IGNOU FREE BECS-184 आंकड़ों का विश्लेषण Solved Guess Paper With 2025
Q1. सांख्यिकी (Statistics) का अर्थ, क्षेत्र और डेटा विश्लेषण में इसकी भूमिका समझाइए।
सांख्यिकी वह शास्त्र है जिसके माध्यम से हम आंकड़ों का संग्रहण, वर्गीकरण, प्रस्तुति, विश्लेषण तथा व्याख्या करते हैं। यह विज्ञान एवं कला दोनों का मिश्रण है। सांख्यिकी का उपयोग जटिल और बड़े आँकड़ों को सरल, अर्थपूर्ण और उपयोगी रूप में परिवर्तित करने के लिए किया जाता है। इसका क्षेत्र (Scope) अत्यंत व्यापक है जिसमें वर्णनात्मक सांख्यिकी (Descriptive Statistics) और अनुमानात्मक सांख्यिकी (Inferential Statistics) दोनों शामिल हैं।
वर्णनात्मक सांख्यिकी में औसत, माध्यिका, बहुलक, प्रसरण, ग्राफ, तालिकाएँ आदि आते हैं, जिनका उद्देश्य आँकड़ों का सार प्रस्तुत करना होता है। अनुमानात्मक सांख्यिकी के अंतर्गत सैंपलिंग, परिकल्पना परीक्षण, प्रतिगमन, सहसंबंध आदि आते हैं, जहाँ हम नमूने के आधार पर संपूर्ण जनसंख्या के बारे में निष्कर्ष निकालते हैं।
डेटा विश्लेषण में सांख्यिकी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। सबसे पहले, सांख्यिकी उपयुक्त स्रोतों और विधियों का चयन कर डेटा के संग्रहण में मदद करती है। उसके बाद यह डेटा को सार्थक रूप से संगठित और प्रस्तुत करने में मदद करती है, जैसे तालिकाएँ, चार्ट, ग्राफ आदि। यह डेटा की केंद्रीय प्रवृत्ति और प्रसरण को मापकर डेटा की प्रकृति बताती है। आगे, सांख्यिकीय विधियाँ हमें दो या अधिक चर के बीच संबंध (Correlation), प्रभाव (Regression Effect) और रुझान (Trend) समझने में सक्षम बनाती हैं।
सांख्यिकी वैज्ञानिक निर्णय लेने में भी सहायक होती है। व्यवसाय, अर्थशास्त्र, शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य और सामाजिक अनुसंधान सहित लगभग हर क्षेत्र में सांख्यिकी का प्रयोग किया जाता है। यह शोधकर्ताओं को निष्पक्ष, सटीक और प्रमाणिक निष्कर्ष निकालने में मदद करती है।
सारतः सांख्यिकी डेटा विश्लेषण की नींव है और बिना इसके किसी भी शोध, योजना या नीतिगत निर्णय को वैज्ञानिक ढंग से नहीं लिया जा सकता।
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Q2. केंद्रीय प्रवृत्ति (Central Tendency) के मापों का वर्णन कीजिए—औसत, माध्यिका और बहुलक।
केंद्रीय प्रवृत्ति के माप वे सांख्यिकीय मान हैं जो किसी आँकड़ा–समूह के केंद्र या विशिष्ट मान को दर्शाते हैं। मुख्य तीन माप हैं—औसत (Mean), माध्यिका (Median) और बहुलक (Mode)।
औसत (Mean) सबसे सामान्य और व्यापक रूप से उपयोग किया जाने वाला माप है। इसे सभी प्रेक्षणों के योग को प्रेक्षणों की संख्या से विभाजित कर प्राप्त किया जाता है। औसत गणितीय रूप से सरल, स्थिर और कई सांख्यिकीय सूत्रों में प्रयुक्त होता है, परंतु यह अतिमूल्यों (Extreme Values) से प्रभावित होता है। उदाहरण के लिए, आय वितरण में बहुत अधिक आय वाले लोगों के कारण औसत वास्तविक स्थिति नहीं दर्शा पाता।
माध्यिका (Median) वह मान है जो डेटा को दो बराबर हिस्सों में विभाजित करता है। अर्थात आधा डेटा इसके नीचे और आधा इसके ऊपर होता है। यदि प्रेक्षण संख्या विषम है तो मध्य मान माध्यिका होता है, और सम संख्या होने पर दो मध्य मूल्यों का औसत लिया जाता है। माध्यिका अतिमूल्यों से प्रभावित नहीं होती, इसलिए असमान वितरण वाले आँकड़ों में यह अधिक उपयुक्त होती है।
बहुलक (Mode) वह मान है जो डेटा में सर्वाधिक बार प्रकट होता है। यह नाममात्र (Nominal) या श्रेणीबद्ध (Categorical) डेटा में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जैसे सर्वाधिक पसंद किया गया उत्पाद। बहुलक वितरण के स्वरूप को भी दर्शाता है—एक बहुलक वाला (Unimodal), द्वि–बहुलक (Bimodal) आदि।
इन तीनों मापों का उपयोग उनके उद्देश्य और डेटा के प्रकार पर निर्भर करता है। जहाँ औसत गणितीय विश्लेषण के लिए उपयोगी है, वहीं माध्यिका असमान वितरण में उपयुक्त होती है, और बहुलक सर्वाधिक बार आने वाले मान की पहचान करता है। इसके माध्यम से डेटा का बेहतर और संपूर्ण सार प्राप्त किया जा सकता है।
Q3. प्रसरण (Dispersion) की अवधारणा समझाइए। परास, चतुर्थक विचलन और मानक विचलन का वर्णन कीजिए।
प्रसरण वह माप है जो बताता है कि आँकड़े अपने केंद्रीय मान के आसपास कितने फैले हुए हैं। यदि डेटा अधिक बिखरा हुआ है, तो प्रसरण अधिक होगा। प्रसरण, डेटा की स्थिरता, विश्वसनीयता और भिन्नता को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
परास (Range) प्रसरण का सबसे सरल माप है। यह अधिकतम और न्यूनतम मान के अंतर के बराबर होता है। परास निकालना आसान है लेकिन यह अतिमूल्यों से अत्यधिक प्रभावित होता है। इसलिए इसका उपयोग प्राथमिक विश्लेषण में किया जाता है।
चतुर्थक विचलन (Quartile Deviation) वितरण के मध्य 50% भाग के प्रसरण को दर्शाता है। इसे तीसरे चतुर्थक (Q3) और पहले चतुर्थक (Q1) के अंतर को 2 से विभाजित कर प्राप्त किया जाता है:
QD = (Q3 – Q1) / 2
चूँकि यह बीच के मानों पर आधारित होता है, अतः यह परास की तुलना में अधिक विश्वसनीय होता है। यह असमान या असममित वितरण वाले डेटा में काफी उपयोगी है।
मानक विचलन (Standard Deviation) प्रसरण का सबसे महत्वपूर्ण माप है। यह बताता है कि प्रत्येक प्रेक्षण औसत से कितनी दूरी पर है। इसकी गणना प्रत्येक विचलन के वर्ग लेकर उनके औसत का वर्गमूल निकालकर की जाती है। कम मानक विचलन का अर्थ है कि डेटा औसत के निकट है; अधिक मानक विचलन अधिक बिखराव को दर्शाता है।
मानक विचलन वैज्ञानिक अनुसंधान, अर्थशास्त्र, सामाजिक अध्ययन, और वित्त आदि में अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सभी प्रेक्षणों को ध्यान में रखता है और कई सांख्यिकीय तकनीकों—जैसे प्रतिगमन, सहसंबंध और सामान्य वितरण—की नींव है।
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Q4. आँकड़ों के संग्रहण के प्रमुख तरीकों का वर्णन कीजिए।
आँकड़ों का संग्रहण किसी भी शोध या विश्लेषण की प्रथम और महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। संग्रहण दो प्रकार का होता है—प्राथमिक डेटा और द्वितीयक डेटा।
प्राथमिक डेटा प्रत्यक्ष रूप से स्रोत से एकत्र किए जाते हैं। इसके तरीके हैं—
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पर्यवेक्षण (Observation) : शोधकर्ता गतिविधियों को स्वयं देखकर डेटा एकत्र करता है, जैसे बाजार में उपभोक्ता व्यवहार।
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साक्षात्कार (Interview) : व्यक्तिगत, टेलीफोनिक या ऑनलाइन बातचीत के माध्यम से जानकारी प्राप्त की जाती है।
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प्रश्नावली (Questionnaire) : लिखित प्रश्नों का एक सेट, जिसे प्रतिभागियों द्वारा भरा जाता है।
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प्रयोग (Experiment) : नियंत्रित परिस्थितियों में परीक्षण करना, जैसे वैज्ञानिक अनुसंधान।
द्वितीयक डेटा वे होते हैं जो पहले से उपलब्ध स्रोतों से लिए जाते हैं—सरकारी रिपोर्ट, शोध पत्र, वेबसाइटें, जनगणना, सांख्यिकीय पुस्तिकाएँ आदि।
प्राथमिक डेटा अधिक सटीक होते हैं, जबकि द्वितीयक डेटा कम लागत और समय में मिल जाते हैं।
Q5. आवृत्ति वितरण (Frequency Distribution) क्या है? इसके प्रकार और उपयोग समझाइए।
आवृत्ति वितरण एक ऐसी सांख्यिकीय सारणी है जिसमें डेटा को विभिन्न वर्गों (Classes) में बाँटकर यह बताया जाता है कि प्रत्येक वर्ग में कितनी बार प्रेक्षण आते हैं।
इसके प्रकार—
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असमूहित आवृत्ति वितरण—प्रत्येक मान अलग–अलग सूचीबद्ध होता है।
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समूहित आवृत्ति वितरण—मानों को वर्गांतरों (Class Intervals) में बाँटा जाता है।
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संचयी आवृत्ति वितरण—‘कम से कम’ या ‘अधिक से अधिक’ प्रकार की आवृत्ति।
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सापेक्ष आवृत्ति वितरण—कुल आवृत्ति में से प्रतिशत के रूप में आवृत्ति।
आवृत्ति वितरण बड़े डेटा को सरल रूप में प्रस्तुत करता है और ग्राफ जैसे—हिस्टोग्राम, ओजाइव—की आधारशिला है।
Q6. आँकड़ों की ग्राफीय प्रस्तुति क्या है? इसके प्रमुख प्रकार बताइए।
ग्राफीय प्रस्तुति वह तकनीक है जिसमें संख्यात्मक डेटा को चित्रात्मक रूप दिया जाता है ताकि उसे आसानी से समझा जा सके। इसके प्रकार हैं—
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बार चार्ट : श्रेणीबद्ध डेटा की तुलना हेतु।
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पाई चार्ट : प्रतिशत वितरण प्रदर्शित करने हेतु।
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हिस्टोग्राम : निरंतर डेटा के लिए।
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लाइन ग्राफ : समय–श्रृंखला (Time Series) के रुझान दिखाने हेतु।
ग्राफ डेटा को अधिक स्पष्ट, आकर्षक और विश्लेषण–योग्य बनाते हैं।
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Q7. सहसंबंध (Correlation) क्या है? पियरसन सहसंबंध गुणांक समझाइए।
सहसंबंध दो चरों के बीच संबंध की तीव्रता और दिशा को मापता है। यह बताता है कि एक चर के बढ़ने पर दूसरा चर बढ़ता है, घटता है या प्रभावित नहीं होता।
पियरसन सहसंबंध गुणांक (r) एक रैखिक संबंध को मापता है। इसका मान –1 से +1 के बीच होता है।
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+1 = पूर्ण सकारात्मक संबंध
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–1 = पूर्ण नकारात्मक संबंध
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0 = कोई रैखिक संबंध नहीं
यह गुणांक सह–प्रसरण (Covariance) और मानक विचलन के आधार पर निकाला जाता है। यह अर्थशास्त्र, व्यवसाय और शोध में अत्यंत उपयोगी है।
Q8. प्रतिगमन (Regression) क्या है? पूर्वानुमान में इसका उपयोग बताइए।
प्रतिगमन विश्लेषण दो चरों के बीच कारण–प्रभाव संबंध को समझने की सांख्यिकीय विधि है। सरल रैखिक प्रतिगमन में एक स्वतंत्र चर (X) का उपयोग आश्रित चर (Y) को अनुमानित करने हेतु किया जाता है।
प्रतिगमन समीकरण—
Y = a + bX
जहाँ a अवरोध (intercept) और b ढाल (slope) है।
प्रतिगमन भविष्य–वाणी, रुझान विश्लेषण, मांग पूर्वानुमान, जोखिम आकलन और वैज्ञानिक विश्लेषण में सहायक है।
Q9. सूचकांक संख्याएँ (Index Numbers) क्या हैं? इनके निर्माण के चरण बताइए।
सूचकांक संख्याएँ समय के साथ–साथ किसी आर्थिक या सामाजिक चर में परिवर्तन को मापने के लिए उपयोग की जाती हैं। ये मूल्य, मात्रा, उत्पादन, मजदूरी इत्यादि के परिवर्तन को दर्शाती हैं।
निर्माण के चरण—
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आधार वर्ष का चयन
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वस्तुओं का चयन
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मूल्य/मात्रा डेटा संग्रह
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सूत्र का चयन (लैस्पेयर्स, पास्चे, फिशर)
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सूचकांक की गणना व व्याख्या
सूचकांक संख्याएँ मुद्रास्फीति, जीवन–यापन लागत और आर्थिक नीति निर्धारण में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
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Q10. गुणात्मक आँकड़ों का विश्लेषण क्या है? कोडिंग और थीमैटिक विश्लेषण समझाइए।
गुणात्मक आँकड़ों का विश्लेषण गैर–संख्यात्मक डेटा जैसे इंटरव्यू, टिप्पणियाँ, दस्तावेज़ आदि की व्याख्या की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मानव व्यवहार, भावनाओं, अनुभवों और सामाजिक प्रक्रियाओं को समझना है।
कोडिंग (Coding)—डेटा के विभिन्न भागों को लेबल देना ताकि अर्थपूर्ण श्रेणियाँ बन सकें।
थीमैटिक विश्लेषण—डेटा में बार–बार आने वाले पैटर्न या थीम ढूँढना।
कंटेंट विश्लेषण—पाठ सामग्री में शब्दों/विचारों की आवृत्ति का विश्लेषण।
गुणात्मक विश्लेषण सामाजिक विज्ञान, मनोविज्ञान, शिक्षा और मानव व्यवहार अनुसंधान में व्यापक उपयोग होता है।
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