IGNOU FREE BANS-183 पर्यटन मानव विज्ञान Solved Guess Paper 2025
Q1. पर्यटन मानव विज्ञान (Tourism Anthropology) की परिभाषा, क्षेत्र एवं महत्व समझाइए।
पर्यटन मानव विज्ञान मानव विज्ञान की वह शाखा है जो पर्यटन को सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक गतिविधि के रूप में अध्ययन करती है। इसका मूल उद्देश्य यह समझना है कि पर्यटन लोगों, संस्कृतियों, परंपराओं और समुदायों को कैसे प्रभावित करता है। यह केवल पर्यटन उद्योग या प्रबंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यटन को एक सांस्कृतिक प्रक्रिया के रूप में देखता है, जहां पर्यटक और स्थानीय समुदाय एक-दूसरे के साथ लगातार संवाद करते हैं।
पर्यटन मानव विज्ञान का क्षेत्र (Scope) काफी व्यापक है। इसमें पर्यटक व्यवहार, यात्रा के उद्देश्यों, सांस्कृतिक विनिमय, पहचान निर्माण, परंपराओं में बदलाव, सांस्कृतिक सामाग्रीकरण (commodification), और पर्यटन के सामाजिक प्रभाव शामिल हैं। यह समझने की कोशिश की जाती है कि पर्यटक नई जगहों पर जाकर कैसे अनुभव प्राप्त करते हैं और स्थानीय समाज उनकी उपस्थिति को कैसे स्वीकार या अस्वीकार करता है। इसके अंतर्गत धार्मिक पर्यटन, विरासत पर्यटन, इको-टूरिज्म, जातीय पर्यटन, सामुदायिक पर्यटन आदि भी शामिल होते हैं।
पर्यटन मानव विज्ञान का महत्व आज के वैश्विक युग में अत्यधिक बढ़ गया है। पर्यटन एक बड़ा आर्थिक क्षेत्र बन चुका है, इसलिए इसके सांस्कृतिक और सामाजिक प्रभावों को समझना जरूरी है। यह विद्वानों को यह जानने में मदद करता है कि सांस्कृतिक परिवर्तन कैसे होते हैं, परंपराएँ कैसे बदलती हैं, और किस प्रकार पर्यटन स्थानीय लोगों के जीवन, रोजगार, रीति-रिवाज और पर्यावरण को प्रभावित करता है। मानव वैज्ञानिक यह भी अध्ययन करते हैं कि पर्यटन असमानता, शक्ति संबंधों, और सांस्कृतिक गलतफहमियों को कैसे जन्म देता है।
पर्यटन मानव विज्ञान स्थानीय समुदायों के लिए टिकाऊ पर्यटन मॉडल विकसित करने में मदद करता है, जिससे उनकी संस्कृति सुरक्षित रहती है और आर्थिक लाभ भी मिलता है। यह यह भी बताता है कि पर्यटकों को स्थानीय नीतियों और परंपराओं का सम्मान कैसे करना चाहिए।
अंततः, पर्यटन मानव विज्ञान पर्यटन को केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि एक गहरी सामाजिक और सांस्कृतिक प्रक्रिया मानता है, जो मानव जीवन, सांस्कृतिक विविधता और वैश्वीकरण को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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Q2. पर्यटन का विकास: प्रारंभिक यात्रा से आधुनिक पर्यटन तक समझाइए।
मानव इतिहास में यात्रा की परंपरा बहुत पुरानी है। प्रारंभिक समय में लोग व्यापार, युद्ध, तीर्थयात्रा, शिक्षा और अन्वेषण के उद्देश्य से यात्रा करते थे। प्राचीन मिस्र, यूनान, रोम और भारत में सड़कें, सराय और नाव परिवहन विकसित थे जिससे यात्रा आसान हो सकी। भारत में तीर्थयात्राएँ जैसे काशी, प्रयाग और बद्रीनाथ प्राचीन काल से महत्वपूर्ण रही हैं।
रोमन काल में विश्राम स्थलों, स्पा, और मनोरंजन के लिए यात्रा आम थी। मध्यकाल में असुरक्षा के बावजूद धार्मिक यात्राएँ जारी रहीं। पुनर्जागरण काल में यूरोप में “ग्रैंड टूर” का चलन शुरू हुआ, जिसमें युवा राजकुमार कला और संस्कृति सीखने विदेश जाते थे।
आधुनिक पर्यटन का वास्तविक विकास औद्योगिक क्रांति के बाद हुआ। रेल, स्टीमर, मोटरगाड़ियों और सड़कों के विस्तार ने यात्रा को सुलभ बनाया। 1841 में थॉमस कुक द्वारा आयोजित पहली पैकेज यात्रा ने पर्यटन उद्योग को नया आकार दिया। 20वीं सदी में हवाई यात्रा के आगमन से अंतरराष्ट्रीय पर्यटन तेजी से बढ़ा और मध्यम वर्ग भी छुट्टियों पर जाने लगा।
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद “मास टूरिज्म” का दौर आया, जिसमें समुद्र तट पर्यटन, हिल स्टेशन, साहसिक पर्यटन और सांस्कृतिक पर्यटन लोकप्रिय हुए। 21वीं सदी में तकनीक, इंटरनेट और वैश्वीकरण ने पर्यटन को और विस्तृत कर दिया। ऑनलाइन बुकिंग, सोशल मीडिया और कम लागत वाली हवाई सेवाओं ने पर्यटन को बेहद आसान बना दिया।
आज पर्यटन के नए रूप जैसे इको-टूरिज्म, मेडिकल पर्यटन, आध्यात्मिक पर्यटन, ग्रामीण पर्यटन और अनुभव आधारित पर्यटन तेजी से बढ़ रहे हैं। इस प्रकार, पर्यटन का विकास मानव जिज्ञासा, तकनीकी प्रगति और वैश्वीकरण का परिणाम है।
Q3. पर्यटक प्रेरणा (Tourist Motivation) क्या है? मुख्य प्रकारों की व्याख्या कीजिए।
पर्यटक प्रेरणा वह मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कारण हैं जो किसी व्यक्ति को यात्रा करने के लिए प्रेरित करते हैं। यह बताती है कि लोग अपनी रोजमर्रा की जिंदगी से बाहर निकलकर नई जगहों की ओर क्यों आकर्षित होते हैं।
1. पुश एवं पुल प्रेरणा (Push & Pull):
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पुश फैक्टर व्यक्ति के भीतर से उत्पन्न होते हैं—जैसे तनाव से मुक्ति, रोमांच, आराम, ज्ञान प्राप्ति, या दिनचर्या से भागना।
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पुल फैक्टर बाहरी आकर्षण होते हैं—जैसे समुद्र तट, ऐतिहासिक स्मारक, संस्कृति, प्राकृतिक दृश्य, मेलें और त्यौहार।
2. मैस्लो सिद्धांत:
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मूलभूत ज़रूरतें: आराम, विश्राम।
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सुरक्षा: सुरक्षित जगहों की तलाश।
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सामाजिक: परिवार/दोस्तों के साथ समय बिताना।
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सम्मान: प्रतिष्ठा, फोटो साझा करने की इच्छा।
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आत्म-साक्षात्कार: नए अनुभव तलाशना।
3. सांस्कृतिक प्रेरणा:
लोग विभिन्न संस्कृतियों को जानने, रीति-रिवाजों को समझने और “प्रामाणिक अनुभव” पाने के लिए यात्रा करते हैं।
4. भावनात्मक प्रेरणा:
– आध्यात्मिक शांति, रोमांस, यादों से जुड़ाव, मानसिक उपचार।
5. सामाजिक-आर्थिक प्रेरणा:
– व्यवसाय, शिक्षा, चिकित्सा और प्रवास आधारित यात्राएँ।
इस प्रकार, पर्यटन प्रेरणा बहुआयामी होती है और व्यक्ति के व्यक्तित्व, संस्कृति एवं जीवन परिस्थितियों पर आधारित होती है।
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Q4. मेजबान–अतिथि (Host–Guest) संबंध और उसका स्थानीय समुदायों पर प्रभाव वर्णन कीजिए।
मेजबान–अतिथि संबंध पर्यटन मानव विज्ञान का महत्वपूर्ण विषय है। यह पर्यटकों और स्थानीय लोगों के बीच होने वाले संवाद, व्यवहार, आदान-प्रदान और सांस्कृतिक संपर्क को दर्शाता है।
सकारात्मक प्रभाव:
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सांस्कृतिक आदान-प्रदान: पर्यटक नई परंपराएँ सीखते हैं और स्थानीय संस्कृति को वैश्विक पहचान मिलती है।
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आर्थिक लाभ: स्थानीय लोगों को रोजगार, व्यवसाय और आय के अवसर मिलते हैं।
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सामाजिक विकास: शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़कों और संचार व्यवस्था में सुधार होता है।
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सांस्कृतिक गर्व: अपनी संस्कृति को प्रस्तुत करने से समुदाय में गर्व की भावना बढ़ती है।
नकारात्मक प्रभाव:
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सांस्कृतिक सामाग्रीकरण: परंपराएँ दिखावे के लिए बदल दी जाती हैं, जिससे उनकी प्रामाणिकता घटती है।
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सामाजिक असमानता: कुछ लोग पर्यटन से अधिक लाभ पाते हैं, जिससे असंतुलन बढ़ता है।
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पारिस्थितिक दबाव: अधिक भीड़, कचरा, शोर प्रदूषण और पर्यावरण क्षरण।
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मानसिक प्रभाव: युवा पीढ़ी विदेशी जीवनशैली की नकल करने लगती है, जिससे सांस्कृतिक टकराव पैदा होता है।
यदि दोनों पक्ष सम्मान, संवेदनशीलता और समझदारी से व्यवहार करें, तो मेजबान–अतिथि संबंध सामंजस्यपूर्ण और लाभकारी सिद्ध हो सकते हैं।
Q5. सांस्कृतिक सामाग्रीकरण (Cultural Commodification) की अवधारणा एवं इसके लाभ–हानि समझाइए।
सांस्कृतिक सामाग्रीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें किसी संस्कृति के कला, नृत्य, रीति-रिवाज, मिथक, वस्त्र या त्योहारों को बाज़ार की वस्तु बनाकर पर्यटकों को बेचा जाता है। यह पर्यटन उद्योग में बहुत सामान्य है।
लाभ:
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आर्थिक अवसर: हस्तशिल्प बिक्री, नृत्य प्रस्तुति, परंपरागत खाद्य, होमस्टे आदि से आय बढ़ती है।
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सांस्कृतिक संरक्षण: भूली हुई कला या प्रथाएँ पर्यटन के कारण पुनर्जीवित हो जाती हैं।
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वैश्विक पहचान: संस्कृति का प्रचार होता है और समुदाय को सम्मान मिलता है।
हानियाँ:
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प्रामाणिकता का क्षय: परंपराएँ बदल जाती हैं और केवल दिखावे का रूप ले लेती हैं।
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गलत प्रस्तुति: व्यापारीकरण के कारण संस्कृति का गलत अर्थ या स्टीरियोटाइप बन जाता है।
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शोषण: बाहरी एजेंसी लाभ लेती है और वास्तविक समुदाय को कम आय मिलती है।
इस प्रकार, सांस्कृतिक सामाग्रीकरण लाभदायक भी है और जोखिमपूर्ण भी। संतुलन और सामुदायिक नियंत्रण आवश्यक है।
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Q6. इको-टूरिज्म की अवधारणा एवं स्थानीय समुदायों के लिए इसका महत्व समझाइए।
इको-टूरिज्म प्रकृति आधारित पर्यटन है जिसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा और स्थानीय समुदायों की भागीदारी होता है। यह पर्यावरण को कम नुकसान पहुँचाते हुए पर्यटन का लाभ पहुंचाने का तरीका है।
इसके मुख्य सिद्धांत हैं—जैव विविधता संरक्षण, जिम्मेदार यात्रा, स्थानीय संस्कृति का सम्मान और आर्थिक लाभ का न्यायपूर्ण वितरण।
स्थानीय समुदायों के लिए महत्व:
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रोजगार: गाइड, होमस्टे, हस्तशिल्प, जैविक कृषि से आय।
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प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा: जंगल, नदियाँ, जीव-जंतु सुरक्षित किए जाते हैं।
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शैक्षिक अवसर: समुदाय और पर्यटक दोनों पर्यावरण के महत्व को समझते हैं।
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सांस्कृतिक संरक्षण: आदिवासी ज्ञान, लोककथाएँ, पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियाँ सुरक्षित रहती हैं।
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महिला सशक्तिकरण: महिलाएँ पर्यटन सेवाओं में भाग लेकर आर्थिक रूप से स्वतंत्र होती हैं।
यदि इको-टूरिज्म को सही तरीके से लागू किया जाए तो यह पर्यावरण और समुदाय दोनों के लिए लाभकारी साबित होता है।
Q7. विरासत पर्यटन (Heritage Tourism) क्या है? मानव विज्ञान के दृष्टिकोण से इसका महत्व।
विरासत पर्यटन में लोग ऐतिहासिक इमारतों, पुरातात्विक स्थलों, स्मारकों, मंदिरों, संग्रहालयों, किलों और सांस्कृतिक परंपराओं को देखने जाते हैं। यह अतीत के बारे में सीखने और सांस्कृतिक पहचान को समझने का अवसर प्रदान करता है।
मानव विज्ञान के अनुसार विरासत स्थल केवल पत्थर या इमारतें नहीं, बल्कि एक समाज की स्मृति, पहचान, परंपरा और सांस्कृतिक निरंतरता के प्रतीक होते हैं। वे यह बताते हैं कि समाज कैसे विकसित हुआ, किस तरह के रीति-रिवाज थे, और किस प्रकार इतिहास ने वर्तमान संस्कृति को आकार दिया।
विरासत पर्यटन आर्थिक विकास में भी मदद करता है—स्थानीय गाइड, कारीगर, होटल, परिवहन और दुकानों को रोजगार मिलता है।
परंतु अत्यधिक भीड़, कचरा और व्यावसायीकरण से स्मारकों को नुकसान पहुँचने की आशंका रहती है। इसलिए टिकाऊ प्रबंधन आवश्यक है।
मानव वैज्ञानिक संस्कृति की सही प्रस्तुति, समुदाय की भागीदारी और संरक्षण नीतियों पर जोर देते हैं।
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Q8. सतत पर्यटन (Sustainable Tourism) की आवश्यकता और महत्व।
सतत पर्यटन वह पर्यटन है जो वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करता है, लेकिन भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधन सुरक्षित रखता है। इसके तीन स्तंभ हैं—पर्यावरणीय, आर्थिक और सांस्कृतिक संतुलन।
आज के समय में जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, भीड़भाड़ और संसाधन क्षरण के कारण सतत पर्यटन बेहद आवश्यक है। यह प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करता है, प्रदूषण कम करता है और स्थानीय सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखता है।
सतत पर्यटन यह सुनिश्चित करता है कि पर्यटन का लाभ स्थानीय लोगों तक पहुँचे। स्थानीय भोजन, कला, संगीत और परंपराओं को बढ़ावा मिलता है। साथ ही, पर्यटक भी जिम्मेदार व्यवहार सीखते हैं—जैसे प्लास्टिक कम उपयोग करना, पानी बचाना और स्थानीय संस्कृति का सम्मान करना।
इस प्रकार, 21वीं सदी में सतत पर्यटन पर्यटन उद्योग और पर्यावरण दोनों के लिए अनिवार्य बन गया है।
Q9. आधुनिक पर्यटन में तकनीक (Technology) की भूमिका समझाइए।
तकनीक ने आधुनिक पर्यटन को पूरी तरह बदल दिया है। इंटरनेट के आने से लोग गंतव्य की जानकारी, होटल बुकिंग, टिकटों की कीमतें और अनुभव आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। मोबाइल ऐप्स ने यात्रा को सरल और तेज बना दिया है।
सोशल मीडिया जैसे Instagram, YouTube और Facebook पर्यटन के नए प्रेरक बन गए हैं। लोग तस्वीरों और वीडियो से प्रभावित होकर यात्राएँ चुनते हैं।
GPS और Google Maps ने नेविगेशन आसान किया है।
AI चैटबॉट, ऑनलाइन भुगतान, स्मार्ट होटल, ई-टिकटिंग और वर्चुअल टूर भी तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।
हालाँकि, तकनीक पर निर्भरता से भीड़भाड़ और पर्यावरण दबाव बढ़ता है। फिर भी पर्यटन के विकास, सुविधा और प्रचार में तकनीक की भूमिका आज अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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Q10. जातीय पर्यटन (Ethnic Tourism) क्या है? इसके लाभ और चुनौतियाँ बताइए।
जातीय पर्यटन वह पर्यटन है जिसमें पर्यटक किसी आदिवासी, जनजातीय या विशिष्ट सांस्कृतिक समूह की जीवनशैली, परंपरा, भाषा, संगीत, नृत्य और खाद्य संस्कृति को देखने आते हैं। इसका उद्देश्य “अलग” या “प्रामाणिक” संस्कृति का अनुभव प्राप्त करना होता है।
लाभ:
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आर्थिक विकास: हस्तशिल्प, होमस्टे, लोक-नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से समुदाय को आय होती है।
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सांस्कृतिक पुनर्जीवन: पुरानी परंपराएँ और आर्ट-फॉर्म पुनर्जीवित होते हैं।
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अंतर-सांस्कृतिक समझ: पर्यटक विविधता को समझते हैं और सांस्कृतिक सम्मान बढ़ता है।
चुनौतियाँ:
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सांस्कृतिक सामाग्रीकरण: संस्कृति बाजार के लिए बदल जाती है और असली अर्थ खो जाता है।
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स्टीरियोटाइप बनना: समुदाय को “अलग” या “पिछड़ा” दिखाया जा सकता है।
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शोषण: बाहरी एजेंसियाँ लाभ लेती हैं जबकि समुदाय को कम हिस्सा मिलता है।
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गोपनीयता का उल्लंघन: पर्यटक निजी सांस्कृतिक समारोहों में दखल देने लगते हैं।
जातीय पर्यटन तभी सफल होता है जब समुदाय की भागीदारी, सम्मान और सही प्रस्तुति सुनिश्चित की जाए।
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