधन (Stress Management) के मनोवैज्ञानिक तरीकों पर चर्चा कीजिए — Problem-focused, Emotion-focused, और CBT.
तनाव प्रबंधन ऐसे मनोवैज्ञानिक और व्यवहारिक उपाय हैं जो तनाव को कम करने, नियंत्रित करने और संतुलन में रखने में मदद करते हैं। तनाव प्रबंधन बहुआयामी प्रक्रिया है जो विचारों, भावनाओं, व्यवहार और जीवनशैली में सुधार लाती है।
1. समस्या-केंद्रित प्रबंधन (Problem-Focused Coping):
यह तरीका तनाव के मूल कारण को हटाने पर आधारित है।
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समय प्रबंधन
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लक्ष्य निर्धारण
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जानकारी जुटाना
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समाधान-आधारित सोच
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कार्यों को छोटे हिस्सों में बाँटना
यह तब उपयोगी है जब स्थिति को वास्तव में बदला जा सकता है, जैसे परीक्षा की तैयारी, कार्यस्थल पर समस्या समाधान।
2. भावनात्मक-केंद्रित प्रबंधन (Emotion-Focused Coping):
यह तब उपयोगी है जब समस्या को बदला नहीं जा सकता—जैसे किसी प्रियजन का निधन, बीमारी।
इसमें शामिल हैं—
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गहरी सांस लेना
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ध्यान (Meditation), योग
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सकारात्मक भावनाएँ विकसित करना
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रोज़नामा लिखना
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सामाजिक समर्थन लेना
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विश्राम तकनीकें
ये तकनीकें मन को शांत करके तनाव के प्रभाव को कम करती हैं।
3. संज्ञानात्मक-व्यवहारिक तकनीकें (Cognitive-Behavioural Techniques – CBT):
CBT तनाव को कम करने में अत्यंत प्रभावी माना जाता है।
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नकारात्मक विचारों की पहचान
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उन्हें तर्कपूर्ण विचारों से बदलना
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“मैं असफल हो जाऊँगा” → “मैं अभ्यास कर सकता हूँ”
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माइंडफुलनेस
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व्यवहार संशोधन
CBT व्यक्ति को सोचने और प्रतिक्रिया देने का स्वस्थ तरीका सिखाता है।
4. जीवनशैली परिवर्तन:
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नियमित व्यायाम
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संतुलित आहार
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पर्याप्त नींद
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नशे से दूरी
5. सामाजिक समर्थन:
परिवार, मित्रों और मेंटर का समर्थन तनाव को काफी कम करता है।
इस प्रकार, तनाव प्रबंधन तकनीकों के नियमित अभ्यास से व्यक्ति जीवन की चुनौतियों का आत्मविश्वास के साथ सामना कर सकता है।
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Q4. शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों पर चर्चा कीजिए — Lifestyle, Positive Psychology, Resilience.
शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देना एक समग्र प्रक्रिया है जिसमें स्वस्थ आदतें, सकारात्मक सोच और भावनात्मक संतुलन शामिल होता है। मनोविज्ञान इस प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए कई सिद्धांत प्रदान करता है।
1. जीवनशैली प्रबंधन (Lifestyle Management):
स्वस्थ जीवनशैली अच्छा स्वास्थ्य बनाए रखने का सबसे महत्वपूर्ण तरीका है।
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व्यायाम: हृदय स्वास्थ्य, ऊर्जा और तनाव कम करता है।
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संतुलित भोजन: प्रतिरक्षा, दिमाग और शरीर को मजबूत करता है।
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नींद: 7–8 घंटे की नींद मानसिक स्थिरता, याददाश्त और निर्णय क्षमता बढ़ाती है।
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नशे से दूरी: शराब, तंबाकू और नशीले पदार्थ शरीर और मन को कमजोर करते हैं।
2. सकारात्मक मनोविज्ञान (Positive Psychology):
यह दृष्टिकोण कमज़ोरियों नहीं बल्कि ताकतों पर ध्यान देता है।
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कृतज्ञता (Gratitude): खुशी और संतोष बढ़ता है।
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आशावाद (Optimism): सकारात्मक सोच कठिन परिस्थितियों में भी प्रेरित रखती है।
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माइंडफुलनेस: वर्तमान क्षण में रहना तनाव कम करता है।
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फ्लो स्टेट: रुचि वाली गतिविधियों में पूरी तरह डूब जाना मानसिक स्वास्थ्य बढ़ाता है।
3. लचीलापन (Resilience):
लचीलापन कठिनाइयों, असफलताओं या चुनौतियों से उबरने की क्षमता है।
लचीले व्यक्ति—
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भावनात्मक रूप से स्थिर रहते हैं
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समस्याओं को हल करने में बेहतर होते हैं
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तनाव का मुकाबला कर पाते हैं
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असफलता से सीखकर आगे बढ़ते हैं
लचीलापन बढ़ाने के तरीके:
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आत्म-जागरूकता
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सकारात्मक सोच
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सामाजिक समर्थन
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लक्ष्य निर्धारण
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ध्यान और योग
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जीवन के प्रति संतुलित दृष्टिकोण
4. सामाजिक समर्थन:
एक सहायक परिवार और मित्र मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में अत्यंत भूमिका निभाते हैं।
इस प्रकार, स्वस्थ जीवनशैली, सकारात्मक मनोविज्ञान, और लचीलापन मिलकर शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत बनाते हैं।
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Q5. मन-शरीर संबंध (Mind–Body Connection) क्या है? विचार, भावनाएँ और व्यवहार शारीरिक स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करते हैं?
मन-शरीर संबंध यह दर्शाता है कि हमारे विचार, भावनाएँ और व्यवहार हमारे शरीर के स्वास्थ्य को सीधे प्रभावित करते हैं। मन और शरीर एक-दूसरे से जुड़े हैं, और मानसिक स्थिति में परिवर्तन का शरीर की प्रणालियों पर तुरंत प्रभाव पड़ता है।
1. विचार और स्वास्थ्य:
सकारात्मक विचार—आशा, आत्मविश्वास, प्रेरणा—तनाव को कम करते हैं। इससे—
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रक्तचाप कम होता है
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हृदयगति सामान्य होती है
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प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत होता है
नकारात्मक सोच—डर, चिंता, निराशा—कॉर्टिसोल बढ़ाती है, जिससे हृदय रोग, मधुमेह और उच्च रक्तचाप का खतरा बढ़ता है।
2. भावनाएँ और स्वास्थ्य:
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क्रोध हृदयगति बढ़ाता है और हृदय पर दबाव डालता है।
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चिंता साँसों को तेज करती है, चक्कर, पसीना और पेट की समस्याएँ बढ़ाती है।
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अवसाद प्रतिरक्षा को कमजोर करता है और शरीर को थका देता है।
3. व्यवहार और स्वास्थ्य:
जब व्यक्ति तनावग्रस्त होता है, वह—
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अधिक खाना
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धूम्रपान
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शराब पीना
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व्यायाम न करना
जैसे अस्वस्थ व्यवहार अपनाता है।
समय के साथ यह आदतें बीमारी का कारण बनती हैं।
4. शरीर पर प्रभाव के वैज्ञानिक कारण:
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तंत्रिका तंत्र: मस्तिष्क अंगों को नियंत्रित करता है।
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अंतःस्रावी तंत्र: हार्मोन मानसिक अवस्था का शरीर पर असर बढ़ाते हैं।
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प्रतिरक्षा तंत्र: तनाव प्रतिरक्षा घटाता है, सकारात्मक भावनाएँ बढ़ाती हैं।
उदाहरण:
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तनाव → पेट दर्द, अल्सर
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खुशी → दिल पर सकारात्मक प्रभाव
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ध्यान → रक्तचाप कम
इस प्रकार, मन और शरीर एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं। सकारात्मक सोच, भावनात्मक संतुलन और स्वस्थ व्यवहार शारीरिक स्वास्थ्य को मजबूत बनाते हैं।
Q6. जीवनशैली रोग (Lifestyle Diseases) क्या हैं? इनके मनोवैज्ञानिक और व्यवहारिक कारणों पर विस्तार से चर्चा कीजिए।
जीवनशैली रोग (Lifestyle Diseases) वे रोग हैं जो मुख्यतः व्यक्ति की अस्वस्थ आदतों, तनावपूर्ण जीवन, खराब भोजन, शारीरिक निष्क्रियता और नकारात्मक मानसिक अवस्थाओं के कारण उत्पन्न होते हैं। ये रोग संक्रामक नहीं होते, बल्कि जीवनशैली एवं तनाव के कारण धीरे-धीरे विकसित होते हैं। इनमें मधुमेह (Diabetes), हृदय रोग, मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, स्ट्रोक, अस्थमा और कुछ प्रकार के कैंसर शामिल हैं।
इन रोगों के मनोवैज्ञानिक कारण अत्यंत महत्वपूर्ण हैं—
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दीर्घकालिक तनाव: लगातार तनाव से कॉर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है, जिससे रक्तचाप, रक्त शर्करा और कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाते हैं। यह मधुमेह, मोटापा और हृदय रोग का बड़ा कारण है।
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नकारात्मक भावनाएँ: क्रोध, चिंता, अवसाद और निराशा शरीर में सूजन (Inflammation) बढ़ाते हैं और प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करते हैं।
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कम आत्म-नियंत्रण: भावनात्मक असंतुलन के कारण लोग ज्यादा खाना, धूम्रपान, शराब या नशे की ओर आकर्षित होते हैं।
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खराब निर्णय क्षमता: तनावग्रस्त व्यक्ति स्वस्थ विकल्प चुनने के बजाय आसान लेकिन हानिकारक विकल्प चुनते हैं।
व्यवहारिक कारण:
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बैठे रहने की आदत (Sedentary Lifestyle): अधिक देर बैठना—बिना व्यायाम किए—हृदय संबंधी रोग और मोटापा बढ़ाता है।
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अस्वस्थ भोजन: जंक फूड, तैलीय भोजन, सॉफ्ट ड्रिंक्स, चीनी और नमक का अधिक सेवन मोटापा, मधुमेह और रक्तचाप बढ़ाते हैं।
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धूम्रपान और शराब: धूम्रपान हृदय और फेफड़ों को नष्ट करता है। शराब यकृत, मस्तिष्क और पाचन प्रणाली को नुकसान पहुँचाती है।
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नींद की कमी: कम सोना इंसुलिन नियंत्रण, हार्मोन और भूख को प्रभावित करता है, जिससे वजन और तनाव बढ़ता है।
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डिजिटल लत: लंबे समय तक मोबाइल/कंप्यूटर पर रहने से नींद, आँखों, मानसिक संतुलन और सक्रियता पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
सामाजिक एवं पर्यावरणीय कारण:
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शहरों में प्रदूषण
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प्रतियोगिता और कार्यस्थल का दबाव
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परिवारिक तनाव
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सोशल मीडिया तुलना
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आर्थिक असुरक्षा
रोकथाम:
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नियमित व्यायाम
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संतुलित आहार
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पर्याप्त नींद
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तनाव प्रबंधन
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नशे से दूरी
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सकारात्मक मानसिकता
इस प्रकार, जीवनशैली रोग मुख्यतः मानसिक और व्यवहारिक आदतों से उत्पन्न होते हैं और इन्हें स्वस्थ जीवनशैली व सकारात्मक सोच से रोका जा सकता है।
Q7. सकारात्मक मानसिक स्वास्थ्य (Positive Mental Health) क्या है? इसके घटक—Emotional, Psychological और Social Well-being—पर चर्चा कीजिए।
सकारात्मक मानसिक स्वास्थ्य केवल मानसिक बीमारी का अभाव नहीं, बल्कि खुशी, संतुलन, उद्देश्यपूर्ण जीवन और स्वस्थ संबंधों से भरी जीवन अवस्था है। यह वह स्थिति है जिसमें व्यक्ति भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक रूप से संतुलित रहता है।
1. भावनात्मक कल्याण (Emotional Well-Being)
यह इस बात को दर्शाता है कि व्यक्ति अपनी भावनाओं को कितनी प्रभावी तरीके से पहचानता, समझता और नियंत्रित करता है। भावनात्मक रूप से स्वस्थ व्यक्ति—
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सकारात्मक भावनाएँ जैसे खुशी, शांति, कृतज्ञता महसूस करता है।
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कठिन परिस्थितियों में भी संतुलन बनाए रखता है।
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भावनाओं को दबाने के बजाय स्वस्थ तरीके से व्यक्त करता है।
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तनाव और नकारात्मक भावनाओं का प्रभावी ढंग से मुकाबला करता है।
भावनात्मक संतुलन से व्यक्ति एकाग्रता, नींद, संबंध और स्वास्थ्य सभी में सुधार अनुभव करता है।
2. मनोवैज्ञानिक कल्याण (Psychological Well-Being)
Carol Ryff के अनुसार मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य के छह प्रमुख आयाम हैं—
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Self-Acceptance: अपनी खूबियों और कमजोरियों को स्वीकार करने की क्षमता।
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Purpose in Life: जीवन में लक्ष्य और अर्थ का होना।
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Personal Growth: लगातार सीखना और विकास करना।
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Autonomy: अपने निर्णय खुद लेने की क्षमता।
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Environmental Mastery: जीवन के कार्यों, चुनौतियों और परिस्थितियों को संभालने की क्षमता।
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Positive Relationships: अच्छे सामाजिक संबंध और सहानुभूति।
मनोवैज्ञानिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति आत्मविश्वासी, तार्किक, स्थिर और व्यक्तित्व में परिपक्व होता है।
3. सामाजिक कल्याण (Social Well-Being)
सामाजिक कल्याण व्यक्ति की सामाजिक पहचान, सामाजिक योगदान और समाज के प्रति दृष्टिकोण पर आधारित होता है। इसमें शामिल हैं—
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Social Integration: समाज से जुड़ाव और सहभागिता।
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Social Acceptance: दूसरों को स्वीकार करना और स्वयं भी स्वीकार किया जाना।
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Social Contribution: समाज के लिए उपयोगी कार्य करना।
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Social Coherence: समाज की संरचना और कार्यप्रणाली को समझना।
सामाजिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति अकेलापन महसूस नहीं करता और मजबूत सामाजिक समर्थन उसे जीवन की कठिनाइयों में मदद करता है।
निष्कर्ष:
सकारात्मक मानसिक स्वास्थ्य व्यक्ति को भावनात्मक संतुलन, मानसिक मजबूती और सामाजिक सामंजस्य प्रदान करता है। यह जीवन की गुणवत्ता, सफलता और संतुष्टि को बढ़ाने वाला मूल आधार है।
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Q8. लचीलापन (Resilience) क्या है? लचीलापन विकसित करने वाले कारकों और इसे बढ़ाने के तरीकों पर विस्तार से चर्चा कीजिए।
लचीलापन वह क्षमता है जिससे व्यक्ति कठिन परिस्थितियों, तनाव, असफलता, आघात और जीवन की चुनौतियों से उभरकर फिर से संतुलित और मजबूत बन जाता है। लचीलापन का अर्थ समस्याओं से बचना नहीं, बल्कि उनसे सीखना और आगे बढ़ना है।
लचीलापन बढ़ाने वाले मुख्य कारक:
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व्यक्तिगत गुण: आशावाद, आत्मविश्वास, भावनात्मक स्थिरता, धैर्य।
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संज्ञानात्मक कौशल: समस्या-समाधान क्षमता, तार्किक सोच, लक्ष्य निर्धारण।
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भावनात्मक नियंत्रण: गुस्सा, डर, दुख और तनाव को नियंत्रित करने की क्षमता।
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सामाजिक समर्थन: परिवार, मित्र, गुरु या समुदाय का सहयोग लचीलेपन की नींव है।
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अर्थ और उद्देश्य: जिन लोगों के जीवन में स्पष्ट उद्देश्य होता है, वे संकट में भी टिके रहते हैं।
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स्वस्थ जीवनशैली: व्यायाम, अच्छी नींद और संतुलित आहार व्यक्तित्व को मजबूत बनाते हैं।
लचीलापन बढ़ाने के तरीके:
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आत्म-जागरूकता विकसित करना: अपनी कमजोरियों, भावनाओं और विचारों को पहचानना।
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सकारात्मक सोच: नकारात्मक विचारों को चुनौती देना और उन्हें सकारात्मक दृष्टिकोण से बदलना।
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मजबूत सामाजिक नेटवर्क बनाना: सहायक और समझदार लोगों के साथ मजबूत संबंध बनाए रखना।
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लक्ष्य निर्धारित करना: छोटे और साध्य लक्ष्य बनाना, जो आत्मविश्वास बढ़ाते हैं।
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माइंडफुलनेस एवं ध्यान: यह मानसिक शांति, फोकस और भावनात्मक संतुलन को बढ़ाता है।
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अनुकूलन क्षमता: परिस्थितियों को स्वीकार करना और उनमें समायोजन करना।
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आत्म-देखभाल (Self-care): विश्राम, रुचियाँ, व्यायाम, संतुलन—ये सब लचीलेपन को बढ़ाते हैं।
लचीलापन व्यक्ति को जीवन की चुनौतियों का सामना मानसिक शक्ति, भावनात्मक संतुलन और आत्म-विकास के साथ करने की क्षमता देता है।
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Q9. स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि (Well-Being) बनाए रखने में सामाजिक समर्थन (Social Support) की भूमिका पर चर्चा कीजिए।
सामाजिक समर्थन वह सहायता, प्रोत्साहन, समझ, और भावनात्मक सहारा है जो व्यक्ति को परिवार, मित्रों, सहकर्मियों और समुदाय से मिलता है। यह मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा कारक है।
सामाजिक समर्थन के प्रकार:
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भावनात्मक समर्थन: सहानुभूति, प्रेम, देखभाल और प्रोत्साहन।
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व्यावहारिक समर्थन (Instrumental Support): आर्थिक सहायता, काम में मदद, दैनिक कार्यों में सहयोग।
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सूचनात्मक समर्थन (Informational Support): सलाह, मार्गदर्शन, सुझाव।
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सामाजिक संगति (Companionship): किसी समूह से जुड़ाव और अपनापन महसूस होना।
स्वास्थ्य पर प्रभाव:
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तनाव में कमी: सामाजिक समर्थन तनाव को कम करता है और भावनात्मक संतुलन को बढ़ाता है।
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मानसिक स्वास्थ्य: अवसाद, चिंता और अकेलेपन का जोखिम कम होता है।
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शारीरिक स्वास्थ्य: वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि जिन लोगों के सामाजिक संबंध मजबूत होते हैं, उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली बेहतर होती है और वे जल्दी स्वस्थ होते हैं।
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जीवनशैली सुधार: समाज और दोस्तों का सहयोग व्यक्ति को व्यायाम, healthy diet, meditation जैसे अच्छे व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित करता है।
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आत्मविश्वास और प्रेरणा: कठिन समय में सहारा मिलना व्यक्ति को आशा और शक्ति प्रदान करता है।
सामाजिक समर्थन न केवल मानसिक तनाव को कम करता है बल्कि जीवन की गुणवत्ता बढ़ाकर व्यक्ति को अधिक खुश और स्वस्थ बनाता है।
Q10. दीर्घकालिक शारीरिक और मानसिक कल्याण को बढ़ावा देने के मनोवैज्ञानिक उपायों पर चर्चा कीजिए।
दीर्घकालिक (Long-term) शारीरिक और मानसिक कल्याण प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को मन–शरीर संतुलन, सकारात्मक सोच, स्वस्थ व्यवहार और भावनात्मक स्थिरता की आवश्यकता होती है।
1. स्वस्थ जीवनशैली (Healthy Lifestyle):
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व्यायाम: हृदय स्वास्थ्य, वजन नियंत्रण और तनाव में कमी लाता है।
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संतुलित भोजन: पौष्टिक आहार शरीर को ऊर्जा और सुरक्षा प्रदान करता है।
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पर्याप्त नींद: 7–8 घंटे की नींद मानसिक और शारीरिक कार्यक्षमता बढ़ाती है।
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नशे से दूरी: धूम्रपान, शराब और ड्रग्स शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों को नुकसान पहुंचाते हैं।
2. सकारात्मक मनोविज्ञान (Positive Psychology):
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कृतज्ञता अभ्यास
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सकारात्मक पुष्टि (Positive affirmations)
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दया और करुणा
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आशावादी सोच
ये सभी मानसिक मजबूती, खुशी और संतुलन बढ़ाते हैं।
3. तनाव प्रबंधन:
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ध्यान (Meditation)
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गहरी सांस
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योग
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प्रगतिशील मांसपेशी विश्राम
ये तकनीकें मन और शरीर को शांत करती हैं, हृदयगति सामान्य करती हैं और मानसिक तनाव कम करती हैं।
4. मजबूत सामाजिक संबंध:
अच्छे दोस्त, परिवार और सहयोगी जीवन की चुनौतियों का सामना करने में व्यक्ति की मदद करते हैं।
5. संज्ञानात्मक–व्यवहारिक तकनीकें (CBT):
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नकारात्मक विचारों को पहचानकर सकारात्मक विचारों में बदलना
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व्यवहार सुधार और स्वस्थ आदतें विकसित करना
6. समय प्रबंधन और कार्य–जीवन संतुलन:
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प्राथमिकताओं का निर्धारण
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ब्रेक लेना
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अधिक काम से बचना
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परिवार और स्वयं के लिए समय देना
इस प्रकार, दीर्घकालिक कल्याण केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है बल्कि मानसिक खुशी, भावनात्मक संतुलन और सकारात्मक जीवनशैली पर भी निर्भर करता है।
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