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BSOE 141 Solved Assignment Hindi Medium 2021-22

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BSOE 141 Solved Assignment Hindi Medium 2021-22

सत्रीय कार्य – I

निम्नलिखित प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 500 शब्दों में दीजिए।

Q. 1. नगर की अवधारणा को परिभाषित कीजिए और उसका वर्णन कीजिए, इसकी प्रकृति और क्षेत्र का स्पष्ट कीजिये

Ans. BSOE 141 Solved Assignment Hindi Medium 2021-22 नगर से व्यक्ति परिचित होता है । उसके चहल-पहल, भीड़ भाड़, प्रचुर मात्रा में यातायात और संदेश वाहन के साधनों का जाल बिछा होता है । व्यवसायिक, वाणिज्य और मनोरंजन के केंद्र होते हैं । शिक्षा, धर्म, व्यवसाय की अनेक संस्थाएं होती है । एक बहुत बड़ी जनसंख्या नगरों में निवास करती है व्यक्तियों के मध्य औपचारिक संबंध होते हैं । बल्कि बड़े नगरों में तो व्यक्ति एक दूसरे को पड़ोस में रहकर भी जान नहीं पाता है । एक अनेक विशेषताओं के होते हुए भी नगर को परिभाषित करना सरल कार्य नहीं है ।

कानूनी दृष्टिकोण के अनुसार  : – नगर व स्थान है जहां एक निश्चित संख्या से अधिक व्यक्ति निवास करते हो और जहां एक निश्चित सीमा के अंतर्गत, नगरपालिका, सरकार द्वारा प्राप्त अधिकारों का प्रयोग करती हो । इस तरह नगर एक शासकीय इकाई है । परिस्थितिकीय आधार पर नगर को एक प्राकृतिक तथा सामाजिक इकाई कहते हैं ।

जनसंख्यात्मक दृष्टिकोण से भी नगर को परिभाषित करने का प्रयास किया जाता है । किसी स्थान विशेष को नगर कहने के लिए निर्धारित जनसंख्या का आधार लिया जाता है जैसे कस्बे के लिए कम से कम 5000 की population आवश्यक है । इस तरह अमेरिका में 2500 और इससे अधिक जनसंख्या वाले स्थान को नगर की श्रेणी में रखने की अनुशंसा की जाती है । इसी तरह India में एक लाख या इससे अधिक population वाले क्षेत्रों को नगर का नाम दिया जाता है । जनसंख्या के आधार पर की गई परिभाषाएं भी सभी देशों और क्षेत्रों पर समान रूप से लागू नहीं होती । अस्तु यह सार्वभौमिक परिभाषा होने का दावा नहीं कर सकती है । फिर भी जनसंख्या का किसी स्थान पर जमाव, नगर की एक महत्वपूर्ण विशेषता है और इस जनसंख्या में विभिन्न जाति, धर्म, संप्रदाय, प्रजाति के व्यक्ति होते हैं जिनकी अपनी भाषा, धर्म, रहन सहन, खानपान, परंपराएं, रीति रिवाज, मूल्य होते हैं, अस्तु नगर की प्रकृति में विभेदीकरण की विशेषता समाहित होती है ।

Q. 2. पारिस्थितिकीय अर्थों में नगरीय समाजशास्त्र में नगर और उसके स्थान को कैसे समझा जाता है।

Ans. BSOE 141 Solved Assignment Hindi Medium 2021-22 पारिस्थितिकीय अर्थों में नगरीय समाजशास्त्र में नगर और उसके स्थान को कैसे समझा जाता है – नगरीय समाजशास्त्र नगर की असंख्य समस्याओं का अध्ययन करता है जिनका प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से मानवीय संबंधों से जुड़ाव है। ये नगरीय समस्याएँ और नगरीय नूतन मूल्य आदर्श और मान्यताएं, समाज की संपूर्ण व्यवस्था को प्रभावित करती है। समाज की संपूर्ण प्रक्रिया को परिवर्तित करती है। इन समस्त तथ्यों के परिणाम-स्वरूप नगर का आर्थिक-सामाजिक, सांस्कृतिक ढ़ाँचे से जुड़े परम्परागत मूल्य परि-वर्तित हो जाते है। विज्ञान और प्रौद्योगिकीय प्रगति ने समाज को जहां आधुनिक और प्रगतिशील बनाया है वहीं मानव-समाज मे असंख्य नगरीय समस्याओं को भी उत्पन्न किया है। नगरों मे जनसंख्या का केन्द्रीकरण अनेक समस्याओं को जन्म दे रहा है। नगरीय समाजशास्त्र नगरीय जीवन, समाज संगठन, संस्था और समस्याओं को अध्ययन करता है।

नगरीय समाजशास्त्र का अर्थ है – नगरीय समाजशास्त्र समाजशास्त्र की वह शाखा है जो नगरीय जीवन का वैज्ञानिक, व्यवस्थित व क्रमबद्ध अध्ययन करती है। इसके अंतर्गत केवल नगरीय समाज का ही विस्तृत अध्ययन सम्मिलित है। नगरीय समाजशास्त्र की ओर भी व्यापक व व्यवस्थित रूप में समझने के लिए वास्तविक परिभाषाओं को पढ़ना आवश्यक हो जाता है।


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सत्रीय कार्य – II
निम्नलिखित प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 250 शब्दों में दीजिए।

3. नगरीय राजनीतिक अर्थव्यवस्था से आप क्‍या समझते हैं? चर्चा कीजिए।
4. नगरीय समाजशास्त्र में नेटवर्क के महत्व की व्याख्या कीजिए।
5. नगरीय समाज पर प्रवास / पलायन के कुछ सामाजिक परिणामों का उल्लेख कीजिए।


सत्रीय कार्य – III
निम्नलिखित प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 100 शब्दों में दीजिए।

6. प्रवास / पलायन में दबाव (Push) और आकर्षित (Pull) करने वाले कारक, स्पष्ट कीजिए।
7. नगरीकरण और नगरीयता में अंतर समझाएं।
8. मलिन बस्तियाँ क्‍या हैं?
9. नगरों के कुछ प्रकार का उल्लेख कीजिए ।
10. फौकॉल्ट और नगरीय क्षेत्रों में सांस्कृतिक राजनीति में सत्ता की उनकी अवधारणा को स्पष्ट कीजिए।

Last Date of Submission of IGNOU Assignments

  • For July 2021 Session – 30th April 2022
  • For January 2022 Session – 31st October 2022

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