IGNOU FREE BPAS-184 संभारण प्रबंधन Solved Guess Paper With Imp Questions 2025

IGNOU FREE BPAS-184 संभारण प्रबंधन Solved Guess Paper 2025

प्रश्न 1. लॉजिस्टिक्स में परिवहन (Transportation) क्या है? इसका महत्त्व समझाइए।

परिवहन लॉजिस्टिक्स का सबसे महत्वपूर्ण घटक है क्योंकि इसके माध्यम से ही वस्तुओं का एक स्थान से दूसरे स्थान तक भौतिक रूप से संचलन होता है। यह आपूर्तिकर्ता, निर्माता, गोदाम, वितरण केंद्र और ग्राहकों को आपस में जोड़ता है। परिवहन के प्रमुख माध्यम सड़क, रेल, वायु, समुद्री मार्ग और पाइपलाइन हैं। प्रत्येक माध्यम की अपनी लागत, गति और उपयुक्तता होती है।

लॉजिस्टिक्स में परिवहन का सबसे बड़ा महत्त्व समयबद्ध आपूर्ति है। आज के प्रतिस्पर्धी बाजार और ई-कॉमर्स के दौर में ग्राहक तेज और विश्वसनीय सेवा की अपेक्षा करते हैं। यदि परिवहन में देरी होती है, तो पूरी आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो जाती है, जिससे कंपनी को आर्थिक हानि और ग्राहक असंतोष का सामना करना पड़ता है।

परिवहन लागत नियंत्रण का भी महत्वपूर्ण साधन है। उपयुक्त माध्यम का चयन, मार्गों का बेहतर नियोजन और लोड का संतुलन खर्च को कम कर सकता है। परिवहन व्यवसायों को नए बाज़ारों तक पहुँचने में सक्षम बनाता है, जिससे बिक्री और प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ती है।

परिवहन इन्वेंट्री प्रबंधन में भी सहयोग करता है। जब वस्तुएँ तेजी से और समय पर पहुँच जाती हैं, तो कंपनियों को बड़े पैमाने पर स्टॉक रखने की आवश्यकता नहीं रहती। इससे भंडारण लागत कम होती है और वस्तुओं के अप्रचलित होने का जोखिम भी घटता है।

कुछ उत्पाद जैसे औषधियाँ, सब्ज़ियाँ, मांस-मछली आदि ताप-संवेदनशील होते हैं। इनके लिए विशेष शीत-परिवहन की आवश्यकता होती है जो उत्पाद की गुणवत्ता को सुरक्षित रखता है।

समग्र रूप से, परिवहन लॉजिस्टिक्स की रीढ़ है। यह न केवल वस्तुओं के प्रवाह को सुगम बनाता है, बल्कि लागत नियंत्रण, गुणवत्ता संरक्षण, ग्राहक संतुष्टि और बाजार विस्तार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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प्रश्न 2. इन्वेंट्री प्रबंधन (Inventory Management) क्या है? इसके उद्देश्य बताइए।

इन्वेंट्री प्रबंधन वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से किसी संगठन में उपलब्ध भंडार—कच्चा माल, अर्धनिर्मित वस्तुएँ और तैयार उत्पाद—को व्यवस्थित रूप से नियंत्रित, संग्रहीत और निगरानी किया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आवश्यक वस्तुएँ समय पर उपलब्ध हों, लेकिन अतिरिक्त भंडार न जमा हो, जिससे लागत बढ़े।

इन्वेंट्री प्रबंधन का मुख्य उद्देश्य संतुलित भंडार बनाए रखना है। अधिक भंडार से भंडारण लागत, बीमा, टूट-फूट और पूँजी फँसने जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं, जबकि कम भंडार उत्पादन में बाधा और ग्राहक असंतोष का कारण बनता है।

दूसरा उद्देश्य लागत में कमी लाना है। गोदाम का किराया, सुरक्षा, पैकेजिंग और खराब होने की संभावना जैसी लागतों को वैज्ञानिक इन्वेंट्री नियंत्रण से कम किया जा सकता है।

एक और महत्वपूर्ण उद्देश्य उत्पादन की निरंतरता बनाए रखना है। कच्चा माल समय पर उपलब्ध न होने पर उत्पादन रुक सकता है, जिससे संस्थान को भारी नुकसान होता है।

इन्वेंट्री प्रबंधन में EOQ, ABC विश्लेषण, JIT (Just-in-Time) और सेफ्टी स्टॉक जैसे तकनीकों का प्रयोग किया जाता है। ये तकनीकें ऑर्डर की मात्रा तय करने, वस्तुओं को महत्व के आधार पर वर्गीकृत करने और भंडार को न्यूनतम स्तर तक रखने में सहायक होती हैं।

सही इन्वेंट्री प्रबंधन से ग्राहक संतुष्टि भी बढ़ती है क्योंकि उत्पाद समय पर उपलब्ध रहते हैं।

इस प्रकार, इन्वेंट्री प्रबंधन लागत नियंत्रण, उत्पादन निरंतरता, गुणवत्ता संरक्षण और बेहतर सेवा प्रदान करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

प्रश्न 3. वेयरहाउसिंग (Warehousing) क्या है? इसके कार्य समझाइए।

वेयरहाउसिंग वस्तुओं के सुरक्षित भंडारण की प्रक्रिया है। इसमें कच्चा माल, तैयार उत्पाद और अन्य सामग्रियाँ गोदामों में इस प्रकार रखी जाती हैं कि आवश्यकता पड़ने पर उन्हें समय पर उपलब्ध कराया जा सके।

वेयरहाउसिंग का पहला कार्य संग्रहण (Storage) है। यह वस्तुओं को अल्पकाल और दीर्घकाल दोनों अवधि के लिए सुरक्षित रखता है। दूसरा महत्वपूर्ण कार्य सुरक्षा (Protection) है। भंडारण के दौरान वस्तुओं को तापमान, नमी, चोरी, टूट-फूट आदि जोखिमों से बचाना आवश्यक होता है।

गोदाम छँटाई और वर्गीकरण (Sorting & Grading) का भी कार्य करते हैं। इससे वस्तुओं को गुणवत्ता, आकार या श्रेणी के अनुसार व्यवस्थित किया जा सकता है।

इसी प्रकार, पैकेजिंग और लेबलिंग भी वेयरहाउसिंग का हिस्सा है, जिससे वस्तुएँ भेजने के लिए तैयार हो जाती हैं।

वेयरहाउस वितरण केंद्र के रूप में कार्य करते हैं। यहाँ से वस्तुओं को खुदरा विक्रेताओं, थोक विक्रेताओं या सीधे ग्राहकों तक भेजा जाता है। इससे डिलीवरी समय कम होता है।

वेयरहाउस मूल्य स्थिरीकरण (Price Stabilization) में भी भूमिका निभाते हैं। जब मांग कम होती है, तो वस्तुओं को गोदाम में रखा जाता है और आवश्यकता बढ़ने पर उन्हें बाजार में लाया जाता है।

इस प्रकार, वेयरहाउसिंग संग्रहण, सुरक्षा, पैकेजिंग, वर्गीकरण और वितरण के माध्यम से लॉजिस्टिक्स को सुचारु बनाता है।

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प्रश्न 4. पैकेजिंग (Packaging) क्या है? लॉजिस्टिक्स में इसका महत्त्व क्या है?

पैकेजिंग वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा वस्तुओं को सुरक्षित रखने, पहचान प्रदान करने और परिवहन में सुविधा देने के लिए उचित आवरण में बंद किया जाता है। यह लॉजिस्टिक्स का अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है क्योंकि वस्तुएँ भंडारण, लोडिंग, अनलोडिंग, परिवहन और वितरण जैसी अनेक अवस्थाओं से गुजरती हैं।

पैकेजिंग का पहला उद्देश्य सुरक्षा है। धक्का, दबाव, नमी, तापमान या कंपन से उत्पाद को नुकसान पहुँच सकता है। उचित पैकेजिंग इन जोखिमों को कम करती है। विशेषकर काँच, इलेक्ट्रॉनिक्स और दवाइयों जैसी वस्तुओं को अतिरिक्त सुरक्षा की आवश्यकता होती है।

दूसरा महत्त्वपूर्ण कार्य सूचना प्रदान करना है। पैकेज पर उत्पाद का नाम, मात्रा, उपयोग विधि, सावधानियाँ, बारकोड आदि दिए जाते हैं, जो उपभोक्ता और लॉजिस्टिक्स कर्मियों दोनों के लिए आवश्यक हैं।

पैकेजिंग हैंडलिंग को आसान बनाती है। समान आकार के बॉक्स, क्रेट्स या कंटेनर वस्तुओं को उठाने, स्टैक करने और स्थानांतरित करने में सुविधा देते हैं। इससे समय और श्रम लागत दोनों कम होती हैं।

लॉजिस्टिक्स में स्वचालन बढ़ने के साथ पैकेजिंग का महत्व और बढ़ गया है, क्योंकि मशीनें मानक पैकेजिंग को अधिक आसानी से पहचान पाती हैं।

इसके अलावा, पैकेजिंग ब्रांडिंग में भी योगदान देती है। आकर्षक पैकेज ग्राहक को उत्पाद खरीदने के लिए प्रेरित करता है।

इस प्रकार, पैकेजिंग सुरक्षा, जानकारी, दक्षता, ब्रांडिंग और ग्राहक संतुष्टि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

प्रश्न 5. लास्ट-माइल डिलीवरी (Last-Mile Delivery) क्या है? इसका महत्त्व बताइए।

लास्ट-माइल डिलीवरी लॉजिस्टिक्स की वह अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है जिसमें उत्पाद को वितरण केंद्र या गोदाम से ग्राहक के घर तक पहुँचाया जाता है। यह वह चरण है जिसमें ग्राहक सीधे सेवा का अनुभव करता है, इसलिए इसे लॉजिस्टिक्स का सबसे संवेदनशील भाग माना जाता है।

लास्ट-माइल डिलीवरी का प्रमुख महत्त्व ग्राहक संतुष्टि से जुड़ा है। समय पर, सुरक्षित और सटीक डिलीवरी मिलने पर ग्राहक कंपनी पर भरोसा करता है और भविष्य में पुनः खरीद करने के लिए प्रेरित होता है।

ई-कॉमर्स के दौर में, जहाँ ग्राहक एक-दो दिनों में डिलीवरी की उम्मीद रखते हैं, लास्ट-माइल डिलीवरी की गति और गुणवत्ता से कंपनी की छवि निर्धारित होती है। यदि डिलीवरी देर से हो या गलत पते पर पहुँचे, तो पूरी सेवा प्रभावित होती है।

यह प्रक्रिया लागत-सघन भी होती है। छोटे पैकेज, विभिन्न स्थानों पर डिलीवरी, ट्रैफिक, और लौटाए गए उत्पाद लागत बढ़ाते हैं। इसलिए कंपनियाँ GPS, रूट ऑप्टिमाइज़ेशन, मोबाइल ऐप्स और ट्रैकिंग सिस्टम का उपयोग करती हैं।

संक्षेप में, लास्ट-माइल डिलीवरी ग्राहक अनुभव, ब्रांड प्रतिष्ठा, सेवा गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धी क्षमता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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प्रश्न 6. परिवहन (Transportation) लॉजिस्टिक्स का महत्वपूर्ण घटक क्यों है? विस्तार से समझाइए।

परिवहन लॉजिस्टिक्स प्रबंधन का सबसे केंद्रिय और अनिवार्य घटक है क्योंकि वस्तुएँ किसी भी व्यवसायिक प्रक्रिया में एक स्थान से दूसरे स्थान तक भौतिक रूप से तभी पहुँच सकती हैं जब परिवहन व्यवस्था प्रभावी हो। आपूर्ति श्रृंखला के प्रत्येक चरण—कच्चे माल की प्राप्ति, उत्पादन इकाई तक पहुँच, तैयार वस्तुओं का बाजार तक वितरण—में परिवहन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

परिवहन का पहला महत्त्व समयबद्धता है। आज के युग में ग्राहक त्वरित सेवा की अपेक्षा रखते हैं। ई–कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म, सुपरमार्केट, औद्योगिक इकाइयाँ सभी निर्भर करती हैं कि वस्तुएँ समय पर उपलब्ध हों। परिवहन में होने वाली थोड़ी भी देरी न केवल उत्पादन को प्रभावित करती है बल्कि ग्राहक असंतोष भी उत्पन्न करती है।

दूसरा महत्त्व लागत नियंत्रण है। प्रभावी परिवहन मार्ग, सही माध्यम का चयन तथा भार संतुलन से कंपनियाँ परिवहन लागत बहुत हद तक कम कर सकती हैं। तेज़ परिवहन का अर्थ यह भी है कि कंपनियों को बड़े भंडार रखने की आवश्यकता नहीं होती, जिससे गोदाम खर्च घटता है।

परिवहन बाजार विस्तार में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। पूर्व में कंपनियाँ केवल स्थानीय बाजारों तक सीमित रहती थीं, लेकिन विकसित परिवहन व्यवस्था के कारण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँचना संभव हो गया है। इससे व्यापार और रोजगार के अवसर बढ़ते हैं।

परिवहन उत्पाद गुणवत्ता संरक्षण में भी महत्वपूर्ण है। कई वस्तुएँ जैसे दवाइयाँ, दूध, सब्ज़ियाँ, मांस आदि ताप-संवेदनशील होती हैं। इनके लिए रेफ्रिजरेटेड ट्रकों और विशेष पैकेजिंग की आवश्यकता होती है। यदि परिवहन उपयुक्त न हो, तो पूरा माल खराब हो सकता है।

तकनीकी उन्नति ने परिवहन को और प्रभावी बनाया है। GPS ट्रैकिंग, रूट ऑप्टिमाइज़ेशन, डिजिटल लॉजिस्टिक्स प्लेटफॉर्म और वास्तविक समय जानकारी से कंपनियाँ अपने परिवहन तंत्र को अधिक कुशल बना पा रही हैं।

अंततः, परिवहन लॉजिस्टिक्स की रीढ़ है क्योंकि यह वस्तुओं के प्रवाह, लागत प्रबंधन, ग्राहक संतुष्टि, उत्पादन निरंतरता और बाजार विस्तार के लिए अत्यंत आवश्यक है।

प्रश्न 7. इन्वेंट्री प्रबंधन (Inventory Management) की भूमिका और महत्त्व समझाइए।

इन्वेंट्री प्रबंधन लॉजिस्टिक्स का एक महत्वपूर्ण भाग है, जो यह सुनिश्चित करता है कि संस्था के पास आवश्यक मात्रा में सामग्री निर्धारित समय पर उपलब्ध रहे। इन्वेंट्री में कच्चा माल, अर्द्धनिर्मित वस्तुएँ, तैयार उत्पाद और स्पेयर पार्ट्स शामिल होते हैं।

इंवेंट्री प्रबंधन का प्रमुख उद्देश्य भंडार संतुलन बनाए रखना है। यदि भंडार बहुत अधिक हो जाए, तो भंडारण लागत, पूँजी अवरोध, खराब होने का खतरा और बीमा लागत बढ़ जाती है। वहीं कम भंडार होने पर उत्पादन रुक सकता है, ग्राहकों को समय पर वितरण नहीं हो पाता और संस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। इसलिए यह आवश्यक है कि उचित मात्रा में स्टॉक उपलब्ध रहे।

इन्वेंट्री प्रबंधन लागत नियंत्रण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। EOQ (Economic Order Quantity), ABC Analysis, JIT (Just-in-Time) और Safety Stock जैसी तकनीकों का प्रयोग करके कंपनियाँ भंडार को वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधित करती हैं। इससे अतिरिक्त खर्च, टूट–फूट और बर्बादी कम होती है।

इन्वेंट्री प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण पहलू गुणवत्ता संरक्षण है। यदि वस्तुएँ गलत वातावरण में रखी जाएँ, जैसे अधिक नमी या तापमान, तो वे खराब हो सकती हैं। अच्छे प्रबंधन से भंडार की गुणवत्ता सुरक्षित रहती है और ग्राहक को बेहतर उत्पाद मिलता है।

यह प्रक्रिया उत्पादन निरंतरता सुनिश्चित करती है। उत्पादन इकाई में कच्चे माल की कमी से उत्पादन रुक जाता है, जिससे संस्था को सीधे लाभ–हानि का सामना करना पड़ता है। सही इन्वेंट्री प्रबंधन उत्पादन चक्र को लगातार चालू रखता है।

इन्वेंट्री प्रबंधन ग्राहक संतुष्टि बढ़ाता है, क्योंकि उत्पाद समय पर उपलब्ध रहता है। वर्तमान प्रतिस्पर्धी बाजार में कंपनियाँ तेजी से ऑर्डर पूरा करने की कोशिश करती हैं, और इसमें इन्वेंट्री की बड़ी भूमिका होती है।

अतः, इन्वेंट्री प्रबंधन केवल भंडारण नियंत्रण नहीं बल्कि लागत बचत, गुणवत्ता संरक्षण, उत्पादन निरंतरता और ग्राहक संतुष्टि का आधार है।

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प्रश्न 8. वेयरहाउसिंग (Warehousing) क्या है? इसके मुख्य कार्यों का वर्णन कीजिए।

वेयरहाउसिंग वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से वस्तुओं को सुरक्षित रूप से तब तक संग्रहीत किया जाता है जब तक उनकी आवश्यकता न हो। गोदाम (Warehouse) किसी भी लॉजिस्टिक्स प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं क्योंकि वे भंडारण, सुरक्षा, वर्गीकरण, पैकेजिंग और वितरण जैसे कई कार्यों को पूरा करते हैं।

वेयरहाउस का पहला कार्य संग्रहण है। उत्पादन और उपभोग का समय अक्सर अलग-अलग होता है, इसलिए वस्तुओं को सुरक्षित रखना आवश्यक होता है। गोदाम वस्तुओं को लंबे समय तक खराब होने से बचाते हैं।

दूसरा प्रमुख कार्य सुरक्षा है। गोदाम वस्तुओं को चोरी, आग, नमी, तापमान परिवर्तन और टूट–फूट जैसे जोखिमों से बचाते हैं। आधुनिक वेयरहाउस में CCTV, तापमान नियंत्रण और अग्निशमन उपकरण लगे होते हैं।

वेयरहाउस वर्गीकरण और छँटाई का भी काम करते हैं। वस्तुओं को आकार, गुणवत्ता, ग्रेड और मांग के अनुसार अलग–अलग भागों में रखा जाता है। इससे वितरण प्रक्रिया तेज होती है।

एक अन्य महत्वपूर्ण कार्य पैकेजिंग और लेबलिंग है। कई बार वस्तुओं को अंतिम वितरण से पहले पुनः पैक या लेबल किया जाता है।

वेयरहाउस वितरण केंद्र के रूप में भी कार्य करते हैं। यहाँ से वस्तुओं को खुदरा विक्रेताओं, डीलरों, या ग्राहकों तक भेजा जाता है। इससे परिवहन दूरी और लागत कम होती है तथा डिलीवरी तेज होती है।

वेयरहाउस मूल्य स्थिरीकरण में भी योगदान देते हैं। जब बाजार में मांग कम होती है, वस्तुएँ गोदाम में रखी जाती हैं और मांग बढ़ने पर उन्हें बाजार में भेजा जाता है, जिससे कीमतों में स्थिरता बनी रहती है।

इस प्रकार, वेयरहाउसिंग भंडारण, सुरक्षा, वितरण और मूल्य संतुलन के माध्यम से लॉजिस्टिक्स को सुचारु और कुशल बनाता है।

प्रश्न 9. पैकेजिंग (Packaging) की अवधारणा और लॉजिस्टिक्स में इसकी भूमिका समझाइए।

पैकेजिंग वह प्रक्रिया है जिसमें वस्तुओं को सुरक्षित रखने, संभालने, परिवहन करने और बेचने के लिए उचित सामग्री में बंद किया जाता है। पैकेजिंग सिर्फ साँचा नहीं बल्कि सुरक्षा, पहचान, आकर्षण और सुविधा प्रदान करने वाला संपूर्ण तंत्र है। लॉजिस्टिक्स में पैकेजिंग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि वस्तुएँ कई चरणों—भंडारण, लोडिंग-अनलोडिंग, परिवहन और अंतिम वितरण—से गुजरती हैं।

पैकेजिंग का पहला और प्रमुख उद्देश्य उत्पाद सुरक्षा है। परिवहन के दौरान धक्का, कंपन, नमी, तापमान परिवर्तन और दबाव से उत्पाद खराब हो सकता है। उचित पैकेजिंग इन जोखिमों को कम करती है। विशेषकर नाजुक व इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के लिए कुशनिंग और झटके-रोधी पैकिंग आवश्यक होती है।

दूसरा महत्वपूर्ण कार्य सूचना प्रदान करना है। पैकेज पर लेबलिंग में उत्पाद का नाम, निर्माण तिथि, उपयोग विधि, चेतावनी, बारकोड आदि होते हैं, जिससे ग्राहक और लॉजिस्टिक्स कर्मचारी दोनों को सहायता मिलती है।

पैकेजिंग हैंडलिंग को भी आसान बनाती है। मानकीकृत आकार वाली पैकेजिंग से वस्तुओं को स्टैक, लोड और अनलोड करना आसान होता है। इससे समय, श्रम और लागत कम होती है।

लॉजिस्टिक्स के स्वचालन में पैकेजिंग का योगदान और बढ़ गया है। मशीनें मानकीकृत बॉक्सों को पहचानकर उन्हें तेज गति से छाँट सकती हैं।

साथ ही, पैकेजिंग ब्रांडिंग और मार्केटिंग का भी साधन है। आकर्षक पैकेज ग्राहकों का ध्यान खींचता है और उत्पाद के मूल्य को बढ़ाता है।

अंततः, पैकेजिंग उत्पाद को सुरक्षित रखने, हैंडलिंग आसान बनाने, सूचना प्रदान करने, ब्रांडिंग और ग्राहक संतुष्टि बढ़ाने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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प्रश्न 10. लास्ट-माइल डिलीवरी (Last-Mile Delivery) क्या है? इसका महत्त्व विस्तार से समझाइए।

लास्ट-माइल डिलीवरी लॉजिस्टिक्स प्रक्रिया का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चरण है, जिसमें उत्पाद को गोदाम, वितरण केंद्र या स्थानीय हब से ग्राहक के घर या कार्यालय तक पहुँचाया जाता है। यह चरण कंपनी और ग्राहक के बीच सीधा संपर्क स्थापित करता है, इसलिए इसे लॉजिस्टिक्स की सबसे संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण कड़ी माना जाता है।

लास्ट-माइल डिलीवरी का सबसे बड़ा महत्त्व ग्राहक संतुष्टि है। ग्राहक आमतौर पर उत्पाद प्राप्त होने के अनुभव के आधार पर कंपनी की सेवा का मूल्यांकन करते हैं। यदि डिलीवरी तेज, सुरक्षित और सही समय पर हो, तो ग्राहक कंपनी के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखता है और दोबारा खरीदारी करता है।

दूसरा महत्त्व ब्रांड प्रतिष्ठा है। चाहे उत्पाद कितना भी अच्छा हो, यदि डिलीवरी खराब हो, देर से पहुंचे या गलत व्यक्ति को दे दी जाए, तो ग्राहक का विश्वास टूट जाता है। इसलिए कंपनियाँ इस चरण में विशेष ध्यान देती हैं।

लास्ट-माइल डिलीवरी लागत-सघन होती है। एक–एक ग्राहक तक छोटे–छोटे पार्सल पहुँचाना खर्चीला होता है। ट्रैफिक जाम, दूरस्थ स्थान, पता भ्रम, मौसम और रिटर्न (Return) जैसी चुनौतियाँ लागत और समय दोनों बढ़ाती हैं।

इन्हें सुधारने के लिए कंपनियाँ GPS, रूट ऑप्टिमाइज़ेशन सॉफ़्टवेयर, रियल-टाइम ट्रैकिंग, इलेक्ट्रिक डिलीवरी वाहनों और माइक्रो-फुलफिलमेंट सेंटर जैसे आधुनिक तकनीकों का प्रयोग करती हैं।

ई–कॉमर्स के तेजी से बढ़ते बाजार में लास्ट-माइल डिलीवरी ही ग्राहकों को तेज, विश्वसनीय और सुविधाजनक सेवा प्रदान करने का आधार बन गई है।

इस प्रकार, लास्ट-माइल डिलीवरी लॉजिस्टिक्स की सफलता, ग्राहक अनुभव, ब्रांड छवि और प्रतिस्पर्धात्मक लाभ के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

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