IGNOU FREE BHDAE-182 हिन्दी भाषा और संप्रेषण Solved Guess Paper With Imp Questions 2025

IGNOU FREE BHDAE-182 हिन्दी भाषा और संप्रेषण Solved Guess Paper 2025

Q1. संप्रेषण (Communication) क्या है? इसकी परिभाषा, प्रकार और महत्त्व स्पष्ट कीजिए।

संप्रेषण वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से व्यक्ति अपने विचार, भावनाएँ, सूचनाएँ, अनुभव और संदेश दूसरे तक पहुँचाता है। यह मानव जीवन की मूलभूत आवश्यकता है, क्योंकि समाज में रहने वाला हर व्यक्ति निरंतर संवाद करता है। संप्रेषण मौखिक, लिखित, सांकेतिक और दृश्य सभी रूपों में हो सकता है। इसका उद्देश्य समझ, सहयोग और संबंध स्थापित करना है।

संप्रेषण को दो प्रमुख भागों में बाँटा जाता है—मौखिक (Verbal) और गैर-मौखिक (Non-Verbal)। मौखिक संप्रेषण में भाषा का उपयोग होता है; जैसे भाषण, बातचीत, वार्तालाप, फोन पर संवाद आदि। लिखित संप्रेषण में पत्र, ई-मेल, नोटिस, रिपोर्ट, आवेदन आदि आते हैं। गैर-मौखिक संप्रेषण में हाव-भाव, चेहरे के भाव, आँखों का संपर्क, शारीरिक मुद्रा, आवाज़ का उतार-चढ़ाव आदि शामिल होते हैं। कई बार गैर-मौखिक संप्रेषण मौखिक संदेश से ज़्यादा प्रभावी होता है।

संप्रेषण के महत्त्व की दृष्टि से देखा जाए तो यह हर क्षेत्र का आधार है—शिक्षा, प्रशासन, व्यापार, मीडिया, राजनीति, परिवार और समाज। प्रभावी संप्रेषण से विचारों का आदान-प्रदान सरल होता है, निर्णय लेने में सुविधा मिलती है और गलतफहमियाँ कम होती हैं। कार्यस्थल पर यह टीमवर्क, संगठनात्मक विकास और नेतृत्व क्षमता को सशक्त बनाता है। सामाजिक संबंधों में संवाद ही विश्वास, प्रेम और सहयोग का माध्यम है।

इस प्रकार संप्रेषण व्यक्तियों को जोड़ने और समाज को व्यवस्थित रखने वाली एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। प्रभावी संप्रेषण के बिना किसी भी क्षेत्र में सफलता संभव नहीं होती।

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Q2. भाषा क्या है? भाषा के कार्य एवं महत्त्व स्पष्ट कीजिए।

भाषा अभिव्यक्ति का माध्यम है जिसके द्वारा हम अपने विचार, भावनाएँ और अनुभूतियाँ व्यक्त करते हैं। भाषा मनुष्य को अन्य जीवों से अलग करती है, क्योंकि यह केवल भाषण नहीं बल्कि चिन्तन, समझ और सामाजिक संबंधों की आधारशिला है।

भाषा के मुख्य कार्य हैं—

  1. अभिव्यक्ति का कार्य – भाषा हमें सोचने, बोलने और लिखने की शक्ति देती है।

  2. संचार का कार्य – भाषा लोगों के बीच संवाद स्थापित करती है।

  3. सामाजिक एकता का कार्य – भाषा संस्कृति, परंपरा और समाज को जोड़ती है।

  4. विचार-विकास का कार्य – भाषा ज्ञान अर्जन और बौद्धिक विकास का साधन है।

  5. प्रेरणा का कार्य – भाषा प्रेरित करती है, उत्साहित करती है और मूल्य स्थापित करती है।

भाषा का महत्त्व अत्यधिक है। यह शिक्षण–अधिगम, साहित्य, प्रशासन, मीडिया, विज्ञान, व्यापार सभी क्षेत्रों की आधारशिला है। भाषा व्यक्तित्व निर्माण में सहायक है—अच्छी भाषा क्षमता व्यक्ति को आत्मविश्वासी, प्रभावशाली और सफल बनाती है।

सामाजिक स्तर पर भाषा संस्कृति को संरक्षित करती है तथा नागरिकों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। राष्ट्र निर्माण में भाषा एकता, सहयोग और साझा पहचान के रूप में कार्य करती है। अतः भाषा केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं बल्कि मानव सभ्यता का आधार है।

Q3. हिंदी भाषा की विशेषताएँ स्पष्ट कीजिए।

हिंदी भाषा भारतीय भाषाओं में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। इसकी कई विशिष्ट विशेषताएँ हैं जो इसे सरल, सुगम और लोकप्रिय बनाती हैं।

सबसे पहली विशेषता है ध्वन्यात्मकता—हिंदी भाषा वैसा ही लिखा जाता है जैसा बोला जाता है। इससे सीखना सरल हो जाता है। हिंदी में स्वर और व्यंजनों का वैज्ञानिक क्रम पाया जाता है। इसके अतिरिक्त, हिंदी समृद्ध शब्दावली वाली भाषा है जिसमें संस्कृत, अरबी, फ़ारसी, उर्दू, अंग्रेज़ी आदि भाषाओं के शब्द सम्मिलित हैं, जिससे यह और अधिक लचीली बनती है।

हिंदी की एक और विशेषता है सुगठित व्याकरण। इसमें संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया, विशेषण आदि का स्पष्ट और व्यवस्थित व्याकरणिक ढाँचा है। हिंदी का वाक्य-विन्यास सरल और सीधा होता है, जिससे अभिव्यक्ति प्रभावी बनती है।

सांस्कृतिक विविधता भी हिंदी की महत्त्वपूर्ण विशेषता है। यह अनेक बोलियों—ब्रज, अवधी, भोजपुरी, हरियाणवी, मराठी बोली, राजस्थानी आदि—से मिलकर बनी है। यह भारतीय समाज की विविधता और सांस्कृतिक एकता को दर्शाती है।

हिंदी की विशेषता उसके भावात्मक और साहित्यिक सौंदर्य में भी है। हिंदी साहित्य में कविता, कहानी, उपन्यास, नाटक, निबंध, आलोचना आदि सभी विधाएँ अत्यंत समृद्ध हैं।

अंततः, हिंदी एक जीवंत भाषा है जो समय के साथ बदलती रहती है और नई परिस्थितियों के अनुकूल होती जाती है।

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Q4. संप्रेषण की प्रक्रिया (Communication Process) का वर्णन कीजिए।

संप्रेषण प्रक्रिया वह चरणबद्ध क्रम है जिसमें संदेश एक व्यक्ति से दूसरे तक पहुँचता है। इस प्रक्रिया में मुख्यतः आठ तत्व शामिल हैं—प्रेषक, संदेश, कूटलेखन, माध्यम, प्राप्तकर्ता, डिकोडिंग, प्रतिक्रिया (Feedback) और व्यवधान (Noise)

प्रेषक वह व्यक्ति है जो विचार या सूचना को संदेश के रूप में भेजता है। संदेश वह विषयवस्तु है जिसे भेजा जाना है। कूटलेखन का अर्थ है विचारों को शब्दों, संकेतों या प्रतीकों में बदलना। इसके बाद संदेश किसी माध्यम—जैसे बोलकर, लिखकर, फोन, ई-मेल, सोशल मीडिया या संकेतों के द्वारा—भेजा जाता है।

प्राप्तकर्ता संदेश को प्राप्त करता है और उसका डिकोडिंग करता है अर्थात संदेश को समझने की कोशिश करता है। उसके बाद प्राप्तकर्ता प्रतिक्रिया देता है, जिससे प्रेषक को पता चलता है कि संदेश सही समझा गया या नहीं।

व्यवधान (नॉइज़) इस प्रक्रिया को प्रभावित करता है, जैसे भाषा का अंतर, शोर, गलत समझ, तकनीकी खराबी, भावनात्मक तनाव आदि।

संप्रेषण प्रक्रिया तभी सफल होती है जब संदेश स्पष्ट, सही, उपयुक्त माध्यम से और समझने योग्य रूप में भेजा जाए।

Q5. मौखिक संप्रेषण (Oral Communication) क्या है? इसके लाभ और सीमाएँ बताइए।

मौखिक संप्रेषण वह प्रक्रिया है जिसमें संदेश बोलकर व्यक्त किया जाता है। यह संप्रेषण का सबसे प्राचीन और प्रभावी माध्यम है। वार्तालाप, भाषण, बैठक, फोन कॉल, साक्षात्कार आदि इसके उदाहरण हैं।

इसके लाभ हैं—

  1. त्वरित संप्रेषण—उत्तर तुरंत मिलता है।

  2. लचीलापन—स्थिति के अनुसार भाषा, स्वर और भाव बदल सकते हैं।

  3. व्यक्तिगत स्पर्श—हावभाव और आवाज़ संदेश को प्रभावी बनाते हैं।

  4. समस्या समाधान में सहायक—सीधी बातचीत से गलतफहमियाँ दूर होती हैं।

सीमाएँ—

  1. दस्तावेज़ी प्रमाण नहीं—बातें बाद में प्रमाणित नहीं होतीं।

  2. गलत समझ का खतरा—स्वर या शब्दों की गलत व्याख्या हो सकती है।

  3. भावनाओं का प्रभाव—गुस्सा या तनाव प्रभाव डाल सकता है।

  4. दूरी की बाधा—सामना-सामना बातचीत हमेशा संभव नहीं।

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Q6. लिखित संप्रेषण (Written Communication) की विशेषताएँ और महत्त्व स्पष्ट कीजिए।

लिखित संप्रेषण वह माध्यम है जिसमें संदेश लिखकर भेजा जाता है, जैसे पत्र, ई-मेल, रिपोर्ट, नोटिस, आवेदन, लेख आदि।

इसकी विशेषताएँ हैं—

  1. दस्तावेज़ी प्रमाण—लिखित संदेश सुरक्षित रहता है।

  2. स्पष्टता और सटीकता—भाषा सोच-समझकर लिखी जाती है।

  3. व्यापक पहुँच—एक साथ कई लोगों को भेजा जा सकता है।

  4. स्थायित्व—भविष्य में संदर्भ के लिए उपयोगी होता है।

लिखित संप्रेषण का महत्त्व शिक्षा, प्रशासन, व्यापार और न्यायिक कार्यों में अत्यधिक है। यह विश्वसनीय, औपचारिक और पेशेवर संप्रेषण का मुख्य साधन है।

Q7. हिंदी भाषा और मीडिया का संबंध स्पष्ट कीजिए।

हिंदी भाषा का भारतीय मीडिया से अत्यंत गहरा, व्यापक और ऐतिहासिक संबंध है। भारत एक बहुभाषी देश है, फिर भी हिंदी सबसे अधिक बोली और समझी जाने वाली भाषा है। इसी कारण मीडिया के लगभग सभी क्षेत्रों—समाचारपत्र, टेलीविजन, रेडियो, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म और सोशल मीडिया—में हिंदी का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। हिंदी बोलने–समझने वाले लोगों की संख्या बहुत अधिक होने के कारण मीडिया संस्थान अपने दर्शकों, पाठकों और श्रोताओं तक अधिक प्रभावशाली ढंग से पहुँचने के लिए हिंदी को प्राथमिक भाषा बनाते हैं।

मीडिया में हिंदी की स्वीकार्यता का सबसे बड़ा कारण इसकी सरलता, सहजता और संवादात्मक प्रकृति है। हिंदी वह भाषा है जिसमें आम जन सामान्य रूप से सोचते और बातचीत करते हैं, इसलिए मीडिया संदेश भी इसी भाषा में अधिक प्रभावशाली होते हैं। समाचार लेखन, रिपोर्टिंग, एंकरिंग, टीवी शो, रेडियो कार्यक्रम, वेब लेखन, यूट्यूब कंटेंट, सोशल मीडिया पोस्ट—सभी में हिंदी का उपयोग यह साबित करता है कि यह भाषा जनसंचार की सबसे महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है।

हिंदी मीडिया का एक प्रमुख योगदान सूचना प्रसार में देखा जा सकता है। हिंदी समाचारपत्र और टीवी चैनल देश के हर क्षेत्र—शहर, गाँव, कस्बा—तक सूचनाएँ पहुँचाते हैं। ग्रामीण क्षेत्र, जहाँ अंग्रेज़ी की पहुँच सीमित है, वहाँ हिंदी मीडिया जनता से सीधा संबंध बनाता है। हिंदी की पहुँच के कारण लोग राजनीति, अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, शिक्षा, मौसम, और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी आसानी से प्राप्त कर पाते हैं।

इसके अलावा, हिंदी मीडिया जनमत निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मीडिया केवल सूचनाएँ नहीं देता, बल्कि समाज को सोचने, समझने और निर्णय लेने के लिए दिशा प्रदान करता है। टीवी बहसें, संपादकीय लेख, सोशल मीडिया चर्चाएँ—ये सभी जनता की राय को प्रभावित करते हैं। हिंदी में प्रस्तुत समाचार अधिक लोगों तक पहुँचते हैं, इसलिए सामाजिक मुद्दों पर जनचेतना जागृत करने में यह भाषा विशेष प्रभाव डालती है।

समकालीन समय में डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग ने हिंदी को और अधिक लोकप्रिय बना दिया है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, ब्लॉगिंग और पॉडकास्टिंग जैसे माध्यमों पर हिंदी सामग्री की माँग तेजी से बढ़ी है क्योंकि लोग अपनी मातृभाषा में जानकारी प्राप्त करना और अपने विचार साझा करना पसंद करते हैं। हिंदी कंटेंट क्रिएटर्स की संख्या बढ़ना भी इसका प्रमाण है।

अन्ततः कहा जा सकता है कि हिंदी न केवल मीडिया की भाषा है, बल्कि मीडिया और समाज के बीच सेतु का कार्य भी करती है। यह लोगों को जोड़ती है, सूचनाएँ पहुंचाती है, विचार निर्माण करती है और सामाजिक परिवर्तन में सक्रिय भूमिका निभाती है।

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Q8. संप्रेषण में भाषा-शैली (Language Style) का महत्त्व स्पष्ट कीजिए।

भाषा-शैली वह विशिष्ट तरीका है जिसके माध्यम से हम भाषा का प्रयोग करते हैं। यह केवल शब्दों का चयन नहीं होती, बल्कि वाक्य विन्यास, अभिव्यक्ति के स्वर, भाव और संदर्भ पर आधारित होती है। किसी भी संप्रेषण की प्रभावशीलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि संदेश किस भाषा-शैली में प्रस्तुत किया गया है। उचित भाषा-शैली का प्रयोग संदेश को स्पष्ट, अर्थपूर्ण और प्रभावशाली बनाता है।

भाषा-शैली हमेशा एक जैसी नहीं होती; यह परिस्थितियों, श्रोताओं, उद्देश्य और माध्यम के अनुसार बदलती रहती है। उदाहरण के लिए, जब हम किसी आम व्यक्ति से बातचीत करते हैं तो सरल और सहज शैली का उपयोग करते हैं। सरल शैली में छोटे वाक्य, आम शब्द और सीधी अभिव्यक्ति होती है, इसलिए यह आम जनता के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है।

इसके विपरीत, प्रशासनिक, कानूनी और व्यावसायिक संप्रेषण में औपचारिक भाषा-शैली की आवश्यकता होती है। इस शैली में गंभीरता, शुद्ध व्याकरण, तकनीकी शब्दावली और स्पष्टता का विशेष महत्व होता है। औपचारिक शैली संदेश को विश्वसनीय और पेशेवर बनाती है।

साहित्यिक भाषा-शैली भावनात्मक, सौंदर्यपूर्ण और कलात्मक अभिव्यक्ति पर आधारित होती है। इसमें अलंकार, कल्पना और सांस्कृतिक संकेतों का प्रयोग अधिक होता है। यह शैली कविता, कहानी, नाटक और निबंध जैसी साहित्यिक विधाओं में प्रयोग होती है और पाठक के मन पर गहरा प्रभाव छोड़ती है।

भाषा-शैली का सही चुनाव संप्रेषण की सफलता में निर्णायक भूमिका निभाता है। यदि शैली संदर्भ के अनुरूप न हो, तो संदेश का अर्थ गलत समझा जा सकता है। इसलिए प्रभावी संप्रेषण हेतु यह आवश्यक है कि भाषा-शैली श्रोता की समझ, स्थिति की गंभीरता और संप्रेषण के उद्देश्य के अनुसार चुनी जाए।

संक्षेप में, उपयुक्त भाषा-शैली संप्रेषण को न केवल स्पष्ट और समझने योग्य बनाती है, बल्कि उसे आकर्षक और प्रभावशाली भी बनाती है।

Q9. संप्रेषण में बाधाएँ (Barriers) क्या हैं? उदाहरण सहित समझाइए।

संप्रेषण में बाधाएँ वे तत्व या परिस्थितियाँ हैं जो संदेश के सही और प्रभावी आदान-प्रदान में रुकावट उत्पन्न करती हैं। जब संप्रेषण में बाधाएँ उपस्थित होती हैं, तो संदेश या तो गलत तरीके से समझा जाता है या बिल्कुल भी प्राप्त नहीं हो पाता। ये बाधाएँ विभिन्न प्रकार की हो सकती हैं, जैसे भाषाई, मनोवैज्ञानिक, भौतिक, तकनीकी और सामाजिक।

भाषाई बाधाएँ तब उत्पन्न होती हैं जब प्रेषक और प्राप्तकर्ता की भाषा, शब्दावली या व्याकरणिक समझ अलग-अलग होती है। ऐसे मामलों में संदेश सही रूप से नहीं पहुँच पाता।
भावनात्मक बाधाएँ भी संप्रेषण को प्रभावित करती हैं। तनाव, गुस्सा, डर या असुरक्षा की भावना व्यक्ति की समझने और सुनने की क्षमता को कम कर देती है।
भौतिक बाधाएँ—जैसे शोर, दूरी, कमजोर इंटरनेट संकेत, या खराब उपकरण—संदेश को स्पष्ट रूप से पहुँचने नहीं देते।
पूर्वाग्रह और धारणाएँ भी एक प्रमुख बाधा हैं। यदि कोई व्यक्ति पहले से ही किसी विचार या व्यक्ति के प्रति नकारात्मक धारणा रखता है, तो वह संदेश को निष्पक्ष रूप से नहीं समझ पाता।
इसके अलावा, अस्पष्ट भाषा, लंबे वाक्य, असंगत विचार या गलत जानकारी भी संप्रेषण को प्रभावित करती हैं।

उदाहरण के रूप में, शोरगुल वाली जगह में बातचीत करना कठिन होता है क्योंकि आवाज़ ठीक से सुनाई नहीं देती—यह भौतिक बाधा है। यदि कोई व्यक्ति क्रोध में है, तो वह सामने वाले की बात का अर्थ गलत निकाल सकता है—यह भावनात्मक बाधा है। इसी प्रकार, यदि दो लोग भिन्न भाषाएँ बोलते हैं, तो प्रभावी संवाद संभव नहीं हो पाता—यह भाषाई बाधा है।

इन बाधाओं को दूर करने के लिए आवश्यक है कि संदेश स्पष्ट, सरल और समझने योग्य भाषा में दिया जाए। उपयुक्त माध्यम का चयन, धैर्यपूर्वक सुनना, सही समय का चुनाव, और प्रतिक्रिया प्राप्त करना संप्रेषण को अधिक प्रभावी बनाते हैं। सक्रिय सुनना, सहानुभूति और खुले मन से बातचीत इन बाधाओं को काफी हद तक कम कर देते हैं।

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Q10. संप्रेषण और समाज के संबंध स्पष्ट कीजिए।

संप्रेषण किसी भी समाज की बुनियाद है। समाज मनुष्यों का समूह है, और मनुष्य आपसी संबंधों, सहयोग और समझ के माध्यम से ही एक संगठित रूप में रह पाता है। इन संबंधों को स्थापित, बनाए रखने और विकसित करने का मुख्य साधन संप्रेषण है। यदि संप्रेषण न हो, तो न संबंध बन सकेंगे, न ही कोई सामाजिक संरचना कायम रह पाएगी। इसलिए परिवार, विद्यालय, कार्यालय, प्रशासन, राजनीति और व्यापार जैसे हर सामाजिक तंत्र में संप्रेषण अत्यंत आवश्यक है।

संप्रेषण केवल संदेशों का आदान–प्रदान नहीं है, बल्कि यह समाज की सांस्कृतिक और वैचारिक नींव को भी मजबूत करता है। सामाजिक मान्यताएँ, परंपराएँ, नैतिक मूल्य, जीवनशैली और ज्ञान—ये सब एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक संप्रेषण के माध्यम से पहुँचते हैं। भाषा, प्रतीक, हावभाव, मीडिया, साहित्य और शिक्षा—ये सभी संप्रेषण के उपकरण बनकर समाज के स्थायित्व और विकास में योगदान करते हैं।

समाज में सहयोग और एकता भी संप्रेषण पर निर्भर करती है। जब लोग एक-दूसरे को समझते हैं, अपनी भावनाएँ साझा करते हैं और मिलकर कार्य करते हैं, तभी सामाजिक सौहार्द कायम रहता है। संप्रेषण संवाद को बढ़ावा देता है, विवादों का समाधान करता है और समाज में विश्वास का निर्माण करता है।

सार्वजनिक नेतृत्व और प्रशासन भी संप्रेषण की ही देन हैं। नेता जनता से संवाद करके नीतियाँ बनाते हैं, समस्याएँ समझते हैं और समाधान प्रस्तुत करते हैं। जनमत का निर्माण भी संप्रेषण से होता है—समाचार चैनल, रेडियो, अखबार और सोशल मीडिया समाज की सोच को प्रभावित करते हैं और जागरूकता फैलाते हैं।

सामाजिक सुधार, परिवर्तन और जागरण—ये भी संप्रेषण की प्रभावशाली भूमिका से संभव होते हैं। इतिहास गवाह है कि किसी भी सामाजिक आंदोलन की शुरुआत संवाद, विचार-विमर्श और संदेश प्रसार से ही होती है।

इस प्रकार संप्रेषण समाज को जोड़ने, सुधारने, विकसित करने और आगे बढ़ाने वाला सबसे शक्तिशाली साधन है।

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